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--------" कब्ज " एक हैरत अंदाज की कहानी --- " न मुराद ये बीमारी हमें ही नहीं, मे...
-------------------अमर अभी राघव से बात कर ही.रहा था की डोर बेल बजी।.राघव को गोद...
अभी तक आपने पढ़ा कि रितु होश में आने के बाद शर्म और पीड़ा से टूटकर अपने भाई किशन...
फिर क्या था…चट मंगनी, पट ब्याह! हवेली एक बार फिर सज उठी। इस बार दुल्हन थी — पारो...
Part 10: भागते कदम, पीछा करती मौतबारिश अब तेज़ हो चुकी थी।सड़क पर गिरती हर बूंद...
अयान जैसे ही लड़खड़ाते हुए घर की दहलीज पर पहुँचा, वहां एक ऐसी अजीब सी चुप्पी पसर...
काया ने महसूस कर लिया था कि भूपेंद्र पिछले कुछ दिनों से उखड़ा-उखड़ा रहता है। उसक...
जिस पर कुछ पल अक्षिता वेदांश को देखते ही रह गई... वह वेदांश की बातों का मतलब निक...
शहद की गुड़िया - प्रकरण 27 " शादी के बाद...
---नई सुबहपटना से उठी "विश्वास विश्वविद्यालय" और "विश्वास दल" की रोशनी अब पूरी द...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
वो रात, जहाँ सब शुरू हुआ उस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था। हवा ठंडी थी, मगर उसके भीतर एक अनकही बेचैनी थी, जैसे कोई राज धीरे-धीरे परतों से बाहर आने को तैयार हो। शह...
चारों तरफ एक ऐसी रोशनी थी जो धूप से छनकर, हल्की सी अयान के चेहरे पर पड़ रही थी। अयान रॉय, अपनी कोठी की बालकनी में खड़ा था। हवा में, एक शाही रसूख की महक थी। उसने अपनी शर्ट की आस्तीन...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
वेदांश राठौर एक ऐसी शख्सियत जो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी एशिया में अपना सिक्का जमाए हुए है। बिज़नेस वर्ल्ड में एक नाम गूंजता है .. वेदांश राठौर। इनकी दूसरी ओर सबसे खतरनाक पर्सनेल...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
दस वर्षीया पारुल दौड़ती जा रही है। नदी के किनारे-किनारे। रेत पैरों में चुभ रही है, मगर वह हँस रही है। बालों में दो चोटियाँ हैं, हरी फ्रॉक हवा में लहरा रही है। पैरों में...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
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