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तस्वीर देखते ही रिया के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं। जो आँखें अब तक मासूमियत और...
अध्याय 8: कोमा के भीतरधड़… धड़… धड़…ट्रेन के पहियों की आवाज़ अंधेरे अस्पताल में...
The Mystery of the - Chapter 4"तो दोस्तों, पिछले चैप्टर में हमने देखा कि डॉक्टर...
सन 2049 में दुनिया के सभी बड़े शहरों में एक अजीब नियम लागू था—हर व्यक्ति को अपनी...
हीरो...!भाग 3 : छोटी-छोटी इच्छाएँअगली सुबह आर्या की आँखें平时 से थोड़ी जल्दी खुल...
----------------स्टेज से भागकर चारू युनिवरासिटि के एक सुनसान केन्द्र मे आ गई थी।...
राठौर मेंशन की भव्य सीढ़ियाँ चढ़ते हुए चंचल मुस्कुराती हुई अन्विका को ऊपर ले जा...
एपिसोड 24– असली परीक्षाऑडिटोरियम में एक बार फिर सन्नाटा छा गया।सभी टीमें अपनी-अप...
विक्की ने कहा आज सारा का दिन है।आज जी भर कर शाॅपिंग कर लें।बहन।सारा ने हंसते हुए...
जैसे-जैसे दिन बीत रहे थे, देवपुर राजमहल में काल का सन्नाटा और गहराता जा रहा था।ए...
अनजानी मुलाकात लखनऊ की बारिश में भीगती वह शाम कुछ ख़ास थी। गोमती नगर के एक छोटे और शांत कैफे में मंद-मंद संगीत बज रहा था और बाहर की बूंदों की आहट कांच की खिड़कियों पर साफ़ सुनाई द...
आख़िरी लोकलरात के 11:52।ट्रेन छूटने ही वाली थी।अंगद दौड़ते हुए प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँचा।फोन कंधे और कान के बीच दबा हुआ—“बस 2 मिनट… मैं train में हूँ… भेज दूँगा।”दरवाज़े बंद होने लगे।व...
आंध्र प्रदेश का एक दूर-दराज और अलग-थलग गाँव था—पेरीकुलम (Perikulam)। यह गाँव भौगोलिक रूप से एक ऐसी जगह पर फंसा था जहाँ चारों तरफ से संकट घिरा हुआ था। गाँव के दो तरफ ऊंचे-ऊंचे पहाड़...
पहली मुलाक़ात** सुबह के ठीक 7:15 बजे शहर के एक शांत मोहल्ले में एक छोटी-सी आवाज़ गूँज उठी। “दीदी… उठ जाइए ना… कॉलेज नहीं जाना क्या?” दरवाज़े पर हल्के-हल्के लेकिन लगातार ठक...
बहुत लंबे और थकान भरे दिन के बाद अगर जिंदगी में कहीं सुकून है तो वो है सिर्फ़ ये मसाला चाय! मैं अपने घर की बालकनी में एक खाट पर बैठी थी। पास में एक हुक्का रखा हुआ था जिसे मैं घूरे...
मुंबई... सपनों की नगरी... एक ऐसा शहर जो कभी सोता नहीं। जहाँ रातें भी रोशनी से जगमगाती हैं और हर सुबह अपने साथ हजारों नए ख्वाब लेकर आती है। इस शहर में हर आँख में एक सपना पलता है...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
ઓટલો ગામની એ સવાર આજે પણ મારી આંખો સામે એવી જ ઊભી થાય છે સૂરજ હજી પૂરો ઉગ્યો ન હતો આકાશમાં હળવો લાલ રંગ પથરાયો હતો ઘરના આંગણામાં પડેલી ઠંડી માટી પર મારા નાના પગલા પડતા અને હું દોડત...
इस तरह एक सदियां बीत गए।। लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी। और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
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