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यह इश्क़ का रंग गहरा है, जैसे खुला आसमान,इसमें खोई है दुनिया मेरी, खोया है सारा...
अगली सुबह, हल्की धूप परदे से अंदर आ रही है।कमरा बिल्कुल शांत है।Shreya धीरे-धीरे...
“मोनिका की बात अभी पूरी भी नहीं हुई थी कि कृतिका ने बीच में ही काटते हुए कहा—”कृ...
भुतहा हवेली का रहस्यसर्दियों की एक ठंडी रात थी। गाँव के किनारे पर स्थित पुरानी ह...
रसोई में चाय उबल रही थी। रश्मि अदरक कूट रही थी और सौम्या कप ट्रे में सजा रही थी।...
शीर्षक: स्टार-सेंटिनल्स: वल्चर के बाद[दृश्य 1 – शोक की धरती]वल्चर की शहादत के बा...
बहुत अच्छा, ---बचपन का दोस्त लेखक: विजय शर्मा एरी ---गाँव की गलियाँ और पहली दोस...
अध्याय 6: माधव का खुलासा और बढ़ता संशय"मुख्य द्वार पर गिरा वह काला लबादा केवल...
---वास्तविक सौंदर्यलेखक: विजय शर्मा एरी ---प्रस्तावनासौंदर्य की परिभाषा सदियों...
धनपुर की सुबह : धनपुर की सुबह धूल और आदतों से बनी होती है। सूरज निकलने से पहले...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ान विशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर” [दृश्य 1 – महानगर का बाहरी इलाका, संध्या] लाल सूरज डूब रहा है। धुएँ से भरी हवा में सायरनों की आवाज़ गूँजती है...
कक्षा में अचानक ठहाकों की आवाज़ गूँज उठी।Sneha ने इधर-उधर देखा तो पाया कि सब बच्चे उसी की ओर घूर-घूरकर देख रहे थे और हँस भी रहे थे।लड़कियाँ Sneha को देख कर अजीब-सी मुस्कान लिए खड़ी...
सुबह की हल्की धूप खिड़की से होकर दिव्या के कमरे में फैल रही थी। अलार्म बजने से पहले ही उसकी आँख खुल गई थी। वह कुछ पल यूँ ही छत को देखती रही, जैसे किसी अधूरे सपने को याद करने की कोश...
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