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ग्रामीण बच्चियां और उनका बचपन
द्वारा Pragya Chandna

मैं एक शिक्षक हूं। मेरी पोस्टिंग एक ग्रामीण इलाके में है। मेरा  स्कूल को-एड है, जैसा कि अमूमन हर शासकीय स्कूल होता है। हमारे देश में हालांकि बाल-विवाह कानूनन ...

फ्रैंड रिक्वैस्ट
द्वारा Pratibha
  • 138

फ्रैंड रिक्वैस्ट मन पर दस्तक हुई .. मैंने धीरे से कपाट खोले .. गर्दन बाहर निकाली.. सामने देखा, इधर - उधर झाँका .. | कोई नहीं था .. माने ...

फिर मिलेंगे... कहानी - एक महामारी से लॉक डाउन तक - 11
द्वारा Sarvesh Saxena
  • 184

शहर के शहर सन्नाटे में डूबे थे, हर तरफ एक सन्नाटे का शोर था वो लोगों के रोने का बिलखने का शोर था, नियति हंस रही थी मानव पर, ...

दाता
द्वारा Poonam Singh
  • 202

कहानी  " दाता " "बच्चें सो गए क्या ?"  पिता ने चिंतित स्वर में पूछा। " हाँ अभी अभी सोए हैं।" "समझ रहा हूँ.., भूख से नींद तो आई ...

खब्बू वीर
द्वारा Priyan Sri
  • 144

इस पावन भूमि भारत में समय-समय पर महापुरुषों ने जन्म लिया है। जो अपने चमत्कारों द्वारा इस नश्वर संसार में भी अमर हो जाते हैं और आने वाली पीढ़ियाँ ...

आधा आदमी - 12
द्वारा Rajesh Malik
  • 124

आधा आदमी अध्‍याय-12 ज्ञानदीप पढ़ते-पढ़ते सो गया। जैसे कभी ओबामा पढ़ते-पढ़ते सो जाते थे। जैसे बर्नाड शा, मदर टेरेसा, कपिल देव, इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, सुभाष चन्द्र बोस। ...

महामाया - 18
द्वारा Sunil Chaturvedi
  • 84

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – अठारह बाबाजी योग के बारे में बोल रहे थे। किसी विदेशी ने प्रश्न किया था। ‘‘योग केवल आसन और प्रणायाम तक सीमित नहीं है। ...

होने से न होने तक - 33
द्वारा Sumati Saxena Lal
  • (11)
  • 174

होने से न होने तक 33. डा.ए.के.जोशी दम्पति के आते ही सब लोग बाहर के कमरे में आ गए थे। मीनाक्षी रो रही है। कुछ क्षण तक सब लोग ...

आधी दुनिया का पूरा सच - 7
द्वारा Dr kavita Tyagi
  • 148

आधी दुनिया का पूरा सच (उपन्यास) 7. लगभग आधा घंटा की यात्रा के बाद गाड़ी एक झुग्गी नुमा घर के सामने रुकी । झुग्गी के बाहर अंडे के छिलकों ...

एक ही भूल, भाग २
द्वारा Saroj Prajapati
  • (15)
  • 236

सीमा को पुरानी बातें याद आने लगी। रज्जो उसके ही गांव की थी। रजनी नाम था इसका। सब इसे रज्जो कहते थे। रज्जो के परिवार में उसके अलावा, माता ...

गंगादेई
द्वारा Pranava Bharti
  • 150

गंगादेई  ---------                    उम्र का एक पड़ाव पार कर लेने पर मनुष्य न जाने क्यों अपनी पिछली ज़िंदगी में झाँकता ज़रूर  है,वह स्थिर रह ...

सुहागिन या विधवा - 3
द्वारा किशनलाल शर्मा
  • 252

राधा का हरा भरा संसार फलने फूलने से पहले ही उजड़ गया।राघव की मौत का समाचार मिलते ही राधा के हाथ की चूड़ियां तोड़ डाली गई।मांग का सिन्दूर मिटा ...

नो स्माइल प्लीज़ !
द्वारा Neelam Kulshreshtha
  • 182

नो स्माइल प्लीज़ ! नीलम कुलश्रेष्ठ "आप ऑरेंज क्यों नही लाती ?" कीवी ने उसका बैग टटोलते हुए पूछा. "ऑरेंज का सीजन गया. " "आप ग्रेप्स भी नही लाती ...

काश ! में समज पाता - 2
द्वारा Mahek Parwani
  • 420

बस ये बात जैसे प्रणव कि माताजी को कांटे कि तरह चुभ सी गई । दिन-रात एक ही चिंता उसे सता रही थी , अगर बेटी आई तो इस ...

मज़बूर (पार्ट 2)
द्वारा Er Shrikar Dixit
  • 104

स्वाती दरबाजा खोलती है..राहुल :- रौशन सो रहा है जागा तो नहीं...स्वाती :-  नहीं,सो ही रहा है..राहुल :- अच्छा,स्वाती :क्या कहा राजेश जी ने?राहुल :- ह्म्म, नंबर  दिया है ...

विश्वासघात
द्वारा JYOTI PRAKASH RAI
  • 180

विश्वासघात मानवता एक बार फिर शर्मसार हुई है और इसका जिम्मेदार भी मानव प्राणी ही हुआ है वह मानव जो संसार में सबसे अधिक बुद्धिमान माना जाता है। जिसके ...

नष्टचित्त
द्वारा Deepak sharma
  • 118

नष्टचित्त इधर कुछ समय से वह उतनी चौकस नहीं रही थीं। चीज़ों के प्रति, लोगों के प्रति उनकी जिज्ञासाएँ ख़त्म हो रही थीं। सवाल पूछे जाने पर जो भी ...

निकले बड़े बेआबरू होकर..
द्वारा Amit Singh
  • 444

         "निकले बड़े बेआबरू होकर... "कवि केदारनाथ सिंह ने कहा है कि “जाना” हिंदी की सबसे खतरनाक क्रिया है | लेकिन लोग जा रहे हैं | लोग ठीक वैसे ही ...

कुबेर - 48 - अंतिम भाग
द्वारा Hansa Deep
  • 98

कुबेर डॉ. हंसा दीप 48 बच्चे क्या कहते, जानते थे उनका लक्ष्य, उनका काम। अपने नये मिशन को पूरा करने वे वहीं रहने लगे। यद्यपि इन बच्चों के लिए ...

बेटी और रोटी का रिश्ता
द्वारा Kumar Gourav
  • 266

गाँव में पेट्रोल डिजल का रोना नहीं है। उहाँ विकासवा आराम से चाय की टपरी पर सुर्ती मलता है । गाँव छोड़े सालों हो गये लेकिन गाँव हमें नहीं ...

जननम - 2
द्वारा S Bhagyam Sharma
  • 134

जननम अध्याय 2 "हेलो !" वह धीरे से बोला। उडती सी उसने निगाह उस पर डाली फिर असमंजस में उसे देखा। निर्दोष निग़ाहों से उसने देखा। फिर उसने चारों ...

बडी प्रतिमा - 4
द्वारा Sudha Trivedi
  • 76

बडी प्रतिमा (4.)            डाॅली, छोटी अंजना और गीतू की तिकडी थी हाॅस्टल में । तीनों ने अपनी चौकियां खिसकाकर एक साथ कर ली थीं। ...

आधा आदमी - 11
द्वारा Rajesh Malik
  • 138

आधा आदमी अध्‍याय-11 वह मुझे छोड़कर सन्नो को पीटने लगा। मैं मौका पाते ही पहरे के झुण्ड में घुस गया। चाँदनी रात होने के कारण मुझे पहरे के अंदर ...

महामाया - 17
द्वारा Sunil Chaturvedi
  • 86

महामाया सुनील चतुर्वेदी अध्याय – सत्रह भोजनशाला से अपने कमरे की ओर जाते समय अखिल ने देखा कि मंदिर प्रांगण में सन्नाटा था। समाधि के लिये खोदे जा रहे ...

वो इधर की उधर लगाने वाले विदूषक कब बन गए, पता चला क्या ?
द्वारा Meenakshi Dikshit
  • 94

सुबह से शाम तक हम सभी को सोशल मीडिया के माध्यम से अग्रसारित किये जाने वाले अनेकानेक चुटकुले, मेम्स और तमाम मजाकिया सन्देश मिलते रहते हैं. कभी हम हंस ...

होने से न होने तक - 32
द्वारा Sumati Saxena Lal
  • (12)
  • 202

होने से न होने तक 32. नये तंत्र के साथ वह पहला साल ऐसे ही बीत गया था। शुरू शुरू में इस तरह की बातें सुनते तो मन बेहद ...

नव प्रभात
द्वारा Rama Sharma Manavi
  • 218

   जिंदगी के आसमान में खुशियों के पंख लगाकर वह उन्मुक्त परिंदे की मानिंद उड़ान भर रही थी कि किस्मत ने अचानक उसके पंख काटकर उसे हकीकत के पथरीले ...

जौंइ
द्वारा Pranava Bharti
  • 146

जौंइ  ====      बड़ी उम्र होते -होते बचपने की तरफ़ दौड़ता है मन ! मुझे भी उम्र के बढ़ने के साथ बीते ज़माने न जाने कैसे याद आने ...

सुहागिन या विधवा - 2
द्वारा किशनलाल शर्मा
  • 464

राघव की आवाज सुनकर राधा अतीत से वर्तमान में लौट आयी।आवाज सुनकर उसे विश्वास हो गया कि आगुन्तक उसका पति ही है।जिसे उसने एक दिन आरती उतारकर विदा किया ...

एक ही भूल, भाग १
द्वारा Saroj Prajapati
  • 392

तुम्हारी इस नौकरी ने तो हमे खानाबदोश बनाकर रख दिया है। हर तीन चार साल बाद उठाओ समान और चल दो दूसरी जगह । ये भी कोई जिंदगी है?" ...