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छह महीने बाद हरिद्वार सेंट्रल जेल की दीवारें सफेद हैं, लेकिन मुझे हमेशा लगता है...
शीर्षक: 2025 में भी अधूरी आज़ादीसाल 2025 की सर्द सुबह थी। शहर के बाहर बने फ्लाईओ...
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्...
अनकही देहलीज़भाग 1: अदृश्य रेखाएं"साहब, चाय टेबल पर रख दी है।"आदित्य ने अपनी फाइल...
शून्य की यात्रा — न सत्य, न असत्य जीवन में न कुछ अंतिम सत्य है,न कुछ अंतिम असत्...
Hi दोस्तों,आज Hug Day है… तो एक किस्सा share करना चाहता हूं...College के 2 साल ह...
एक साल बाद,(जिन्दल इंड्रस्टीज़)"महाराज! आज वो दिन है जिस दिन उस कन्या की मृत्यु...
भाग एक: वो पहली बारिश मीरा को बारिश से नफ़रत थी। शायद इसलिए कि उसकी ज़िंदगी में...
आलोचना : एक जासूसी लेखक की मुकम्मल जिंदगी की दास्तान : आत्मकथा: पानी केरा...
फिल्म आलोचना :_तेरे इश्क में लड़की की बेवफाई से बर्बाद होते युवक ---------------...
नवंबर का महीना था। आसमान से हल्की-हल्की बारिश गिर रही थी। बूंदों की नमी में ठंड और भी तेज़ लग रही थी। चारों ओर हरियाली छाई हुई थी, जैसे धरती ने हरे रंग की चादर ओढ़ ली हो।...
Author note :hiiiii dosto यह एक नोवल जैसे ही लिखी गई मेरे खुद के द्वारा बनाई गयी anime story है। आप इसे पढ़े और इतना पढ़े की आप इसे अपने दिमाग मे एक imge जिसे feel कर सके ।...
शहर की शाम को और भी खूबसूरत बना रही थी।भीगी सड़कों पर स्ट्रीटलाइट्स की रोशनी मोतियों की तरह चमक रही थी।अनुष्का बस स्टॉप पर खड़ी थी—एक हाथ में ऑफिस की फाइलें,दूसरे हाथ में गर्म चाय...
ज़िंदगी में कभी-कभी ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं जो हमारी अक़्ल और समझ से बाहर होती हैं। आप मानें या न मानें, लेकिन उन बातों को नकारा नहीं जा सकता। वे अपने आप को सच साबित कर ही देती हैं।...
एक बड़े से बंगले के पीछे बने आउट हाउस के एक कमरे में बिल्कुल अंधेरा था , और उसी अंधेरे कमरे के अंदर से किसी लड़की की सिसकियों की आवाजें आ रही थी, जो आवाज सिसकियों में भी बहुत प्यार...
गाँव की सुबह हमेशा की तरह शांत थी। हल्की धूप खेतों पर फैल रही थी, हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू घुली हुई थी। वह उसी गाँव में पला-बढ़ा था, सयुग जहाँ हर कोई एक-दूसरे को नाम से जानता...
बेजुबान इश्क – लव स्टोरी नज़रों की खामोश बातेंमुंबई की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में, भीड़ से भरी लोकल ट्रेन के बीचदो आँखें रोज़ एक-दूसरे को ढूँढ़ती थीं—अन्या, एक सीधी-सादी, शांत और सम...
Location: अंडरग्राउंड RAW फ़ैसिलिटी, लद्दाख वक्त: सुबह 4:30 बजे काँपती हुई ठंडी हवा उस बंकर के लोहे के दरवाज़े से टकरा रही थी, जहाँ देश का सबसे ख़ुफ़िया मिशन शुरू होने जा रहा...
सुनहरे चंदन के पेड़ों की लंबी कतारों के बीच, एक छोटी-सी गुफा थी—शांत, ठंडी और सुगंध से भरी हुई। वही थी चंदनी का घर, चंदनवन की रक्षिणी। न जाने कितने वर्षों से वह अकेले ही इस विशाल...
(बैलों का महान मेला – शुरुआत) लेखक राज फुलवरे अध्याय 1 – बैलों का सबसे बड़ा मेला सुबह का सूरज अभी धीरे-धीरे आसमान में चढ़ रहा था। एक हल्की-सी गुलाबी रोशनी खेतों पर फैल चु...
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