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1.) डर लग रहा है।“ आज मुझे डर लग रहा है…!कहीं वक्त से पहले ये वक्त ना बदल जाए।जि...
कृतिका कहती है --कृतिका :- हां कम क्या , प्यार है नही आदित्य को दिल मे तुम्हारे...
जनजातीय लोक संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन की चुनौती प्रस्तुतकर्ता: विवेक रंजन श...
बारिश की बूँदें खिड़की के शीशे पर टकरा रही थीं। हर टपाक के साथ कमरे में मौजूद सन...
शीर्षकगीता और क़ुरआनउपशीर्षकदोनों का सार एक ही सत्य है — शब्द अलग हैं AGYAT AGY...
मुंबई कभी नहीं सोती.रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशन...
सुबह की हल्की धूप कमरे में फैल रही थी। खिड़की से आती रोशनी शानवी के चेहरे पर पड़...
शादी में पाँच दिन बाकी थे। सौम्या का फोन अचानक कंपन करता है। वह चौंकती है। स्क्र...
नष्ट होती पृथ्वी और जीवन के लिए संघर्ष करती मानव जाति। यह एक काल्पनिक कहानी है,...
भुतहा हवेली का रहस्यभारत के एक छोटे से कस्बे में, जहाँ दिन में भी सन्नाटा पसरा र...
1.स्याही का दामन। मेरे लफ्जो ने स्याही का दामन थाम लिया है। अब लिखूँगी मैं अपनी किश्मत अपने ही हाथो से। लिखूँगी अपना हर ख्वाब कायम,कोई अधूरी ख्वाहिश ना छूटने दूंगी।भर दूंगी रंग आशम...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
बाहर मुंबई की कभी न थमने वाली रफ़्तार थी और केबिन के अंदर एक गला घोंटने वाली खामोशी। पुराने एयर कंडीशनर की घरघराहट ऐसी लग रही थी जैसे कोई वेंटिलेटर पर आखिरी सांसें ले रहा हो। आरंभी...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
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