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बहुत समय पहले की बात है। एक घने हरे पेड़ की सबसे ऊँची डाल पर एक नन्हीं सी चिड़िय...
" रेगिस्तान का मेला”गाँव में आए उन्हें लगभग तीन हफ्ते हो चुके...
"बहू बनकर आई थी उस घर में, पर जब बुखार में पूरा शरीर तप रहा था, तब सास के मुँह स...
Chapter 4: पार्टी ऑन द रिस्कप्रैक्टिकल खत्म होते ही लैब से बाहर निकलते शैलेंद्र...
स्वामी रमते राम वचनामृत रामगोपाल भावुक ...
सृजना कि पृष्ठभूमि --महोबा आल्हा,उदल, मामा माहिल,डेबा कि धरती शारीरिक शौष्टव, शक...
: प्रकरण 5 : मांकवा से वापस आने के बाद मेरे सभी घा...
समाज की परंपराएँ और हमारे अपने निर्णयजब हम समाज की अपेक्षाओं और निर्णयों से परे...
जैसे ही वो मास्क वाला लड़का अंदर आया,सनाया ने ️️ आँखें बंद कर लीं —जैसे किसी...
रक्त-ड्रैगन कुल के विशाल अखाड़े में आज पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी।चारों तरफ...
"अकादमी की पहली सुबह"सुबह के पाँच बजे भी हवा ठंडी नहीं लग रही थी।पुलिस अकादमी के विशाल मैदान में नई भर्ती हुए अधिकारियों की लंबी लाइन खड़ी थी। हर किसी के चेहरे पर तनाव था।...
आधी रात का रिस्क... एक खिड़की का दीदार और छूटा हुआ जूता! शिव, दिनेश और शैलेंद्र का मास्टरप्लान: कुत्तों से ध्यान भटकाना, तीन की शेड पर पत्थर मारना और बिना आवाज बाइक खींच ले जाना। प...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें का...
शाम का वक्त था।बस स्टैंड लगभग खाली था — बस एक 16 साल की लड़की वहाँ खड़ी थी।उसका नाम था आशी कपूर 4'11 की नाजुक सी हाइट, दूध जैसा गोरा रंग, कमर तक आते काले घने बाल,नीली बड़ी-बड़...
सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। "अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...
एक शहर की लड़की गांव घूमने आती है। उसे क्या पता था कि इस गांव से वापस जाने का रास्ता बंद हो जाएगा। क्या वो लड़की इस जबरदस्ती के रिश्ते को कभी अपनाएगी? या इस कैद से भाग जाएगी? और ज...
भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे। देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...
बड़ा सा फ्लैट…जहाँ पहले हँसी गूंजती थी, वहाँ अब एक अजीब-सी खामोशी थी। 7 साल का शिवांश दौड़ता हुआ अपने पापा करण के पास आया…उसकी आँखों में मासूम खुशी थी। लेकिन जैसे ही वो करीब पहुँचा...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
एक नई शुरुआत सुबह के करीब छह बजे थे। छोटे से शहर की गलियों में अभी पूरी तरह चहल-पहल शुरू नहीं हुई थी। कहीं किसी घर के आंगन में झाड़ू लग रही थी, तो कहीं चाय की पहली खुशबू हवा...
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