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अध्याय 1 – पहली नजर का एहसास Brinda – एक खूबसूरत एहसास। उसका होना सिर्फ एक शब्द...
एकांश की बात सुनकर सत्यजीत कहता है---> नही बैटा अब वो ऐसा नही कर पाएगी क्योकीं भ...
बरसात हो रही थी। अस्पताल के बाहर मैं भीगता हुआ खड़ा था। न छाता था, न किसी का साथ...
(कमरे में हल्की नीली रोशनी। खिड़की के बाहर भोर होने को है।)(सुनीति कौशिक की बाहो...
From the finger of God, a speck of dirt emerges from under the nail. That spec...
इसी तरह हर वर्ष एक सप्ताह व्याख्यान एवं मंचीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाता। बच्च...
किडनी का तोह्फ़ा ...
यह दुनिया बहुत बड़ी है और सबके खयालात भी अलग होते हैं, इसलिए मैंने आज कुछ अलग सो...
“राधा… ज़रा धीरे चल बेटी…”माँ हाँफती हुई पीछे से बोली।“तेरे कदमों में अभी जवानी...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
आसमान में काले बादल छाए हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे आज इंदर देव रूष्ट हो और अपना सारा कोप निकालना चाहते हो,बरसात आने की आशंका में सभी लोग अपना काम जल्दी-जल्दी समेट कर अपने घर पहुंचन...
मेरा नाम आरव मल्होत्रा है, और मैं झूठ बोलने में माहिर हूँ। लेकिन जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, वो सच है। हर एक शब्द। हर एक पल। क्योंकि कुछ सच इतने भयानक होते हैं कि उन्हें झ...
रोमित और जूली दोनों दिल्ली के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में बी.टेक के अंतिम वर्ष में थे . दोनों ही उच्च मध्यम वर्ग के परिवार की संतानें थीं . रोमित का परिवार दिल्ली में ही रहता थ...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ान विशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर” [दृश्य 1 – महानगर का बाहरी इलाका, संध्या] लाल सूरज डूब रहा है। धुएँ से भरी हवा में सायरनों की आवाज़ गूँजती है...
ये कहानी एक काल्पनिक कहानी है इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नही है ये कहानी केवल मनोरंजन के लिए है इसमे बताये गये सभी किरदार काल्पनिक है . . . . लेखक -MASHAALLHA ये इस क...
गुरु जी डॉ0 सूर्यपाल सिंह से मैं दो वर्ष से सम्पर्क में हूँ। प्रारम्भ में गुरु जी के बोले शब्दों को लिखने के लिए ही आया था। धीरे-धीरे उनके साहित्य को भी पढ़ने में रुचि जगी। उनके बहु...
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