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निशा कुछ पल चुप रही फिर उसने धीरे से कहानिशा- मुझे मदद चाहिएदूसरी तरफ कुछ सेकंड...
कैसे बात करें कि बच्चे आपकी बात सुने?बहुत सारे माता-पिता को यह शिकायत रहती है कि...
जिंदगी क दूसरे किनारा पाठ 12और वही हकीकत की दुनिया में दूसरी तरफ एक ऑफिस के एक क...
कुछ समय बाद, सबसे पहले कबीर की आँखें खुलीं।"आह... मेरा सिर... हम यहाँ कैसे?" वह...
बाल सुधार गृह से निकलने के बाद भी रणजीत ने कभी गलत रास्ते पर चलने के बारे में नह...
और उसके दोनों ब्लेड पीले और संतरी रंग के थे। वह हथियार देखने में बहुत डरावना लग...
दोहा:१५बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥क...
ऋगुवेद सूक्ति--(२७) की व्याख्या मन्त्र —“मा प्रगाम पथोवयम्” ऋग्वेद_ १०.५७.१भाव...
ऑफिस का मेन गेट। रात के 11:15 बज चुके हैं। बाहर तेज़ हवा चल रही है, बिजली चमक रह...
कागज़ के सामने हारता इंसान गाँव की पगडंडी पर धूल वैसे ही उड़ती है जैसे वर्षों से...
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...
पटना की गलियों में सुबह की पहली किरणें चाय की दुकानों को जगातीं। कचौड़ी-समोसे की खुशबू हवा में घुली हुई थी। इस जीवंत मोहल्ले में रिया का छोटा सा घर था – पुरानी ईंटों की दीवारें, ले...
इस तरह एक सदियां बीत गए।। लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी। और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...
महान गुप्त साम्राज्य, अवंती प्रदेश, उज्जैन प्रांत।उज्जैन प्रांत की आठ प्रमुख एकेडमीयों में से एक छाया झील एकेडमी के प्रवेशद्वार से एक लडका अपनी कमर पर सेबर लटकाकर बाहर निकला।“सीनिअ...
"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!" "रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...
"दुनिया में कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिन्हें हमारा दिमाग तो नहीं मानता, लेकिन हमारी रूह महसूस कर सकती है। हम अक्सर अंधेरे रास्तों पर चलते हुए पीछे मुड़कर देखते हैं, यह सोचकर कि...
इन हवाओ मे इन फिजाओ मे तुझ को मेरा प्यार पुकारे.. आजा आजा तुझ को मेंरा प्यार पुक रुक ना पाऊं मैं सजती आऊं मे दिल को ज़ब दिलदार पुकारे इस गीत की पंक्तियों न...
Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...
हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रेल की कुछेक पटरियां थीं और जिन पर ना जाने कौन कौन सी कितनी ट्रेनें हर वक्त बेवक्त गुजरती रहती थीं। सुबह सबेरे और आधी रात के वक्त के गुजरने के बाद ही...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
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