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-------------समय ------------- वही वक़्त कि लहरें जो अक्सर दिमाग़ मे उठती है। ग्रे...
"शितिज, मुझे संजना ने बताया कि तुम और मीरा एक-दूसरे को पसंद करते हो... और तुम उस...
हम फिर से मिले मगर इस तरह ऐपीसोड़ - 28अरुण इतने दिनों से जो उस एक्सीडेंट के भयान...
जहाँ पर इन्हे एक नहीं बल्कि दो जिन्न दिखाई देते है। एक पुरुष जिन्न ओर एक स्त्री...
एपिसोड 7: आख़िरी धुन और भागने की तैयारीमोहब्बत जब इम्तिहान मांगती है, तो रास्ते...
कालू के गायब होते ही उन आठों दोस्तों की देह में एक अजीब सी ऐंठन पैदा हुई। उनके श...
Episode 9 – वो सच जो कहना ज़रूरी था सुबह की रोशनी कमरे में धीरे-धीरे फैल रही थी।...
अध्याय 4 आध्यात्मिक सागर की नींबइस समय विराज आंगन में अकेला खड़ा था। चारों ओर सन...
कुदरत का अकाट्य नियम: हम जो देते हैं, वही लौटकर आता हैयह धरती किसी एक प्रजाति की...
एपिसोड 19 अंधेरे का नया जन्मशहर की बेचैनीसमाधि से लौटने के बाद रोहन को लगा कि सब...
खिड़की खुली जरा, जरा परदा सरक गया बहोत ही खबसूरत सा गाना सोनू नीगम का गाया हुआ रेडिओ पर बज रहा था और तभी रोडपर हंगामा हो गया. कोई राह चलता हुआ युवक एक महिला से टकरा गया जो सब्जीमंड...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
"दुनिया में कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिन्हें हमारा दिमाग तो नहीं मानता, लेकिन हमारी रूह महसूस कर सकती है। हम अक्सर अंधेरे रास्तों पर चलते हुए पीछे मुड़कर देखते हैं, यह सोचकर कि...
रात का समय था… रेगिस्तान अपनी गहरी खामोशी में डूबा हुआ था, लेकिन उस खामोशी के भीतर भी एक अजीब सी बेचैनी तैर रही थी। हवा आज कुछ ज़्यादा ही तेज़ चल रही थी ऐसी कि रेत के कण उड़-...
सुबह 7:30 बजे J. K. Commerce College कॉलेज बोहोत हरा भरा था। कम से कम दस बिसेस कालेज के सामने खड़े थे। सभी बच्चे अपनी दोस्तों के साथ मस्ती करते बस चढ़ रहे...
(सही और गलत प्यार में फर्क हैं!!) हर प्यार हमें साथ रहना नहीं सीखाता कुछ प्यार ऐसे भी होते हैं जो हमें सीखाते हैं की कब साथ छोड़न जरूरी हैं,ये सुनने में अजीब लगता हैं लेकिन ये...
दुनिया सीधे लोगों की नहीं हैं.... चलाक बनो.. जानकारी उतनी ही इकठी करो जिसको तुम रख सकते हो.. जयादा जानकारी बहुत सेहत के लिए हानिकारक होती हैं.. हाँ मेरी बात अक्सर त्रिपाठी से होती...
शुरुआत जो किस्मत बन गई भोपाल की सुबहों में एक अलग सुकून होता है। हल्की ठंडी हवा, दूर मंदिर की घंटियों की आवाज़, और गलियों में खेलते बच्चे। नीलबड़ की एक साधारण सी कॉलोनी में दो घर...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
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