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महाभारत की कहानी - भाग-२१३ भीष्म वर्णित च्यवन और नहुष की कथा प्रस्तावना कृष्णद...
जीतेशकान्त पाण्डेय- ‘रात साक्षी है’ आपकी एक भिन्न प्रकार की रचना है। इसमें सीता...
रात का खाना खत्म हुआ तो शालिनी ने अपने 12 साल के बेटे को प्यार से सुला दिया। कमर...
Episode 1: श्राप… जो वरदान बन सकता है “जिस दिन तुम्हारी आँखों में फिर से नागमणि...
त्रिशा और राजन की खुशी पर डाॅक्टर के चैक अप के बाद अंतिम मोहर लग गई। डाॅक्टर मित...
यहाँ आपकी माँग के अनुसार एक मौलिक हिंदी कहानी प्रस्तुत है — शीर्षक अदृश्य परछाई।...
लेखक - एसटीडी मौर्य ️ कटनी मध्य प्रदेश अंकिता बिना कुछ सोचे-समझे मेरे पास आ गई।म...
भाग 3 ___भींगता_सन्नाटा..।__खैर...आज बच्चों को विद्यालय से लाने जाना था और सड़क-...
रात के सन्नाटे में जब शहर की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। तब बहुत सी बातें ऐसी लगती...
शानवी अब थोड़ी शांत हुई थी, लेकिन दिल अभी भी जोर-जोर से धड़क रहा था। टुक-टुक बिस...
कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है, जहाँ प्यार और दोस्ती की परिभाषा बदल जाती है। बचपन की मासूम दोस्ती धीरे-धीरे दिल की गहराई में उतर जाती है, लेकिन समय, दूरी और परिस्थितियाँ...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
मध्य प्रदेश के रायसेन जिला में अवस्थित भीमबैठका शैलाश्रय (Bhimbetka Rock Shelters) भोपाल से लगभग 45 किमी दूर विंध्य पर्वत माला के दक्षिण में अवस्थित है। यह स्थान बलुआ पत्थर के चट्ट...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
बारिश तेज़ हो रही थी। शहर की ऊँची इमारतों के बीच खड़ी वह काँच की इमारत इतनी ठंडी लग रही थी, जैसे उसके अंदर इंसान नहीं, केवल मशीनें रहती हों। अनाया शर्मा के हाथ काँप रहे थे। उसकी...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
बहुत लंबे और थकान भरे दिन के बाद अगर जिंदगी में कहीं सुकून है तो वो है सिर्फ़ ये मसाला चाय! मैं अपने घर की बालकनी में एक खाट पर बैठी थी। पास में एक हुक्का रखा हुआ था जिसे मैं घूरे...
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