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बचपन की वो मासूम यादें आज भी मेरे पास सुरक्षित हैं, लेकिन कहानी का असली मोड़ तो त...
वो दिन भी क्या दिन थे जानकी देवी की लड़की की शादी थी आज। घर फिर भी सूना लग रहा...
सुरक्षा का अनोखा विचारयह एक काल्पनिक कहानी है। इसका उद्देश्य केवल एक तकनीकी विचा...
मंदिर के अंदर अचानक एक गहरी खामोशी छा गई…दीपक की लौ भी जैसे थम गई हो।तभी मूर्ति...
रुद्रा कहता है --रुद्रा :- बहुत ज्ञान है तुझे परमानंद मधुमक्खी के बारे मे । लगता...
ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8)का भाव बहुत प...
एपिसोड 18: जब कहानी खुद को पढ़ती है दरवाज़ा खुला तो कोई नई दुनिया सामने नहीं आई।...
तीन अलग-अलग कमरे – एक ही रात1) करन का कमरा – अंधेरा, सन्नाटा, टूटा हुआ इंसानकमरे...
शक्ति कुछ कहने ही वाली थी कि तभी उसकी jeans की pocket में रखा phone बज उठा।उसने...
आरव अपनी कक्षा का एक शांत लड़का था। वह ज़्यादा किसी से बात नहीं करता था, लेकिन...
अध्याय 1: वीरान हवेली की पहली आहट पहाड़ों के बीच बसी वह जगह जितनी खूबसूरत थी, उतनी ही डरावनी भी। दूर-दूर तक फैली घनी चीड़ की जंगलों के बीच एक पुरानी हवेली खड़ी थी—नीलगिरी हवेली। द...
Karan Thakur उम्र (26) – शांत, समझदार, काबिल AI इंजीनियर। Kabir Thakur उम्र (25) – चुलबुला, मासूम, तेज दिमाग वाला AI डेवलपर। Shreya Sharma उम्र (23) – सरल, भोली, सुंदर AI इंज...
रात के लगभग दस बज रहे थे। लोधी रोड स्थित CBI Special Crime Division के office से बाहर निकलते हुए शक्ति ने अपनी SUV स्टार्ट की। पिछले छह घंटों से चल रहे operation ने उसे थका दिया था...
Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे। अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा...
नवंबर की हल्की ठंड... और मीठी-सी धूप में... आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही थी। तभी अंदर से फोन की आवाज़ आई... ? "ट्रिन ट्रिन... ट्रिन ट...
( ⚠️ पढ़ने से पहले ज़रूर जानें! धार्मिक नहीं, तार्किक: यह किताब किसी धर्म या संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि मानव मनोविज्ञान और व्यावहारिक जीवन जीने के विज्ञान पर आधारित है। शैली...
कुछ हटकर जो हो रहा साहब, हम उसके बारे कहने का दूसहास किया है, इस के लिए कुछ भी घटिकत हो जाए। होने दो। भूमिका सोचते हो पता चल गयी हरगिज नहीं।कहने का तातपर्य कुछ ये है। बम्बे जाना ही...
यह कहानी है राघव की…. जो अपने मम्मी पापा के साथ फॉरेन में रहता था, लेकिन उसके दादा- दादी इंडिया के एक छोटे से गांव में रहते थे। जिस गांव का नाम कलिंग था, राघव अपने पेरेंट्स से ह...
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