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राज या हक़ीकत By Priyanka Saini

यह कहानी है मासूम – सी मान्या की.. जो अभी केवल 23 साल की है । जो फिलहाल में एक स्कूल टीचर है। जितनी मासूम.. उतनी ही प्यारी है, लेकिन एक दिन उसकी पूरी दुनिया पलट सी जाती है। जब उसकी...

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कॉल By sky

हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक आवाज़  "मुझे क्यों मारा?" ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने स...

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काश हम अजनबी होते तो खुश होते By Avinash

रात के दो बज चुके थे। दिसंबर की सर्द हवाएं खिड़की के कांच से टकराकर एक सिहरन पैदा कर रही थीं। कमरे के भीतर का सन्नाटा उस बाहरी ठंड से भी ज्यादा सर्द और भारी था। गीता बेड के एक कोने...

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पवित्र प्रेम या अभिशाप ? By Sonam Brijwasi

रात का अंधेरा बहुत गहरा था…आसमान में बादल ऐसे छाए थे जैसे किसी अनहोनी का इंतज़ार कर रहे हों।
एक पुराने खंडहर जैसे महल के अंदर…लाल रोशनी टिमटिमा रही थी। वहीं धीरे-धीरे एक लड़की बाह...

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पंखों का बोझ By Amardeep Kumar

कमरे में एसी चल रहा था, फिर भी संजना की हथेलियां पसीने से तर थीं। फोन को इतनी जोर से पकड़ा हुआ था कि उंगलियों के पोर सफेद पड़ गए थे — जैसे अगर उसने ज़रा भी ढील दी, तो कुछ छूट जाएगा...

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बंद लिफाफा By Digant J Patel

रात के ठीक 11:57 बजे थे।
मुंबई शहर बारिश में डूबा हुआ था।

अनिकेत अपनी कार पार्क करके अपार्टमेंट की ओर बढ़ रहा था। जैसे ही उसने मुख्य दरवाज़ा खोला, उसकी नज़र ज़मीन पर पड़े एक सफ...

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Objection, Ms. Singhania! By Aarushi Singh Rajput

रात का गहरा अंधेरा चारों तरफ फैला हुआ था।

सड़क लगभग सुनसान थी।

दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं दे रहा था।

एक काली कार तेज़ रफ्तार से सड़क पर दौड़ी चली जा रही थी।

उसकी हेडलाइट...

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पवित्र बहु By archana

रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी।

चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया।

वह...

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मॉडर्न साधु By nirala ji

ये कहानी शुरू होती हैं अस्पताल से....जहां मोहन अपने होने वाले बच्चे के लिए चिंतित हैं। ऑपरेशन रूम से आती दर्द भरी चीखों ने उसे परेशान कर दिया हैं चिंता ने उसके बच्चे पैदा होने की ख...

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विक्री By Priyosi Sarkar

2087 में, सबसे महंगी चीज़ यादें थीं। और सबसे सस्ती चीज़ भी।
मीरा के हाथ काँपते थे — बस थोड़े से, मुश्किल से नज़र आने वाले — जब उसने अपनी हथेली मेमवॉल्ट स्कैनर के ऊपर रखी। शीशे के...

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राज या हक़ीकत By Priyanka Saini

यह कहानी है मासूम – सी मान्या की.. जो अभी केवल 23 साल की है । जो फिलहाल में एक स्कूल टीचर है। जितनी मासूम.. उतनी ही प्यारी है, लेकिन एक दिन उसकी पूरी दुनिया पलट सी जाती है। जब उसकी...

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हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक आवाज़  "मुझे क्यों मारा?" ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने स...

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काश हम अजनबी होते तो खुश होते By Avinash

रात के दो बज चुके थे। दिसंबर की सर्द हवाएं खिड़की के कांच से टकराकर एक सिहरन पैदा कर रही थीं। कमरे के भीतर का सन्नाटा उस बाहरी ठंड से भी ज्यादा सर्द और भारी था। गीता बेड के एक कोने...

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पवित्र प्रेम या अभिशाप ? By Sonam Brijwasi

रात का अंधेरा बहुत गहरा था…आसमान में बादल ऐसे छाए थे जैसे किसी अनहोनी का इंतज़ार कर रहे हों।
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पंखों का बोझ By Amardeep Kumar

कमरे में एसी चल रहा था, फिर भी संजना की हथेलियां पसीने से तर थीं। फोन को इतनी जोर से पकड़ा हुआ था कि उंगलियों के पोर सफेद पड़ गए थे — जैसे अगर उसने ज़रा भी ढील दी, तो कुछ छूट जाएगा...

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Objection, Ms. Singhania! By Aarushi Singh Rajput

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