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दया की कीमतसूरज डूब रहा था, पड़ोस पर लंबी, खूनी परछाईं पड़ रही थी। नया परिवार यह...
शहर की वो रात बाकी रातों से अलग थी।आसमान पर चाँद था, मगर उसकी रोशनी में सुकून नह...
लोग कहते हैं नसीब खराब है... पर सच तो कुछ और ही है।हम सब कहते हैं कि "मेरा...
अस्पताल से घर लौटते वक्त अर्जुन ने मेरा हाथ पूरे रास्ते नहीं छोड़ा।पहले जो आदमी...
11 -- हाँ, बात उस गुजराती लड़के की थी लेकिन यह कथा याद...
शहद की गुड़िया - प्रकरण 3 समीर के बाद आकाश मेरी जिंदगी में...
प्रेम विवाह प्रेम विवाह का बंधन निराला होता हैं l दिल से जुड़ा रिसता सुहान...
नई सुबह, नया संकेतकोलकाता की जीत के बाद टीम को लगा था कि अब शांति मिलेगी। लेकिन...
Chapter 3 इश्क और इस्तीफा काव्या ने धीरे से अपने कमरे का द...
आर्या बचाओ।" काला राजा ने नीरा पर हमला। "तेरी ऊर्जा मेरी!" नीरा रोकी। "नहीं! नई...
मां कमरे में बड़बड़ाते हुए दाखिल होती है ....ये लड़की पता नही कब सुधरेगी ...!! वंदना: 8 बज गए है । सूर्य देवता सर पर है ,पर राजकुमारी अभी तक सोई हुई है ( वो खिड़की का परदा हटाते...
(जयपुर, सरकारी दफ़्तर। दोपहर 3:00 बजे) अन्वेषा पट्टनायक (25) अपने दफ़्तर की खिड़की के पास खड़ी थी। बाहर राजस्थान की तेज़ धूप और धूल उड़ रही थी। उसने हल्की नीली कॉटन की साड़ी प...
मम्मीमम्मी - मम्मी -मम्मी कहाँ हो आप ' अभिनव अवाज देता हुआ घर में आता है। बेटा मैं यहां स्टोर मे हूं। दीवाली की सफाई कर रही हूँ। अभिनव ये क्या है ? बक्शे मे क्या टटॉल रही हो। म...
"प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम""सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने के लिए क्या प्यार की बलि देना ज़रूरी है?"पर समय का पहिया घूमता है और हिसाब बराबर करने के लिए वापस आता है।"न...
इटली जिसे माफिया का अड़ा कहा जा है वाह पर एक लड़की पूरे काले कपड़े पहने थी और चहरे पर केप ओर मुंह पर मास्क लगा रखा था वो इस टाइम एक बैंक के सामने खड़ी थी और उसे देख रही थी ये थ...
अनामिका और अविनाश दोनों उस पहाड़ी के किनारे टूटी हुई रेलिंग के पास खड़े डूबते हुए सूरज को देख रहे थे।आसमान में गुलाबी नारंगी आभा पीछे छोड़ता हुआ सूरज अपनी गति से नज़रों से ओझल हो र...
विट्ठल पाटिल अब उम्र के उस पड़ाव पर आ चुके थे, जहाँ शरीर धीमा हो जाता है पर मन अब भी पुरानी तरह सजग रहता है। गाँव के बाहर बने छोटे से घर में रहते हुए उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी खेत,...
इंदौर के एक आलीशान बंगले में सुबह की हलचल अपने चरम पर थी। रसोई में एक मिडल एज महिला बड़ी तल्लीनता से नाश्ता तैयार कर रही थी। उनका नाम था सरस्वती जोधा — एक स्नेही, समझदार और परंपराओ...
(बैलों का महान मेला – शुरुआत) लेखक राज फुलवरे अध्याय 1 – बैलों का सबसे बड़ा मेला सुबह का सूरज अभी धीरे-धीरे आसमान में चढ़ रहा था। एक हल्की-सी गुलाबी रोशनी खेतों पर फैल चु...
एक प्रेम कथा, जो आस्था और इंसानियत के संगम से जन्मी) --- दृश्य 1 — कॉलेज की सुबह सेंट पीटर्स यूनिवर्सिटी, मुंबई। सुबह का वक्त। कैंपस में पेड़ों के बीच से आती धूप, चिड़ियो...
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