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शून्य-बिंदु: खंडित जगत से समग्र बोध की ओर जीवन कोई ऐसी पहेली नहीं है जिसे बाहर...
जज की आवाज़ कोर्टरूम में गूँज रही थी। “अदालत ने प्रस्तुत सबूतों, गवाहों और पुलिस...
ऋगुवेद सूक्ति- (२९) की व्याख्या बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।ऋगुवेद --१/१६४/३२भाव--ब...
43 – ------ ‘कमाल ही है !’ यह सब पढ़ते हुए अनामिका के चेहरे पर...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 2: परछाइयों का रहस्यरात अभी खत्म नहीं हुई थ...
महाभारत की कहानी - भाग-२३४ युधिष्ठिर की उदारता और धृतराष्ट्र के प्रति भीम का दुर...
एपिसोड 16: बच्चों की आगे की यात्रा और समाज में नई क्रांति (लगभग 1500 शब्द)स्कूल...
इस एपिसोड को हम एक सवाल से शुरू करते हैं। चलिए बताइए क्या आपको आपका गोत्र याद है...
प्रोफेसर और जतिन अपनी गाड़ी से गार्डन पहुँचे। वहाँ एक बेंच देखकर दोनों बैठ गए।"...
शाम पूरी तरह ढल चुकी थी…आसमान अब गहरे नीले रंग में डूब गया था, और उसमें टिमटिमात...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
महाभारत की कहानी - भाग- १ शिखंडी की कहानी और भीष्म की इच्छामृत्यु प्रस्तावना संपूर्ण महाभारत पढ़ने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। अधिकांश लोगों ने महाभारत की कुछ कहानी पढ़ी, सु...
पटना की गलियों में सुबह की पहली किरणें चाय की दुकानों को जगातीं। कचौड़ी-समोसे की खुशबू हवा में घुली हुई थी। इस जीवंत मोहल्ले में रिया का छोटा सा घर था – पुरानी ईंटों की दीवारें, ले...
अक्सर आपके मन में एक सवाल आता होगा कि आख़िर में क्षत्रिय में क्यों पैदा हुआ? या ब्राह्मण परिवार में क्यों पैदा हुआ उसका आख़िर मुझे क्या फ़ायदा? इससे तो अच्छा मैं किसी भी जाति म...
बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है… वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था। छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...
रात का समय था… रेगिस्तान अपनी गहरी खामोशी में डूबा हुआ था, लेकिन उस खामोशी के भीतर भी एक अजीब सी बेचैनी तैर रही थी। हवा आज कुछ ज़्यादा ही तेज़ चल रही थी ऐसी कि रेत के कण उड़-...
यह कहानी है एक ऐसे लड़के की जो रहस्यम्यी में शक्तियों के साथ पैदा हुआ सन् 2002 सर्दियों का मौसम नवंबर महीना 11 तारीख सुबह सूर्य की किरण के साथ 10:30 बजे भारत की राजधानी दिल्ली के ए...
बस्ती की तंग गलियों में धूल उड़ रही थी। सूरज की तपिश कच्ची छतों को झुलसा रही थी, लेकिन सात के नील के पैरों में जैसे पहिए लगे थे। "माँ! मैं खेलने जा रहा हूँ," उसने माथे क...
"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!" "रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...
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