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मेरा नाम प्रभजोत सिंह है। मेरा जीवन एक साधारण परिवार और सामान्य परिस्थितियों में...
पीएमओ ऑफिसअंदर ऑफिस में तीन आदमी बैठे है जिस में खुद पीएम साहब और रक्षा मंत्री औ...
बावरिया गैंग – एक सस्पेंस कथाउत्तर भारत के कई राज्यों में एक नाम लंबे समय तक फुस...
: : प्रकरण : : 32 एक दिन मैं चर्नी रोड स्टेशन के ब्...
प्रभजोत सिंह और संतुलन का सिद्धांतप्रभजोत सिंह किसी बड़े शहर में पैदा नहीं हुआ थ...
राख में दबी मोहब्बतपटना की पुरानी गलियों में बसी एक छोटी-सी कोठी थी, जहाँ हवा हम...
---वैज्ञानिक प्रयोगलेखक: विजय शर्मा एरी---प्रस्तावनागाँव के छोटे से स्कूल में पढ...
भूल-115 नेताजी सुभाष बोस के प्रति दुर्व्यवहार नेताजी की मृत्यु की जाँच करवाने, ज...
मंटू :एक कथाबिल्ली पालने का शौक़ मुझे कभी नहीं रहा। किसी भी जानवर को छूने,देखने...
पुनर्मिलन की शांति अभी पूरी तरह उतरी भी नहीं थी कि आकाश में अचानक काले बादल घिर...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
योगेश और संगीता का घर जगमगा रहा था। सुंदर बिजली की लड़ियाँ मानो बार-बार खिलखिला कर हँस रही थीं। आने-जाने वालों का मन मोहने वाली इस घर की सुंदरता में ताज़े फूलों की ख़ुशबू अपनी उपस्...
रात का अंधेरा था। आसमान पर चाँद धुंधला पड़ा हुआ था—मानो उसने भी अपनी रोशनी बुझा दी हो, इस अन्याय को देखने से इंकार कर दिया हो। महल के सामने बने execution ground पर सैकड़ों लोग जमा...
Karan Thakur उम्र (26) – शांत, समझदार, काबिल AI इंजीनियर। Kabir Thakur उम्र (25) – चुलबुला, मासूम, तेज दिमाग वाला AI डेवलपर। Shreya Sharma उम्र (23) – सरल, भोली, सुंदर AI इंज...
मम्मीमम्मी - मम्मी -मम्मी कहाँ हो आप ' अभिनव अवाज देता हुआ घर में आता है। बेटा मैं यहां स्टोर मे हूं। दीवाली की सफाई कर रही हूँ। अभिनव ये क्या है ? बक्शे मे क्या टटॉल रही हो। म...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
ब्लैक फॉर्मल ड्रेस में सजी हुई, आँखों पर ब्लॉक गॉगल्स लगाए, अर्शित रॉय—शहर का जाना माना, प्रसिद्ध और ताकतवर C.E.O—ऑफिस के दरवाज़े से बाहर निकला। उसके हर कदम में उच्चस्तरीय आत्मविश्...
कुछ यादें अचानक गायब नहीं होतीं। वे बस धीरे-धीरे पीछे खिसक जाती हैं, इस तरह कि हमें लगता है हमने ही उन्हें छोड़ दिया है। और जब वे लौटती हैं, तो शोर नहीं करतीं—बस चुपचाप अपनी जगह...
इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है इसका किसी जीवित, जंतु, मानव संसाधन से कोई लेना देना नही है अगर ऐसा होता है तो ये मात्र एक सयोग होगा ,,, जय हिन्द, इस कहानी को लिखने का उद्देश्य क...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
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