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एक कहानी----एक ऐसी लड़की के बारे में---जिसे प्यार में सिर्फ धोखा ही मिला----पर कु...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 75 — तुम्हारी कहानी, मेरा फैसलाअंतिम द्वार...
अध्याय 2मीरा भी अब असमंजस में थी कि आखिर हो क्या रहा है?वह चुपचाप फेरों के लिए ख...
(बादलों के बीच छह-सात सौ फीट की बुलंदी पर खामोश तैरती उस हाई-टेक पर्पल कार के कै...
Part 4 — तस्वीर में तीसरा इंसानआरव फर्श पर पड़ी तस्वीर को घूर रहा था।तस्वीर में...
वेंडरबिल्ट एस्टेट के क्रिस्टल झूमर आज रात अपनी पूरी भव्यता के साथ जगमगा रहे थे।...
EPISODE-7जाग उठा शैतान लोहिताक्ष कड़ा धाम के उस शापित लाल कुएं से निकलने के बाद,...
काम्या ने आँसू पोंछे…लेकिन इस बार उसकी आँखों में सिर्फ दर्द नहीं था…एक सच्ची कृत...
आखिर वो बेला आ ही गयी जिसके लिये मां बाप कब से इंतज़ार करते हैं----अपने माता पिता...
श्याम का हिसाबजहाँ इंसान का हिसाब खत्म होता है… वहाँ श्याम की कृपा शुरू होती है।...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।" "प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...
भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे। देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...
करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ................... शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे के आखिरी दिन एक विचित्र घटना घटी। हुआ यूँ कि आखिरी दिन बाबा बटेश्वर की नज़र गेरुआ धोती में लिपटी...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
रात के ठीक ग्यारह बज चुके थे। यूपी से बिहार जाने वाली इस एक्सप्रेस ट्रेन का थर्ड एसी कोच लगभग पूरी तरह से शांत हो चुका था। ट्रेन के पहियों की पटरियों से टकराने वाली छुक-छुक की लयबद...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
मेरा नाम अनन्या है। 27 साल की उम्र में मैंने जिंदगी का सबसे कड़वा सच देखा। जब सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं रहता। पिछले महीने तक मेरे पास सब था। एक अच्छी नौकरी, एक शादी जिसे मैंने...
"क्या है जिंदगी हक़िक़त या छलावा या कोई भ्रम? इतनी मुद्दत की जिंदगी जिसे हम हक़िक़त समझते रहे क्या वो छलावा थी, क्या सबकुछ सिर्फ एक भ्रम था? क्या हक़िक़ि ज़िंदगी अब शुरू हुई है...
लखनऊ, नवाबों का शहर। शाम के सात बज रहे थे। हजरतगंज की रौशनी, चौक की चाट की खुशबू और गोमती नगर की ठंडी हवा, सब कुछ रोज की तरह ही था। पर आयशा के लिए आज कुछ भी रोज जैसा नहीं था। आय...
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