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आँगन में अब सन्नाटा नहीं था—वहाँ डर जम गया था। कार्तिक अब भी दरवाज़े की तरफ़ भाग...
रात का जंगल कीड़ों की किटकिट और सियारों की हुंकारों से भरा था। पुराने पत्थर की ख...
1बरसात की वह शाम न तो बहुत ख़ुशनुमा थी, न ही बहुत उदास।बस एक अजीब-सी चुप्पी थी—ज...
कोई भी इंसान इतना बेख़ौफ़,कैसे हो सकता है की खुद को कानून से ऊपर,समझे।एक इंसान...
अतृप्त आत्मा का आह्वान: काले कुएँ का अभिशापराजस्थान के रेतीले धोरों के बीच बसा &...
part- 5सुहानी ने मोबाइल को देर तक देखा।हर्ष का voice note अब भी वहीं था—...
“सब ठीक है?”यह सवाल महिला से सबसे ज़्यादा पूछा जाता है।और जवाब लगभग हमेशा एक ही...
1.स्याही का दामन।"मेरे लफ्जो ने स्याही का दामन थाम लिया है। अब लिखूँगी मैं अपनी...
'विशाल गुरुकुल' का सबसे ऊँचा शिखर, जिसे 'ब्रह्म-कक्ष' कहा जाता...
अमावस्या की रात विधि को हमेशा से ही अजीब लगती थी।न चाँद, न उसकी रोशनी—बस काली चा...
सुबह का वक़्त___ "वैशू... वैशू... यार मेरा पर्स कहा है, जल्दी करो मुझे देर हो रही है " एक लड़का जो आइने के सामने खड़ा ऑफिस के लिए तैयार होता हुआ तेज आवाज में बोला...
"आज कुछ बहुत अपना सा शेयर कर रही हूँ… खुद से जुड़ा, दिल से निकला।" शायद आप सब मुझे मेरी कहानियों, कल्पनाओं, किरदारों के ज़रिए जानते हो... लेकिन आज, जो लिख रही हू...
दिल्ली की हल्की सर्द सुबह थी। जनवरी की ठंडी हवा कॉलेज कैंपस में नये स्टूडेंट्स के बीच नई शुरुआत की फिज़ा घोल रही थी। हर चेहरा कुछ पाने की उम्मीद में चमक रहा था — नए दोस्त, नया माहौ...
कुछ प्रेम कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं... और कुछ अधूरी होकर भी अमर हो जाती हैं। यह कहानी भी उन्हीं में से एक है। ‘प्रकाश और राधिका’— दो नाम नहीं, दो आत्माएँ थीं जो एक-दूसरे की सा...
दिल्ली, पटेल नगर की गलियों में, जहां हर कोचिंग सेंटर एक सपना उगाता है और हर लाइब्रेरी एक कहानी पालती है वहीं से शुरू होती है ये कहानी। दानिश, उ.प्र. के एक जिले सहारनपुर का एक होशि...
न्यू यॉर्क में शुरू हुई एक मॉडर्न लव स्टोरी: बुली और एक मासूम लड़की न्यू यॉर्क की चमचमाती गलियों और ऊँची इमारतों के बीच, एक नई कहानी की शुरुआत हुई। दिया अरोड़ा, एक मासूम सी लड़क...
सूरज धीरे-धीरे डूब रहा था, और समंदर के किनारे पर सुनहरा रंग बिखर रहा था। लहरें आराम से किनारे से टकरा रही थीं, जैसे कह रही हों कि दुनिया तो चलती ही रहेगी, चाहे दिल कितना भी टूट जाए...
जुलाई की पहली बारिश ?️ जैसे कोई राज़ बनकर गिरी थी अरावली हिल्स की शांत गलियों में। ये कोई मशहूर शहर नहीं था — ना बड़ी इमारतें ?, ना तेज़ ट्रेनें ?, ना ही कोई शाही कैफे ☕। मगर यहां...
बारिश धीमी-धीमी रफ्तार से गिर रही थी। कार की खिड़कियों पर बूंदें पड़कर फिसलती जा रही थीं, जैसे कोई पुरानी याद बार-बार ज़हन में आकर फिर दूर चली जाती हो। निर्जर पहाड़ी मोड़ों पर अ...
“इस रिश्ते में मैं कभी तुम्हारी पहली पसंद थी ही नहीं… थी न?” पाँच साल पहले जब शहनाज़ की ज़िंदगी जबरन एक अनचाही शादी में बाँध दी गई, तब उसने सोचा था — वक़्त सब कुछ ठीक कर देगा।...
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