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महाभारत की कहानी - भाग-२५० कौरव और पांडवों के स्वर्गलाभ प्रस्तावना कृष्णद्वैपा...
काव्या की बातों ने विराज के भीतर सुलगती आत्म-ग्लाानि की आग पर जैसे ठंडे पानी के...
टेंशन कम करने के आसान तरीके (Beginner Level)1. सांसें गहरी लें (Deep Breathing)•...
दार्जिलिंग की वह सुबह किसी डरावने सपने से कम नहीं थी।ठंड इतनी बेरहम थी कि साँस ल...
ऋग्वेद सूक्ति (१) की व्याख्या "न स सखा यो न ददाति सख्ये"ऋग्वेद --10/117/4भावार्...
उस रात आर्या बहुत देर तक सो नहीं पाई।बार-बार उसकी आंखों के सामने वही चेहरा आ रहा...
दिन के समय पौधे सूरज की रोशनी से अपना खाना बनाते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश...
— —**चैप्टर 5: इंग्लिश वाली मैडम, 'डोरेमोन' का रिज़, और कंपास की नोक**आ...
।वेदांत 2.0 लाइफ़": तुरीय-आधारित '0 बोध' को लाइफ़–साइंस और कॉन्शसनेस–स्ट...
बेगूसराय का वो काला दिनस्थान: गर्ल्स इंटर स्कूल एंड कॉलेज, मोहनपुरा (बेगूसराय, उ...
होरीराम ने दोनों बैलों को सानी-पानी दे कर अपनी स्त्री धनिया से कहा – गोबर को ऊख गोड़ने भेज देना। मैं न जाने कब लौटूँ। जरा मेरी लाठी दे दे। धनिया के दोनों हाथ गोबर से भरे थे। उपले प...
अम्मा, हू हू रोते हुए, चीख -चीख कर अम्मा ' हू हू क्या? हुआ मेरी खुशी ' क्यू ? रो रही है। अरे चुप हो जा। शान्त मन से बता ले ठन्डा पानी पी ' पारा ' ठन्डा होगा। अब...
बारिश तेज़ हो रही थी। शहर की ऊँची इमारतों के बीच खड़ी वह काँच की इमारत इतनी ठंडी लग रही थी, जैसे उसके अंदर इंसान नहीं, केवल मशीनें रहती हों। अनाया शर्मा के हाथ काँप रहे थे। उसकी...
आइए मिलते है इस कहानी की मुख्य नायिका से ईशानी शर्मा, जिसकी उम्र 23 साल है गोरा रंग, मध्यम कद, बादामी मोटी - मोटी आंखे जो कभी एक जगह नहीं टिकती, थोड़े घुंघराले कमर तक लंबे बाल जो ह...
हर कहानी में एक नायक होता है, पर कुछ नायक ऐसे भी होते हैं, जो कभी अपने लिए नहीं जीते। वो चुप रहते हैं, मगर हर पल लड़ते रहते हैं। 'आर्यन' एक साधारण सा इंसान, जिसके कंधों पर...
यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है। इसमें दर्शाए गए सभी पात्र, स्थान और घटनाएँ कल्पना पर आधारित हैं। किसी भी वास्तविक व्यक्ति स्थान या घटना से इसका कोई संबंध नहीं है।अंधकार का साम्राज्य...
हवेली की पुकार राहुल ने कार का इंजन बंद किया। कुछ सेकंड तक सिर्फ सन्नाटा था। फिर… दूर कहीं कुत्तों के भौंकने की आवाज गूँजी, जो अचानक ही थम गई, जैसे किसी ने उनका गला दबा दिया...
आख़िरी लोकलरात के 11:52।ट्रेन छूटने ही वाली थी।अंगद दौड़ते हुए प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँचा।फोन कंधे और कान के बीच दबा हुआ—“बस 2 मिनट… मैं train में हूँ… भेज दूँगा।”दरवाज़े बंद होने लगे।व...
शिजा एक शर्मीली, समझदार और चश्मा पहनने वाली लड़की थी। उसका चश्मा उसके लिए सिर्फ एक साधारण चीज नहीं था, बल्कि एक छुपा हुआ डर भी था। हर बार जब वह अपने दोस्तों के साथ कॉलेज में बैठती,...
शहर की कंक्रीट की दीवारों और इंसानी शोर के बीच कुछ ऐसी कहानियाँ जन्म लेती हैं, जो किसी उपन्यास के आखिरी पन्ने तक पहुँचने की ज़िद नहीं करतीं। दिल्ली जैसे शहर में, जहाँ हर कोई किसी न...
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