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सुबह जब रीतिका ने आँखे खोली तो 8 बज रहे थे और उसकी पहली क्लास 10 बजे की है। वो ज...
परम पूज्य दादा भगवान कहते हैं कि, अहिंसा का पालन करने के लिए स्वाद की इन्द्रिय,...
उस होटल में अधिकतर विदेशी लोग आते थे , क्योंकि वह समंदर से कुछ ही दूर था। होटल स...
बेटी की चिंता से बेहाल माँ को आखिरकार, झूठ ही सही, यह पता चल गया कि वह कहाँ है....
सास ने अपनी सूखी, कठोर आँखें उठाकरसीधे साजिया की तरफ देखा।कमरे की हवा अचानक और भ...
कहानी: एनिवर्सरी एक नई शुरुआत"सुनो! कल हमारी एनीवर्सरी है। क्या गिफ्ट दोगे मुझे।...
कल्याणी के सिर पर बंदूक ताने हुए उस आदमी ने अपने साथी की ओर देखा और ठंडी आवाज़ म...
एपिसोड 40: समाधि के नीचे का अंधेरा---शहर की बेचैनीसमाधि में परछाई को हराने के बा...
रिया बिना Knock किए सीधे समीर के केबिन में घुस आई. समीर उस समय अपने लैपटॉप पर एक...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 36: मौन का अंतिम गीत"दूसरी मुहर टूटने वाली...
"चलो " राहुल ने कहा... "बैठो, अगर तुम आयी हो, तो मेमसाहब अजली ऐसा करो " चुप हो गया राहुल।जॉन को एक टक देख कर बोलता हुआ बोला, "अजली ------"फिर चुप हो गया।...
उत्तर प्रदेश के बदायूँ जनपद के एक छोटे से गाँव में रहने वाला किशोर एक सीधा-सादा, शांत और संस्कारी युवक था।गाँव की मिट्टी की सोंधी खुशबू, खेतों में लहलहाती फसलें, नीम के पेड़ों की छ...
(बैकग्राउंड में हल्की बारिश की आवाज़, धीरे-धीरे एक उदास पियानो म्यूजिक शुरू होता है) नरेटर (गहरी और शांत आवाज़): "इंसान की ज़िंदगी में कुछ लम्हे ऐसे आते हैं, जहाँ वो हार मान लेता...
हिंदी फिल्म और वेबसिरिज़ रिव्यू.
खिड़की खुली जरा, जरा परदा सरक गया बहोत ही खबसूरत सा गाना सोनू नीगम का गाया हुआ रेडिओ पर बज रहा था और तभी रोडपर हंगामा हो गया. कोई राह चलता हुआ युवक एक महिला से टकरा गया जो सब्जीमंड...
त के ठीक 12 बजे…सड़क सुनसान थी… हवा में अजीब सी ठंडक घुली हुई थी… रिद्धि सिंह अपनी scooty पर घर लौट रही थी। हेलमेट के अंदर उसकी सांसें तेज़ चल रही थीं, जैसे उसे खुद नहीं पता कि वो...
दोपहर के तीन बज रहे थे। जून की इस चुभती हुई गर्मी में ऐसा लग रहा था मानो आसमान से आग बरस रही हो। दुकान इतनी छोटी थी कि वहां ढंग से खड़े होने की भी जगह नहीं थी, ऊपर से पुरानी किताबो...
बात उन दिनों की है जब मेरी नई नई शादी हुई थी। मेरे पिता जी अपनी ड्यूटी के चक्कर में पड़े हुए थे, अतः उनका हमारे परिवार की ओर ध्यान लगभग कम ही था अतः हमारा सयुंक्त परिबार दादीअम्मा...
तुम्हारे हिस्से का मौन मेरे हिस्से में आया.... और तेरा मन मेरे मन को भाया.....यामिनी की मृत्यु के सातवें दिन घर में अब पहले की तरह सन्नाटा नहीं रहा था।लोग थे,रिश्तेदार थे,बर्तन खनक...
मैं, सतोशी नाकामोतो, और एक लकड़ी का फलसफ़ा चारों तरफ घना अँधेरा। मैं एक अजीब सी जगह पर था। मैंने अपने हाथों को देखने की कोशिश की, पर वहाँ कुछ था ही नहीं, सिर्फ घुप्प अँधेरा। "...
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