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-------------समय ------------- वही वक़्त कि लहरें जो अक्सर दिमाग़ मे उठती है। ग्रे...
"शितिज, मुझे संजना ने बताया कि तुम और मीरा एक-दूसरे को पसंद करते हो... और तुम उस...
हम फिर से मिले मगर इस तरह ऐपीसोड़ - 28अरुण इतने दिनों से जो उस एक्सीडेंट के भयान...
जहाँ पर इन्हे एक नहीं बल्कि दो जिन्न दिखाई देते है। एक पुरुष जिन्न ओर एक स्त्री...
एपिसोड 7: आख़िरी धुन और भागने की तैयारीमोहब्बत जब इम्तिहान मांगती है, तो रास्ते...
कालू के गायब होते ही उन आठों दोस्तों की देह में एक अजीब सी ऐंठन पैदा हुई। उनके श...
Episode 9 – वो सच जो कहना ज़रूरी था सुबह की रोशनी कमरे में धीरे-धीरे फैल रही थी।...
अध्याय 4 आध्यात्मिक सागर की नींबइस समय विराज आंगन में अकेला खड़ा था। चारों ओर सन...
कुदरत का अकाट्य नियम: हम जो देते हैं, वही लौटकर आता हैयह धरती किसी एक प्रजाति की...
एपिसोड 19 अंधेरे का नया जन्मशहर की बेचैनीसमाधि से लौटने के बाद रोहन को लगा कि सब...
क्या होगा जब दुनिया को एक महामारी से बचाने निकला एक डॉक्टर परिवार, एक ऐसे प्रतिबंधित जंगल में कदम रखेगा जहाँ साठ सालों से किसी इंसान का जाना मना है? 'ब्लैक ज़ोन: द लॉस्ट वर्...
एक दिन उनके राज्य में एक भिखारी आ पहुँचा। उसके कपड़े फटे-पुराने थे और उसकी त्वचा पर बड़े-बड़े फोड़े-फुंसियाँ थीं, जिनसे निरंतर मवाद बह रहा था। उसके शरीर से दुर्गंध फैल रही । उसके ए...
1.प्रेम या व्यापार? जिसे तुम प्रेम कहते हो, ज़रा उसकी तह में जाकर देखो, क्या वो रूह का मिलन है, या बस एक गहरा समझौता? तुमने जिसे अपना कहा, क्या उसे सच में जाना है? या अपनी अध...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
वेदांत बीस बरस में बहुत तरक्की कर लिया है ।फ़िल्म निर्माता ,निर्देशक और उपन्यासकार लेखक भी है।वह बंगले के लॉन में मैना पक्षी के जोड़े को देखते ही रहा जाता है ।दोनों में इश्क हो रहा थ...
कुसुम सामने बैठे शीशे में खुद को घूरे जा रही थी। उसने खुद को देखा ! लाल साड़ी, बड़े-बड़े झुमके, माथे पे बिंदी, खुले बाल जो कमर तक थे, हाथों में चूड़ियाँ ! वो खुद को देख ही रही थी ज...
भाग 1 शापित हवेली रात के ठीक 3 बजकर 13 मिनट हुए थे। पूरा गाँव गहरी नींद में डूबा हुआ था। बाहर तेज़ हवा चल रही थी। पेड़ों की सूखी शाखाएँ एक-दूसरे से टकराकर अजीब आवाज़ें निक...
रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी। चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया। वह...
अस्पताल के उस वीरान कमरे में चारों ओर सफेद दीवारों का सन्नाटा पसरा हुआ था। केवल मशीनों की 'बीप-बीप' की आवाज़ उस सन्नाटे को चीर रही थी। रिया ने बहुत धीरे से अपनी पलकें झपकाई...
तकनीकी दृष्टि से नाटकों से अधिक सक्षम माध्यम आज उपलब्ध हैं। महान वृत्तान्तों के साथ स्थानीय चटकीले रंग, संयोजन-विखण्डन, रडार छवि- संस्कृति, अतियथार्थता के बीच नाटकों का स्थान कहाँ...
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