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शायद आप मेरी इस कहानी पर यकीन न करें, और मैं दुआ करता हूँ कि आपको कभी ऐसी जगह पर...
सोकर उठने के बाद वह नीचे लाउंज में आई तो अनस नाशते की टेबल पर चची से नखरे उठवाने...
एक बूंद बादलों की गोद में बैठी सोच रही थी। नीचे कितनी गर्मी है, अगर मैं बाहर गई...
चैप्टर 1: हरी आँखों का सन्नाटाशाम के ठीक 6 बज रहे थे। बाहर बारिश की हल्की बूंदें...
यह एक काल्पनिक कहानी है। इसका उद्देश्य केवल एक तकनीकी विचार और नागरिक सुरक्षा से...
इधर अक्षिता वेदांश के वहां से जाते ही सीधा श्री के पास आती है.. श्री जिसका ध्यान...
1. सिस्टर मेडलीन की शुरुआती जिंदगी और त्रासदीशुरुआत में मेडलीन एक साधारण और बेहद...
“विद्येविना मती गेली, मतीविना नीती गेली।नीतीविना गती गेली, गतीविना वित्त गेले।वि...
सम्राट अशोक का परिवर्तनभाग 3 – धम्म का संदेश और भारत से विश्व तक की यात्राकलिंग...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 13 : आखिरी किताबसुबह की पहली किरणें गंगा के पानी पर च...
पण्डित सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ यह नाम उनका अपना दिया हुआ था। स्कूल का नाम सुर्ज कुमार घर पर भी चलता था या नहीं इसे कौन बताए? घर गढ़ाकोला उन्नाव में, पिता पंडित राम सहाय तिवारी।...
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्की धुन। समय: रात 11 बजे। लाल और सुनहरे फूलों से सजी जगह में शहनाई बज रही है। फूलों की खुशबू के...
राधा का बचपन किसी धुंधली सुबह जैसा था, जहाँ रोशनी तो थी पर गर्माहट नहीं। सात भाई-बहनों के उस बड़े और गरीब परिवार में राधा तीसरे नंबर पर थी। उसका बचपन खेल-कूद में नहीं, बल्कि चूल्हे...
Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...
मैंने उत्सुकता से कहा,“भंते जी, चलिए ज़रा करीब से देखते हैं… दूर से तो कुछ साफ दिखाई ही नहीं दे रहा…”प्रियांशी का चेहरा डर के मारे सफेद पड़ गया था। उसने घबराते हुए मेरा हाथ पकड़ लि...
हवाई अड्डे की भीड़ में मेहरीश एक पतली सी रेखा की तरह खड़ी थी। उसके कंधे पर एक छोटा सा बैग था, हाथ में एक किताब, और आँखों में एक ऐसी थकान जो सालों की नहीं, जन्मों की लगती थी। उसकी म...
नौजवान युवा पीढ़ी जो है उनको समझना नामुमकिन है क्योंकि यह जो पीढ़ी है ना उनको अपने से बड़ी औरत के साथ प्यार करना अच्छा लगता है यह सच है आप लोग भी जानते होंगे क्योंकि नव युवक को ऐसा...
बारिश तेज़ हो रही थी। शहर की ऊँची इमारतों के बीच खड़ी वह काँच की इमारत इतनी ठंडी लग रही थी, जैसे उसके अंदर इंसान नहीं, केवल मशीनें रहती हों। अनाया शर्मा के हाथ काँप रहे थे। उसकी...
कर्ज़ की दस्तक गाँव में शाम हमेशा जल्दी उतर आती थी।सूरज अभी पूरी तरह डूबा भी नहीं था, लेकिन प्रताप सिंह बाजवा के घर में अंधेरा पहले ही पसर चुका था। आँगन के बीच रखा मिट्टी का...
हॉस्पिटल में आईसीयू के बाहर की हवा भारी थी, जिसमें फिनाइल की तीखी गंध और वेंटिलेटर की 'बीप-बीप' करती डरावनी आवाज़ मिली हुई थी। सान्वी वर्मा के हाथ में पकड़ा हुआ वह बीस लाख...
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