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मेरी एक राजकुमारी जैसी आलीशान और बेफिक्र जिंदगी, महज़ एक ही पल में एक अदने से भि...
भारतीय संस्कृति में गालियाँ : सामाजिक और साहित्यिक सन्दर्भ— विवेक रंजन श्रीवास्त...
भाग 2 के आखिर में मनोज ने 50 हजार उठाए थे।छत पर बैठकर वो रोया भी था। क्योंकि उसक...
“विद्या और अविद्या किसको कहते हैं?” तो बड़ा सारगर्भित और संक्षिप्त उत्तर देता है...
The Jungle Book (2016) - Movie ReviewRudyard Kipling ki amar kriti "The Jungle B...
छोटे से शहर की गलियों में जब भी आर्यन और रिया का आमना-सामना होता, तो हवा में तान...
रात के ठीक 11:47 बजे...पूरा शहर बारिश में भीग रहा था। सड़क पर दौड़ती गाड़ियों की...
कुछ देर बाद, नदी के पास जो पड़ाव डाला हुआ था, उससे थोड़ी दूरी पर युवराज और दूसरे...
“हर खूबसूरत याद किसी योजना से नहीं बनती। कुछ यादें बस एक छोटे-से वाक्य से शुरू ह...
किधर जा रहे हो l सुकून पा रहे हो ll किसकी याद मे l गीत गा रहे हो ll  ...
"आज कुछ बहुत अपना सा शेयर कर रही हूँ… खुद से जुड़ा, दिल से निकला।" शायद आप सब मुझे मेरी कहानियों, कल्पनाओं, किरदारों के ज़रिए जानते हो... लेकिन आज, जो लिख रही हू...
दिल्ली की हल्की सर्द सुबह थी। जनवरी की ठंडी हवा कॉलेज कैंपस में नये स्टूडेंट्स के बीच नई शुरुआत की फिज़ा घोल रही थी। हर चेहरा कुछ पाने की उम्मीद में चमक रहा था — नए दोस्त, नया माहौ...
कुछ प्रेम कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं... और कुछ अधूरी होकर भी अमर हो जाती हैं। यह कहानी भी उन्हीं में से एक है। ‘प्रकाश और राधिका’— दो नाम नहीं, दो आत्माएँ थीं जो एक-दूसरे की सा...
दिल्ली, पटेल नगर की गलियों में, जहां हर कोचिंग सेंटर एक सपना उगाता है और हर लाइब्रेरी एक कहानी पालती है वहीं से शुरू होती है ये कहानी। दानिश, उ.प्र. के एक जिले सहारनपुर का एक होशि...
न्यू यॉर्क में शुरू हुई एक मॉडर्न लव स्टोरी: बुली और एक मासूम लड़की न्यू यॉर्क की चमचमाती गलियों और ऊँची इमारतों के बीच, एक नई कहानी की शुरुआत हुई। दिया अरोड़ा, एक मासूम सी लड़क...
सूरज धीरे-धीरे डूब रहा था, और समंदर के किनारे पर सुनहरा रंग बिखर रहा था। लहरें आराम से किनारे से टकरा रही थीं, जैसे कह रही हों कि दुनिया तो चलती ही रहेगी, चाहे दिल कितना भी टूट जाए...
जुलाई की पहली बारिश ?️ जैसे कोई राज़ बनकर गिरी थी अरावली हिल्स की शांत गलियों में। ये कोई मशहूर शहर नहीं था — ना बड़ी इमारतें ?, ना तेज़ ट्रेनें ?, ना ही कोई शाही कैफे ☕। मगर यहां...
बारिश धीमी-धीमी रफ्तार से गिर रही थी। कार की खिड़कियों पर बूंदें पड़कर फिसलती जा रही थीं, जैसे कोई पुरानी याद बार-बार ज़हन में आकर फिर दूर चली जाती हो। निर्जर पहाड़ी मोड़ों पर अ...
“इस रिश्ते में मैं कभी तुम्हारी पहली पसंद थी ही नहीं… थी न?” पाँच साल पहले जब शहनाज़ की ज़िंदगी जबरन एक अनचाही शादी में बाँध दी गई, तब उसने सोचा था — वक़्त सब कुछ ठीक कर देगा।...
बारिश की हल्की फुहारें जब दिल्ली की सड़कों को भिगो रही थीं, तब वह पहली बार उसे देखा था—कॉफ़ी शॉप की खिड़की से झाँकती हुई, किताबों में खोई हुई। आरव, एक 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनि...
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