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घने जंगल के किनारे फैला एक विशाल हरा भरा मैदान…सुबह की ओस में चमकती घास…और उसी म...
शहनाई अभी भी बज रही थी।किसी को ख़बर नहीं थी कि रोकें।बाहर ढोल था। हँसी थी। फूल थ...
राधा का संगम - प्रकरण 14 कुछ भी कहो कितना भी...
संघर्ष और ममता की परीक्षाराधा की ज़िंदगी अब एक नए मोड़ पर थी। सूरज ने अपनी पिछली...
फल्गु का रहस्यये कहानी उस समय की है, जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के...
सुबह के बाद शानवी के मन में एक ही बात बार-बार घूम रही थी—कार्तिकेय को हमेशा के ल...
वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानीकुंवर महेंद्र प्रताप सिंह इलाके़ के नामी...
पारसनाथ की छाया में गिरिडीह : रवीन्द्रनाथ, “एकला चलो रे” और एक सांस्कृतिक भूगोलछ...
निगाहें निगाहों से निगाहें मिलाने निकले हैं l ये क्या गुनाह करने जाने निकले हैं...
Episode 7 – धीरे-धीरे उभरते सवाल अगले दिन घर में हल्की-सी हलचल थी।कोई खुलकर कुछ...
धड़ाम! जैसे ही वह बैंक के अंदर भागा, एक भारी आग बुझाने वाला सिलेंडर (Fire Extinguisher) कबीर के सिर पर आ लगा, जिससे वह वहीं बेहोश हो गया। दुनिया में जैसे अंधेरा छा गया और उसकी आँ...
रात का समय था… रेगिस्तान अपनी गहरी खामोशी में डूबा हुआ था, लेकिन उस खामोशी के भीतर भी एक अजीब सी बेचैनी तैर रही थी। हवा आज कुछ ज़्यादा ही तेज़ चल रही थी ऐसी कि रेत के कण उड़-...
"नहीं! ऐसा मत करो, छोड़ दो please..... जाने दो! नहीं! नहीं!" "रात्रि उठ! ऐसा कहकर मेघा (रात्रि की मां) ने रात्रि को झकझोर दिया। कितनी बार कहा है इस लड़की को की छोड़...
इन हवाओ मे इन फिजाओ मे तुझ को मेरा प्यार पुकारे.. आजा आजा तुझ को मेंरा प्यार पुक रुक ना पाऊं मैं सजती आऊं मे दिल को ज़ब दिलदार पुकारे इस गीत की पंक्तियों न...
राधा का बचपन किसी धुंधली सुबह जैसा था, जहाँ रोशनी तो थी पर गर्माहट नहीं। सात भाई-बहनों के उस बड़े और गरीब परिवार में राधा तीसरे नंबर पर थी। उसका बचपन खेल-कूद में नहीं, बल्कि चूल्हे...
Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...
में और मेरे अहसास भाग-१ *** ईश्क में तेरे जोगन बन गई lआज राधा जोगन बन गई ll *** गरघर कीदीवार केकर्णहोतेकोई घरखड़ाना होता ll *** काटे नहीं कटता एक पल यहां lकैसे कटेगी एक उम्र भला यहा...
शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी। खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था। आज कुछ अलग सा लग रहा था। दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
सुबह 7:30 बजे J. K. Commerce College कॉलेज बोहोत हरा भरा था। कम से कम दस बिसेस कालेज के सामने खड़े थे। सभी बच्चे अपनी दोस्तों के साथ मस्ती करते बस चढ़ रहे...
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