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"चिठ्ठी का इंतजार"एक ज़माना था…जब समय घड़ी की सुइयों से नहीं, इंतज़ार की धड़कनों...
खामोश स्टेशन की वो आखिरी शामभाग 1: पुरानी यादेंशहर की चकाचौंध वाली जिंदगी से दूर...
खोज की शुरुआतपेरिस की चकाचौंध और भीतर का अंधेरा : पेरिस की शाम अपनी पूरी खूब...
REBIRTH OF MEHBUBA यह कहानी है धोखे प्यार और बदले की जिसमें मोहब्बत एक दफा...
⭐ एपिसोड 58 — "खून की वह निशानी"कहानी — अधूरी किताबहवेली के अँधेरे गलियारे में न...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन &#...
साल 1994।बरसों से अनछुए उस घने जंगल में, जहाँ इंसानी कदम कम और डर की परछाइयाँ ज़...
: : प्रकरण -20 : : उस दिन खास तो कुछ नहीं हुआ था. मेर...
Next Ep,,,, काजल के चेहरे पर फिर खुशी छा गई।फिर Rm काजल का हाथ थाम मुस्कुराकर प...
जानवी डर जाती है और काली को रौकते हूए कहती है --जानवी :- नही रुको । मैं साईन करत...
श्यामबाबू ने रात के आठ बजे दिल्ली के रेडलाइट एरिया में सड़क के किनारे, कोई कोना देखकर अपनी गाड़ी पार्क की और दस मिनट तक गाड़ी मेंही बैठा रहा और बैठे-बैठे यही सोचता रहा कि उसके जि...
रेलवे स्टेशन दिल्लीएक लड़की रेल में से उतर कर बहुत तेजी से भागती हुई आ रही थी वो लड़की बार बार पीछे मुड़कर देख रही थी ऐसा लग रहा था जैसे कोई उसके पीछे पढ़ा हुआ हे और वो उन्ही से बच...
द्रोपदीबाई के घर आज विजय कुमार खुद आए। बाहर से ही आवाज लगाई-‘ सरपंच जी हैं?’ वे तब अपनी भैंस की सेवा में थीं,।उसे दूध निकालने के बाद उसके पाड़े को दूध पिला रहीं थीं। वहीं से आवाज...
गुरुकुल का दृश्य : (संध्या का समय) दो विद्यार्थी कृपाल व विभु दाईं ओर से किसी विषय पर चर्चा करते हुए आ रहे है। और उनमें से कृपालके हाथ में एक पुस्तक है। कृपाल : देखो मित्र! ( आश्चर...
उम्र चाहे कोई भी हो, हर किसी के अपने सपने होते है । उम्र कॉलेज जाने वाली हो या जिन्दगी के सुख दुख का हिसाब करने की ...हर किसी को अपना छोटा सा सपना भी बड़ा ही प्यारा लगता है । अफ़सोस...
दिल्ली, मलहोत्रा हाऊस एक लड़की किचन में बर्तन साफ कर रही थी। उसके हाथों और पीठ पर लगी चोटों के निशान से पता चल रहा था कि उसे कितना मारा गया है। वह दर्द से कराह रही थी, फिर भी का...
"सौरभ विला" मालाबर हिल, बैंड्रा (पश्चिम), मुंबई घर से ये घर है- सौरभ का इसके नाम पर ही इसका नाम रखा जाता है | सौरभ का एक लड़का है, जिसका नाम अनूप है | अनूप कि मा को गुजरे ह...
भारतीय रंगमंच प्रायः सभी भारतीय एवं पाश्चात्य विद्वान संस्कृत नाटक और रंगमंच का धार्मिक भूमि से उदय और विकास मानते हैं । अकेले प्रोफेसर जागीरदार हैं, जिन्होंने कि इन सारे धार्मिक व...
आर्ट ऑफ लिविंग संस्था के कच्छ सेंटर जहाँ मैं अपने अति उत्साही कार्यकर्ताओं के साथ एक बड़े से हॉल में जमीन पर बिछी लाल- काली धारी वाली दरी पर बैठी हूँ। आने वाले दो दिवसीय। श्री श्री...
आज धूप बहुत तेज़ है, चला भी नहीं जा रहा है। प्रेमलता उसका नहर के किनारे इंतज़ार कर रही होगी। यहीं सब सोचते हुए सुयश मोहन के कदमों की गति बढ़ती गई। जब नहर के पास पहुँचा तो उसने देखा कि...
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