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अध्याय 22 पांच दिलों का जागरणइस समय राघव जोशी जमीन पर घुटनों के बल बैठ चुका था।...
(जेल के बाहर जमा हुई भीड़ की दहाड़, जो 'आर्यन को रिहा करो' के नारे लगा र...
एपिसोड 4: एक अजीब-सी बेचैनीकॉलेज की छुट्टी हुए लगभग एक घंटा बीत चुका था।शाम की ह...
अध्याय 2 : टकराव की दस्तकशाम अपनी पूरी रौनक पर थी। आलीशान होटल का भव्य हॉल सुनहर...
चुड़ैल गायब हो चुकी है। सिमरन काँपते हुए उस पेड़ के पास खड़ी है जहाँ से पानी की...
अब भी दिलकश है तेरा हुस्न मगर क्या कीजेशाम की जाती हुई रोशनी के साथ अब स्ट्रीट ल...
शहद की गुड़िया- प्रकरण 68 " दादू के पिताजी ऊस वक़्त 80 प्...
हॉलीवुड की सबसे चर्चित और प्रशंसित रोमांटिक फिल्म-श्रृंखलाओं में 'बिफोर ट्रा...
समय का चक्र: अध्याय 1कुछ प्रेम कहानियाँ खत्म नहीं होतीं. वे समय के साथ दफन हो जा...
रीतिका आज बहुत खुश है क्योंकि उसका सपना जो पूरा हो गया। उसने बचपन से ही एक सपना...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
हर गांव की अपनी एक पहचान होती है…कोई अपनी सादगी के लिए जाना जाता है, तो कोई अपनी परंपराओं के लिए।लेकिन यह कहानी जिस गांव की है…वह अपनी शान, अपनी रॉयल ठाठ और एक नाम के लिए जाना जाता...
रात, जिसने शहर की नींद छीन ली रात के दो बजकर सत्रह मिनट। अर्जुनपुर शहर सो रहा था। सड़कें लगभग खाली थीं। कहीं-कहीं स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी बारिश से भीगी सड़क पर पड़ रही...
(साउंड इफेक्ट: एक पुरानी घड़ी की 'टिक-टिक' की आवाज जो धीरे-धीरे दिल की धड़कन जैसी तेज होती है। बाहर मूसलाधार बारिश और बादलों के गरजने की गूँज।) नैरेटर: समय का पहिया अक्सर...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है। यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्क...
में और मेरे अहसास भाग-१ *** ईश्क में तेरे जोगन बन गई lआज राधा जोगन बन गई ll *** गरघर कीदीवार केकर्णहोतेकोई घरखड़ाना होता ll *** काटे नहीं कटता एक पल यहां lकैसे कटेगी एक उम्र भला यहा...
यह कहानी एक काल्पनिक सुपरहीरो से प्रेरित है, लेकिन इसके किरदार और जज़्बात पूरी तरह से मौलिक हैं।" लेखक _समीर खान क़िस्त 1: शिकागो की ठंडी धूप शिकागो की शाम और ऊपर से गिर...
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