The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
You are welcome to the world of inspiring, thrilling and motivating stories written in your own language by the young and aspiring authors on Matrubharti. You will get a life time experience of falling in love with stories.
सृष्टि साधारण सी लड़की है जो अपने भाई के साथ शहर मे एक रेंट के घर मे रहती है जिसस...
जीजी की शादी के बाद जीजी...
: दो किताबों के पन्ने (ग़रीबी से अमीरी का असली सफ़र)शहर के एक नामी स्कूल के बाहर...
सर...उस समय ड्यूटी डॉक्टर रुद्र नही डॉक्टर अनन्या थी""अनन्या.....मैने रुद्र को क...
कैलाश ने धीरे-धीरे बोलना शुरू किया…वो बोला - मैं हमेशा से ऐसा नहीं था, शैलजा…एक...
भारत के कानून बनाने वाले नेताओं से एक अनुरोधबच्चों को मारपीट से पूर्ण सुरक्षा दे...
सालम सिंह के खात्मे के बाद उस खौफनाक गोदाम का मंज़र पूरी तरह बदल चुका था। डीसीपी...
स्वागत है दोस्तों एपिसोड 11 में! पिछले एपिसोड में हमने देखा कि विक्रांत आन्या के...
कुछ कहानियाँ मोहब्बत से नहीं शुरू होतीं...शुरू होती हैं एक ऐसे फैसले से, जिसे आप...
इतिहास के पन्नों से 28 नोट - ‘ वैसे तो इतिहास अनंत है ‘ इस शृंखला में इत...
उस समय की बात है, जब झारखंड बिहार से अलग नहीं हुआ था। गांवों में गरीबी और बेरोजगारी का ऐसा आलम था कि पेट की आग बुझाने के लिए लोग अपनी मिट्टी छोड़कर सैकड़ों मील दूर परदेस जाने को मज...
सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। "अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...
"नमस्कार दोस्तों! स्वागत है, आप सभी का "मातृभारती" के एक बेहद अनोखे और आपके होश उड़ा देने वाले सफ़र में।मैं हूँ, आपका दोस्त..."धर्मेंद्र कुमार"......अपने यात्रा...
प्रस्तावना: तमस का साम्राज्य और अदृश्य आशाकलयुग का वातावरण: सन 4,28,126 ईस्वीसन 4,28,126 ईस्वी का यह भयानक काल-चक्र संपूर्ण ब्रह्मांड का सबसे खौफनाक, क्रूर और घिनौना दौर बन चुका था...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
[दृश्य 1] स्थान: घर का आंगन / हॉल समय: शाम का वक्त सूरज ढल रहा है और आसमान में हल्की लाली छाई हुई है। घर के अंदर हवा में एक सुकून और अपनापन घुला हुआ है। आंगन में पाँच साल का...
यह कहानी आधुनिक समाज, रिश्तों की उथल-पुथल, मानवीय मूल्यों और संघर्ष के बीच उम्मीद की एक किरण ढूँढने की यात्रा है। कहानी का मुख्य पात्र 'राघव' है, जो शहर की चमक-धमक से दूर अ...
में और मेरे अहसास भाग-१ *** ईश्क में तेरे जोगन बन गई lआज राधा जोगन बन गई ll *** गरघर कीदीवार केकर्णहोतेकोई घरखड़ाना होता ll *** काटे नहीं कटता एक पल यहां lकैसे कटेगी एक उम्र भला यहा...
एक नई शुरुआत सुबह के करीब छह बजे थे। छोटे से शहर की गलियों में अभी पूरी तरह चहल-पहल शुरू नहीं हुई थी। कहीं किसी घर के आंगन में झाड़ू लग रही थी, तो कहीं चाय की पहली खुशबू हवा...
उस रात जंगल ज़रूरत से ज्यादा खामोश था। इतना खामोश कि नील को सूखी पत्तियों पर पड़ते अपने ही जूतों की आवाज़ किसी हथौड़े की तरह सुनाई दे रही थी। हवा ठंडी थी, पर उसके माथे पर पसीने की...
लॉग इन करें
लॉगिन से आप मातृभारती के "उपयोग के नियम" और "गोपनीयता नीति" से अपनी सहमती प्रकट करते हैं.
वेरिफिकेशन
ऐप डाउनलोड करें
ऐप डाउनलोड करने के लिए लिंक प्राप्त करें
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Custom Web Development Company India.
Please enable javascript on your browser