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  • एक ईच्छा

    एक ईच्छा लेखक: विजय शर्मा एरी  ---प्रस्तावनाजीवन की सबसे बड़ी परीक्षा इच्छाओं पर...

  • ​मेरा प्यार - 1

    ​एपिसोड 1: दरिया, परिंदे और वो अजनबी​अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और स...

  • डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 2

    सुबह की सुनहरी धूप अब तीखी होने लगी थी। भूपेंद्र के ऑफिस जाने के बाद घर की हलचल...

  • Vulture - 2

    शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ानभाग 2 (बैकस्टोरी): “रक्तपंख का जन्म”[दृश्य 1 – मह...

  • लाल दाग़ - 4

    मैडम ने अपने बैग में देखा कि अगर उनके पास पैड हो तो वे सुधा को दे दें, लेकिन आज...

  • सदियों से तुम मेरी - 2

    सुबह की हल्की धूप खिड़की से होकर दिव्या के कमरे में फैल रही थी। अलार्म बजने से प...

  • कोई दर्द नहीं सुनता

    वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानी।     सुबह का सूरज अभी पूरी तरह निकला नहीं था। हल्...

  • नकल से कहीं क्रांति नहीं हुई - 16

    4 मार्च 1990 को यह शादी सम्पन्न हो गयी। शादी निपटने के बाद मैं अपने कॉलेज चला गय...

  • विचलित मन

    ---विचलित मन लेखक: विजय शर्मा एरी  प्रस्तावनामनुष्य का मन एक नदी की तरह है—कभी श...

  • रहे तेरी दुआ मुझ पर - ग्यारहवां हिस्सा

    { रहे तेरी दुआ मुझ पर - ग्यारहवां हस्सा}[फलेशबेक -1]{कुहेद कबिले पर जादूगर जोहरा...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी By Jyoti Prajapati

सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...

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Vulture By Ravi Bhanushali

शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ान
विशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर”
[दृश्य 1 – महानगर का बाहरी इलाका, संध्या]
लाल सूरज डूब रहा है। धुएँ से भरी हवा में सायरनों की आवाज़ गूँजती है...

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लाल दाग़ By ARTI MEENA

कक्षा में अचानक ठहाकों की आवाज़ गूँज उठी।Sneha ने इधर-उधर देखा तो पाया कि सब बच्चे उसी की ओर घूर-घूरकर देख रहे थे और हँस भी रहे थे।लड़कियाँ Sneha को देख कर अजीब-सी मुस्कान लिए खड़ी...

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सदियों से तुम मेरी By Pooja Singh

सुबह की हल्की धूप खिड़की से होकर दिव्या के कमरे में फैल रही थी। अलार्म बजने से पहले ही उसकी आँख खुल गई थी। वह कुछ पल यूँ ही छत को देखती रही, जैसे किसी अधूरे सपने को याद करने की कोश...

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नकल से कहीं क्रान्ति नहीं हुई By Dr. Suryapal Singh

गुरु जी डॉ0 सूर्यपाल सिंह से मैं दो वर्ष से सम्पर्क में हूँ। प्रारम्भ में गुरु जी के बोले शब्दों को लिखने के लिए ही आया था। धीरे-धीरे उनके साहित्य को भी पढ़ने में रुचि जगी। उनके बहु...

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रहे तेरी दुआ मुझ पर By MASHAALLHA KHAN

ये कहानी एक काल्पनिक कहानी है  इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नही है ये कहानी केवल मनोरंजन के लिए है इसमे बताये गये सभी किरदार
काल्पनिक है . . . .
लेखक -MASHAALLHA

ये इस क...

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मैं दादा-दादी की लाड़ली By sapna

मैं अपने बचपन में दादा-दादी की लाड़ली थी।उनकी आँखों का नूर, उनके आँगन की सबसे प्यारी हँसी।घर में अगर कोई सबसे पहले मेरी ओर देखता था,तो वे दादा-दादी ही होते थे।उनके लिए मैं केवल उनक...

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इंतेक़ाम By Mamta Meena

आसमान में काले बादल छाए हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे आज इंदर देव रूष्ट हो और अपना सारा कोप निकालना चाहते हो,बरसात आने की आशंका में सभी लोग अपना काम जल्दी-जल्दी समेट कर अपने घर पहुंचन...

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दीवाने की दिवानियत By kajal jha

एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट
दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...

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श्रापित एक प्रेम कहानी By CHIRANJIT TEWARY

अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी By Jyoti Prajapati

सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...

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सदियों से तुम मेरी By Pooja Singh

सुबह की हल्की धूप खिड़की से होकर दिव्या के कमरे में फैल रही थी। अलार्म बजने से पहले ही उसकी आँख खुल गई थी। वह कुछ पल यूँ ही छत को देखती रही, जैसे किसी अधूरे सपने को याद करने की कोश...

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नकल से कहीं क्रान्ति नहीं हुई By Dr. Suryapal Singh

गुरु जी डॉ0 सूर्यपाल सिंह से मैं दो वर्ष से सम्पर्क में हूँ। प्रारम्भ में गुरु जी के बोले शब्दों को लिखने के लिए ही आया था। धीरे-धीरे उनके साहित्य को भी पढ़ने में रुचि जगी। उनके बहु...

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ये कहानी एक काल्पनिक कहानी है  इस कहानी का वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नही है ये कहानी केवल मनोरंजन के लिए है इसमे बताये गये सभी किरदार
काल्पनिक है . . . .
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मैं अपने बचपन में दादा-दादी की लाड़ली थी।उनकी आँखों का नूर, उनके आँगन की सबसे प्यारी हँसी।घर में अगर कोई सबसे पहले मेरी ओर देखता था,तो वे दादा-दादी ही होते थे।उनके लिए मैं केवल उनक...

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इंतेक़ाम By Mamta Meena

आसमान में काले बादल छाए हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे आज इंदर देव रूष्ट हो और अपना सारा कोप निकालना चाहते हो,बरसात आने की आशंका में सभी लोग अपना काम जल्दी-जल्दी समेट कर अपने घर पहुंचन...

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