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एपिसोड 1: किस्मत का ‘विसर्जन’ और वह अनोखा मेहमानमकान का हाल: बरेली की सबसे तंग ग...
मैं एक छोटे से गाँव में रहने वाला एक साधारण लड़का था। मेरी पहचान बस इतनी थी कि म...
वेदांत 2.0 लाइफ part 3चेतना का सार्वभौमिक दर्शनअज्ञात अज्ञानी “स्वामी विवे...
अध्याय 1 — घाट पर आगवाराणसी — वो शहर जहाँ गंगा मैया बहती हैं, जहाँ हर गली में एक...
2087 में, सबसे महंगी चीज़ यादें थीं। और सबसे सस्ती चीज़ भी।मीरा के हाथ काँपते थे...
यह कहानी पूरी तरह काल्पनिक है और केवल मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है। इसका वा...
एक माँ आज रो रही है।उसका दम घुट रहा है, वह धीरे-धीरे मर रही है।क्या कोई उसकी पीड...
मेरी शादी इतनी जल्दी तय हो जाएगी, ये मैंने कभी सोचा भी नहीं था।सब कुछ जैसे अचानक...
वेदांश राठौर एक ऐसी शख्सियत जो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी एशिया में अपना सिक्का जम...
एक छोटे से गाँव में एक बूढ़ा पेंटर रहता था। वह अपनी कला के लिए मशहूर था, लेकिन उ...
भाग 1 शापित हवेली रात के ठीक 3 बजकर 13 मिनट हुए थे। पूरा गाँव गहरी नींद में डूबा हुआ था। बाहर तेज़ हवा चल रही थी। पेड़ों की सूखी शाखाएँ एक-दूसरे से टकराकर अजीब आवाज़ें निक...
प्रिया पाठको,, यह एक सामाजिक कहानी है । जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है । अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ?? ....... .......
शहर की शोर-शराबे वाली गलियों के बीच एक छोटा सा कोना ऐसा था, जहाँ वक्त जैसे ठहर सा जाता था। 'रिदम कैफे'—पुरानी ईंटों की दीवारें, पीली मद्धम रोशनी और हवा में तैरती ताज़ा पिसी...
ये मेरी पहली लव स्टोरी होने वाली है इसलिए थोड़ी बहुत गलती हुई तो माफ़ करिएगा और फोलो भी कर लिजिए 100% फोलो बैंक मिलेगा।सुबह की हल्की धूप खिड़की के पर्दों से छनकर कमरे में फैल रही थ...
नरक का निमंत्रण (The Hell’s Invite)** **दृश्य:** साल 2026। दुनिया कोरोना के दसवें वैरिएंट से जूझ रही है। कमांडर विक्रम एक अंधेरे कमरे में बैठा है, तभी एक होलोग्राम जलता है। *...
2087 में, सबसे महंगी चीज़ यादें थीं। और सबसे सस्ती चीज़ भी। मीरा के हाथ काँपते थे — बस थोड़े से, मुश्किल से नज़र आने वाले — जब उसने अपनी हथेली मेमवॉल्ट स्कैनर के ऊपर रखी। शीशे के...
रोमित और जूली दोनों दिल्ली के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में बी.टेक के अंतिम वर्ष में थे . दोनों ही उच्च मध्यम वर्ग के परिवार की संतानें थीं . रोमित का परिवार दिल्ली में ही रहता थ...
महान गुप्त साम्राज्य, अवंती प्रदेश, उज्जैन प्रांत।उज्जैन प्रांत की आठ प्रमुख एकेडमीयों में से एक छाया झील एकेडमी के प्रवेशद्वार से एक लडका अपनी कमर पर सेबर लटकाकर बाहर निकला।“सीनिअ...
शीर्षक: स्टार-सेंटिनल्स: वल्चर के बाद[दृश्य 1 – शोक की धरती]वल्चर की शहादत के बाद शहर की रातें और भी लंबी हो गई थीं। टूटी हुई मूर्ति के सामने मोमबत्तियाँ जल रही थीं। हवा में एक अजी...
गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
मुंबई का एक मशहूर कॉलेज, कैंटीन की भीड़ और दोस्तों की मस्ती। एग्जाम्स खत्म हो चुके थे और सभी के चेहरों पर छुट्टियों की खुशी थी। राम, विनोद, सृष्टि, अनामिका, सौरभ, मेहुल और मोनिक...
मेरा नाम आरव मल्होत्रा है, और मैं झूठ बोलने में माहिर हूँ। लेकिन जो कहानी मैं आपको सुनाने जा रहा हूँ, वो सच है। हर एक शब्द। हर एक पल। क्योंकि कुछ सच इतने भयानक होते हैं कि उन्हें झ...
इन हवाओ मे इन फिजाओ मे तुझ को मेरा प्यार पुकारे.. आजा आजा तुझ को मेंरा प्यार पुक रुक ना पाऊं मैं सजती आऊं मे दिल को ज़ब दिलदार पुकारे इस गीत की पंक्तियों न...
रात का समय था… रेगिस्तान अपनी गहरी खामोशी में डूबा हुआ था, लेकिन उस खामोशी के भीतर भी एक अजीब सी बेचैनी तैर रही थी। हवा आज कुछ ज़्यादा ही तेज़ चल रही थी ऐसी कि रेत के कण उड़-...
मैंने उत्सुकता से कहा,“भंते जी, चलिए ज़रा करीब से देखते हैं… दूर से तो कुछ साफ दिखाई ही नहीं दे रहा…”प्रियांशी का चेहरा डर के मारे सफेद पड़ गया था। उसने घबराते हुए मेरा हाथ पकड़ लि...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
हमारे घर से कुछ ही दूरी पर रेल की कुछेक पटरियां थीं और जिन पर ना जाने कौन कौन सी कितनी ट्रेनें हर वक्त बेवक्त गुजरती रहती थीं। सुबह सबेरे और आधी रात के वक्त के गुजरने के बाद ही...
रावल खुमाण द्वितीय 9वीं सदी में मेवाड़ के गहलोत वंश के शासक थे जो अरब आक्रमणों के खिलाफ हिंदू धर्म की सबसे बड़ी ढाल बने। उन्होंने भीनमाल के राजा नागभट्ट के साथ मिलकर सेनापति हाशिम...
यह कहानी है राघव की…. जो अपने मम्मी पापा के साथ फॉरेन में रहता था, लेकिन उसके दादा- दादी इंडिया के एक छोटे से गांव में रहते थे। जिस गांव का नाम कलिंग था, राघव अपने पेरेंट्स से ह...
देवक़ेड़ा का रहस्य छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहाँ बसा...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
यह कहानी बहुत समय पहले की है ... करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले की ................ नेपाल के सरहद से सटा भारत में एक छोटा सा गाँव था विष्णुपुर । इसी गाँव के ठीक बीचोबीच बने कु...
मुंबई की रात हमेशा की तरह चमक रही थी।ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच से गुजरती सड़कों पर गाड़ियों की लाइट्स किसी नदी की तरह बहती दिखाई दे रही थीं।लेकिन उस चमक के बीच एक लड़की के मन में अज...
उत्तर प्रदेश के छोटे से गांव मेहनूपुर की मिट्टी की खुशबू कहानीकहानी की शुरुआत: मेहनूपुर की गलियांमेहनूपुर एक ऐसा गांव है जहां सूरज की पहली किरण के साथ ही हल की आवाजें गूँजने लगती ह...
कमरे में एसी चल रहा था, फिर भी संजना की हथेलियां पसीने से तर थीं। फोन को इतनी जोर से पकड़ा हुआ था कि उंगलियों के पोर सफेद पड़ गए थे — जैसे अगर उसने ज़रा भी ढील दी, तो कुछ छूट जाएगा...
सिख धर्म के प्रणेता गुरू नानक देव जी का जन्म १४६९ इन, में हुआ था। 1496 ई, मे उन्होने ना केवल हिन्दू ना कोई मुसलमान,का उपदेश दिया।उनका सारा जीवन मानवता और न्याय के लिए, अत्याचारी और...
समर्पण उन सभी 'खोजी' मन को, जो भीड़ का हिस्सा बनने से इनकार करते हैं। और उन साहसी पाठकों को, जो सिर्फ मीठी बातें सुनने के शौकीन नहीं हैं, बल्कि सच सुनने का साहस रखते हैं।...
एक कर्तव्य ऐसा भी स्वामी हरि प्रपन्नाचार्य हरिद्वार में वैष्णव सम्प्रदाय के प्रसिद्ध व तपस्वी आचार्य थे । उनके प्रसिद्ध राधा स्वामी आश्रम तीर्थयात्रियों व भक्तों के ठहरने व खा...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
कुछ लोग हमारे जीवन में कभी नहीं आते।वे हमारे घरों की चौखट नहीं लाँघते, हमारी उँगलियों को नहीं छूते, हमारे साथ तस्वीरों में नहीं दिखते।फिर भी, एक दिन जब हम अपनी स्मृतियों की अलमारी...
सुबह का समय था…हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी…मंदिर की घंटियों की मधुर आवाज़ पूरे माहौल को पवित्र बना रही थी…राधा-कृष्ण के मंदिर में आज कुछ खास शांति थी…उसी मंदिर के दरवाज़े पर एक...
राधा का बचपन किसी धुंधली सुबह जैसा था, जहाँ रोशनी तो थी पर गर्माहट नहीं। सात भाई-बहनों के उस बड़े और गरीब परिवार में राधा तीसरे नंबर पर थी। उसका बचपन खेल-कूद में नहीं, बल्कि चूल्हे...
बेगूसराय का वो काला दिनस्थान: गर्ल्स इंटर स्कूल एंड कॉलेज, मोहनपुरा (बेगूसराय, उत्तर प्रदेश)समय: शाम के 4:00 बजेसीन 1: सुनसान रास्ता और वो खामोशीमोहनपुरा की सड़क पर सन्नाटा पसरा था...
शिवपुर। एक ऐसा शहर… जहाँ रातें गोलियों की आवाज़ से शुरू होती थीं और लाशों पर खत्म। यहाँ लोग नाम से नहीं, गिरोह से पहचाने जाते थे। कानून सिर्फ दीवारों पर टंगे पोस्टरों में जिंदा...
( ⚠️ पढ़ने से पहले ज़रूर जानें! धार्मिक नहीं, तार्किक: यह किताब किसी धर्म या संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि मानव मनोविज्ञान और व्यावहारिक जीवन जीने के विज्ञान पर आधारित है। शैली...
हवाई अड्डे की भीड़ में मेहरीश एक पतली सी रेखा की तरह खड़ी थी। उसके कंधे पर एक छोटा सा बैग था, हाथ में एक किताब, और आँखों में एक ऐसी थकान जो सालों की नहीं, जन्मों की लगती थी। उसकी म...
हर किसी की जिंदगी में एक ऐसा इंसान होता है, जो सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक एहसास होता है। एक ऐसी रूह, जो आपकी धड़कनों में बसती है, आपकी मुस्कुराहट की वजह बनती है और आपके वजूद का अभ...
दुनिया की 7 सबसे डरावनी फिल्में Part 1: The Exorcist (1973) चेतावनी: यह सिर्फ एक फिल्म नहीं… एक अनुभव है रात के 2:47 बजे का समय था। कमरे में हल्की-सी हवा चल रही थी। मो...
कई सालों से मैं एक सपना देख रहा हूं, जहां सामने नीला पानी और किनारे पर फैली सुनहरी रेत... फिर एक पांव दिखता था सपने में ,जो हमेशा आधा पानी में होता और आधा किनारे पर । उस पांव की वह...
लेखिका की ओर से अक्सर ऐसा होता हे की हमे बचपन से हि दिखाया या अहसास कराया जाता हे के प्रेम कहानिया बस अमर या अद्भुत हि होती हे। जैसे की फिल्मो मे हीरो-हीरोइन या किताबों मे रा...
घना अंधेरा जंगल. रात का न जाने कौन- सा पहर था. चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि अपनी ही साँसों की आवाज किसी अनजान खतरे की आहट लग रही थी. आसमान को काले बादलों ने निगल लिया था और...
आज के तेज़ और तनावपूर्ण जीवन में, टेंशन और डिप्रेशन सामान्य होते जा रहे हैं। काम का दबाव, रिश्तों की चुनौतियाँ, वित्तीय समस्याएँ, और सोशल मीडिया की निरंतर तुलना - ये सभी हमारे मानस...
धनबाद शहर , जहां के सड़को पर अशोक और राजबीर एक building से बाहर भागते हूए दिखता है । दोनो बाप बेटा शहर मे लड़कियों की smuggling और ड्रग्स का धंधा करता है , पर रुद्रा और एंथोनी जो अ...
आधी रात का समय था, पर शहर कभी सोता नहीं था। एम्स के तेरहवीं मंजिल के ऑपरेशन थियेटर की चमचमाती लाइटें अब धुंधली पड़ने लगी थीं। डॉ. आर्यन वर्मा ने अपने हाथों के लेटेक्स दस्ताने उतारक...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
"रात का गहरा सन्नाटा था, जिसे सिर्फ तेज़ बारिश और बिजली की कड़क तोड़ रही थी। 8 साल की छोटी आन्या अपने रास्ते से भटक कर घने जंगल के बीचों-बीच खड़ी थी। उसके नन्हे पाँव कीचड़ में...
रात के ठीक 11:57 बजे थे। मुंबई शहर बारिश में डूबा हुआ था। अनिकेत अपनी कार पार्क करके अपार्टमेंट की ओर बढ़ रहा था। जैसे ही उसने मुख्य दरवाज़ा खोला, उसकी नज़र ज़मीन पर पड़े एक सफ...
यह कहानी है मासूम – सी मान्या की.. जो अभी केवल 23 साल की है । जो फिलहाल में एक स्कूल टीचर है। जितनी मासूम.. उतनी ही प्यारी है, लेकिन एक दिन उसकी पूरी दुनिया पलट सी जाती है। जब उसकी...
एक अनकहा पन्ना..."सदियों से इतिहास ने हीर-रांझा को सिर्फ तड़पते और बिछड़ते देखा है... लेकिन क्या होता अगर हीर लाचार होने के बजाय निडर होती? आइए देखते हैं आज के दौर के हीर-रांझा...
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