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अब आगे ,शौर्य ऑफिस जाने की जगह एक दूसरी जगह पहुंचता है , जो उसके ऑफिस से थोड़ी द...
बुद्धिमानी ही अचूक अस्त्र है आशीष आज हमेशा की तरह समय पर ऑफिस पहुँचा था। लैपटॉप...
तीसरा हिस्सा“अब तीन हैं।”दीवार पर लिखे ये तीन शब्द अभी भी चमक रहे थे।आरव उन्हें...
बब्बू ने ख्वाब में देखा कि बनवाड़ी के झोपड़ी की परछी में कुत्ता ऐसा उछलकूद मचाने ल...
बाबा की आवाज़ सुनते ही जैसे विवेक को होश आया। उसने तुरंत अपनी जेब से मोबाइल निका...
14 मर्डर की तहकीकात ️इसी बीच जेनिफर को होश आता है और वह दोनों को लड़ता देख जोर स...
भाग 4: चेहरे पर से हटता नकाबकमरे की हवा अचानक इतनी भारी हो गई थी कि मुस्कान को ल...
एपिसोड 36— पंद्रह साल पुरानी तस्वीरगौरव का फोन कटने के बाद अर्जुन कुछ सेकंड तक ब...
ध्रुव की ताराभाग - ८लेखिका "अनामिका" तारा के घर से ध्रुव के घर तक का सफर सिया क...
समय बहुत कुछ सहारा होगा लेखक ने, तभी वो समय को जान सका शायद यह...
"चलो " राहुल ने कहा... "बैठो, अगर तुम आयी हो, तो मेमसाहब अजली ऐसा करो " चुप हो गया राहुल।जॉन को एक टक देख कर बोलता हुआ बोला, "अजली ------"फिर चुप हो गया।...
(साउंड इफेक्ट: एक पुरानी घड़ी की 'टिक-टिक' की आवाज जो धीरे-धीरे दिल की धड़कन जैसी तेज होती है। बाहर मूसलाधार बारिश और बादलों के गरजने की गूँज।) नैरेटर: समय का पहिया अक्सर...
राजस्थान का ठाकुरगढ़ गांव। रेत, गर्मी, और ठाकुरों का राज। यहां कानून किताबों में नहीं, बंदूकों में लिखा जाता था। *Scene 1: कर्ज और कयामत ~ 400 शब्द* आराध्या शर्मा। 22 साल।...
अध्याय 1: अनाथ आश्रम की रहस्यमयी लड़की भाग 1 शहर की चकाचौंध से दूर, पुराने पहाड़ों के बीच एक छोटा सा अनाथ आश्रम था — "नई उम्मीद आश्रम"। यह आश्रम बाहर से साधारण दिख...
यह कहानी बहुत समय पहले की है ... करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले की ................ नेपाल के सरहद से सटा भारत में एक छोटा सा गाँव था विष्णुपुर । इसी गाँव के ठीक बीचोबीच बने कु...
Part 1: श्रापित गांव ~ साल था 1826। जगह थी - *राजस्थान का गांव "धू-धू"*। पिछले 100 साल से यहां बारिश नहीं हुई। कुएं सूखे। खेत बंजर। लोग भूखे। बूढ़े कहते थे: "य...
झूठ बोल कर निकली, ये कहानी शुरू होती है एक झूठ से, प्रतिज्ञा ने अपने घर पर सबको बोला था, कि वो कॉलेज ट्रिप पर जा रही है, लेकिन सच ये था कि, ये कोई आम कॉलेज ट्रिप नहीं थी, ये एक कपल...
बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है… वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था। छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...
दुनिया सीधे लोगों की नहीं हैं.... चलाक बनो.. जानकारी उतनी ही इकठी करो जिसको तुम रख सकते हो.. जयादा जानकारी बहुत सेहत के लिए हानिकारक होती हैं.. हाँ मेरी बात अक्सर त्रिपाठी से होती...
मुंबई का एक मशहूर कॉलेज, कैंटीन की भीड़ और दोस्तों की मस्ती। एग्जाम्स खत्म हो चुके थे और सभी के चेहरों पर छुट्टियों की खुशी थी। राम, विनोद, सृष्टि, अनामिका, सौरभ, मेहुल और मोनिक...
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