The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
You are welcome to the world of inspiring, thrilling and motivating stories written in your own language by the young and aspiring authors on Matrubharti. You will get a life time experience of falling in love with stories.
हवेली का शाप: रूहों का बुलावाअध्याय 1: सन्नाटे की दस्तकआर्यन एक स्वतंत्र छायाकार...
सुबह की पहली किरण ने अभी आसमान को छुआ भी नहीं था, लेकिन ऐशा की आँखों में नींद का...
एपिसोड: महाप्रलय: शून्य का साम्राज्य1. पिता का संदेश और अतीत की गूँजआर्यन के हाथ...
ठुमरियों की छलकती भावपूर्ण रसधार - अतीत से फ़िल्मों तक श्री के .एल . पांडेय [प्र...
कुँवर प्रताप चौंक उठे।“क्या? वो लौटी थीं?”राजपुरोहित जी के अधरों पर हल्की, रहस्य...
विक्रम सिंह शेखावत अपनी गाड़ी लेकर निकल गया।पता नहीं क्या होगा? मैं बार -बार अभी...
: : प्रकरण - 46 : : गोवेर्धन राय त्रिपाठी में उपन्...
अध्याय 9: अतीत की परछाइयाँ – एक रहस्यमयी आगमनवर्तमान का कोलाहल और चिंताएँ जैसे...
अभी तक आपने पढ़ा कि अनन्या अपने पति अनुराग से दूरी बनाकर वीर के साथ मिलन की कोशिश...
अध्याय 1: अध्याय 1: आइस सील एज ओपन बीटा शुरू होता है अध्याय 1: अध्याय 1: आइस सील...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
शहर की रफ़्तार थम चुकी थी, लेकिन आसमान अपनी पूरी ताकत से गरज रहा था। रात के 11 बज रहे थे। ऐशा अपने भारी बैग को कंधे पर टांगे, कॉलेज की एक्स्ट्रा क्लास खत्म कर घर की ओर तेज़ कदमों स...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
एक बड़े मेले के भीड़-भाड़ वाले प्रांगण के भीतर एक विशाल कक्ष सजा हुआ था। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। सामने, एक सोने-ओसके सिंहासन पर लगभग सोलह–सत्रह वर्ष का एक लड़का बैठा था; जलालु...
इस तरह एक सदियां बीत गए।। लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी। और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
योगेश और संगीता का घर जगमगा रहा था। सुंदर बिजली की लड़ियाँ मानो बार-बार खिलखिला कर हँस रही थीं। आने-जाने वालों का मन मोहने वाली इस घर की सुंदरता में ताज़े फूलों की ख़ुशबू अपनी उपस्...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...
लॉग इन करें
लॉगिन से आप मातृभारती के "उपयोग के नियम" और "गोपनीयता नीति" से अपनी सहमती प्रकट करते हैं.
वेरिफिकेशन
ऐप डाउनलोड करें
ऐप डाउनलोड करने के लिए लिंक प्राप्त करें
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved.
Please enable javascript on your browser