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श्री भगवान से बात कर रही थी... वहां हरि ने सारी बात सीता जी को बताई ....हरि— माँ...
ज्यों ज्यों समय बीत रहा था… सब कुछ ठीक था। मैं अपने बीते दिनों को भी भूल चुकी थी...
Sirf TumharaPart 11लीगल नोटिस का असर पूरे घर में फैल गया था। रुद्र के पिता का चे...
नारी चेतना: झूठे सम्मान के भ्रम से वास्तविक स्वतंत्रता की क्रांति..सदियों से मान...
कमरे में हल्की सी खामोशी थी…खिड़की से आती हवा परदे हिला रही थी…दोनों बेड पर बैठे...
️ भरोसा मत तोड़िए ️किसी के हिस्से की इंसानियत बचा लीजिएएक भावुक कहानी — ---️ भाग...
प्रियांशी मधु नगर में अपनी दादी कमला के साथ रहती थी। उसके परिवार में कमला के अला...
बांसुरी की वह धुनभाग — प्रथमभारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे।देश स्वतंत्...
जन्म से कॉलेज तक मेरा नाम अंकित है। मैं उत्तराखंड के चमोली जिले के एक छोटे से गा...
एक भाई का प्यार... एक लड़की का समर्पण... और एक ऐसा राज़, जो तीन जिंदगियों को बदल...
मुंबई की वो सुबह बाकी दिनों से कुछ अलग थी। समंदर की लहरें वैसे ही किनारों से टकरा रही थीं, पर हवा में एक अजीब सी बेचैनी थी — जैसे कुछ बड़ा होने वाला हो। आरव, एक मामूली सा लड़का,...
छोटे शहर बरेली के एक साधारण से कॉलेज में, नया सत्र शुरू हो चुका था। कॉलेज की भीड़ में, हलके भूरे रंग की शर्ट और नीली जींस पहने एक लड़का, कुछ घबराया, कुछ उत्साहित-सा कैंपस में प्रवे...
सावन का महीना था और आसमान बादलों से ढँका हुआ। हल्की बूँदाबाँदी शहर की सड़कों पर एक सुकूनभरी धुन बिखेर रही थी। वातावरण में मिट्टी की सोंधी खुशबू फैली थी, जो हर दिल को भिगोने के लिए...
पेशे: कॉलेज का अंतिम वर्ष का छात्र, जो एक लेखक बनना चाहता है। स्वभाव: शांत, शर्मीला और अपनी ही दुनिया में खोया रहने वाला। वह अपनी भावनाओं को शब्दों में बहुत खूबसूरती से ढाल सकता...
जब पहली बार अर्जुन से टकराई थी, तो उसने कभी सोचा भी नही था कि उसकी जिंदगी उस पल से बदल जाएगी। वह कॉलेज का पहला दिन था। अन्यन ने पहली बार उसे लड़के को देखा_ सफेद शर्ट, खामोशी... अ...
"ये शादी सिर्फ एक समझौता है, लिआ… एक मजबूरी। लेकिन शायद इसी में हमारी किस्मत भी छुपी हो।” माँ की बातों की गूंज अब भी मेरे कानों में थी, जबकि मैं शीशे के सामने खड़ी खुद को उस...
सखी (मन मे) - आप मेरे हो सत्या और मैं आपकी हु। में आपकी ही रहूंगी । में आपकी हंसिनी हु जो अकेली रह सकती है मर सकती है पर कही ओर नहीं जा सकती । दुनिया की रिवाजों जरूरत मुझे नहीं है...
कियारा, कियारा कहां हो ? अभी के अभी नीचे आओ। तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा है क्या ?उस महल जैसी हवेली के बीच यह आवाज ऐसी गूंज रहे थे कि मानो वह आवाज किसी हवेली में नहीं बल्कि किसी पहाड...
सुबह का वक़्त___ "वैशू... वैशू... यार मेरा पर्स कहा है, जल्दी करो मुझे देर हो रही है " एक लड़का जो आइने के सामने खड़ा ऑफिस के लिए तैयार होता हुआ तेज आवाज में बोला...
"आज कुछ बहुत अपना सा शेयर कर रही हूँ… खुद से जुड़ा, दिल से निकला।" शायद आप सब मुझे मेरी कहानियों, कल्पनाओं, किरदारों के ज़रिए जानते हो... लेकिन आज, जो लिख रही हू...
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