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अनुराधा - 6
by Sarat Chandra Chattopadhyay verified
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इसीत से तरह पांच-दिन बीत गए। स्त्रियों के आदर और देख-रेख का चित्र विजय के मन में आरंभ से ही अस्पष्ट था। अपनी मां को वह आरंभ से ही ...

सांच कि, झूठ
by Sapna Singh verified
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रंभा ने गोबर के ढे़र में पानी का छींटा मारकर सींचा और उन्हें सानने के लिये अपने दोनों हाथ उसमें घुसेड़ दिये। घिन बर आई, पिछले कुछ वर्षों में ...

अनुराधा - 5
by Sarat Chandra Chattopadhyay verified
  • (8)
  • 78

कलकत्ता से कुछ साग-सब्जी, फल और मिठाई आदि आई थीं। विजय ने नौकर से रसोईघर के सामने टोकरी उतरवाकर कहा, ‘अंदर होंगी जरूर?’ अंदर से मीठी आवाज में उत्तर आया, ...

आखर चौरासी - 19
by Kamal
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फैक्ट्री कैंटीन से जिन्दा बच निकले उन 28 सिक्खों जितने खुशकिस्मत, वे तीन सरदार फैक्ट्री कर्मचारी नहीं थे, जो एक नवंबर की उस काली सुबह अपनी ड्यूटी पर पहुँचे ...

आसपास से गुजरते हुए - 19
by Jayanti Ranganathan verified
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अगले दिन मैं शो देखने नहीं गई। दिन-भर टीवी देखती रही। शाम को कुछ दूर पैदल चली, अकेले में निराशा फिर घर करने लगी। पता नहीं, अब दिल्ली जाकर ...

अनुराधा - 4
by Sarat Chandra Chattopadhyay verified
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  • 71

इस प्रकार में आने के बाद एक पुरानी आराम कुर्सी मिल गई थी। शाम को उसी के हत्थों पर दोनों पैर पसाक कर विजय आंखें नीचे किए हुए चुरुट ...

सैलाब - 17
by Lata Tejeswar renuka verified
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  • 32

कॉलिंग बेल की आवाज से किचन में व्यस्त पावनी ने किचन से बाहर आ कर दरवाजा खोला। सामने बिंदु और उसकी ३ सहेलियाँ खड़ी थी। पावनी आश्चर्य चकित हो ...

अश्लील क्या है.. नज़रिया या कपड़े??
by Roopanjali singh parmar
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एक शब्द है जिस पर अक्सर ही बहुत सारे विचार पढ़ने या सुनने को मिलते हैं.. और वो शब्द है 'अश्लीलता'। अगर चर्चा अश्लीलता पर होगी तो महिलाओं का ...

पल जो यूँ गुज़रे - 21
by Lajpat Rai Garg verified
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अन्ततः मई के द्वितीय सप्ताह की एक खुशनुमा प्रातः ऐसी आई जब शिमला स्थित सभी प्रमुख समाचारपत्रों के सम्वाददाता अपने—अपने कैमरामैन के साथ मशोबरा के ‘मधु—स्मृति विला' के परिसर ...

यूँ ही
by Pranava Bharti
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एक उम्र होती है न जो पीछे जितनी छूटती जाती है, उतनी ही परछाईं की तरफ़ दौड़ लगाती है जैसे ---उसकी उम्र भी शायद कुछ ऎसी ही है ...

छलिया कौन
by Dr. Vandana Gupta
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    सब कहते हैं और हमने भी सुना है कि जिंदगी एक अबूझ पहेली है। जिंदगी के रंग कई रे.…. और सबसे गहरा रंग है प्यार का.... और ...

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 18
by Neelam Kulshreshtha
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जब घरवाले अपने घर आने वाले होतें हैं तो ढेर सी तैयारियाँ करनी होतीं है, कैसी उत्तेजना भरी ख़ुशी मन में रहती है। तब अपनी थकान पर ध्यान नहीं ...

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 17
by Neelam Kulshreshtha
  • (1)
  • 93

यामिनी ने रोती हुई दिल दहलाने जैसा सवाल पूछती सृष्टि को अपने हाथों में जकड़ लिया, नहीं, बिलकुल नहीं, किसने कहा तुमसे कि तुम्हारी मम्मी मर जाएगी ?” उसने ...

आखर चौरासी - 18
by Kamal
  • (3)
  • 48

ऐसा ही एक दृष्य विक्की ने दूसरे माले पर स्थित अपने फूफा के फ्लैट की खिड़की से देखा था। अपने पुर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उस दिन उसे बी.आई.टी. सिन्दरी ...

अतृप्त रिश्ते
by r k lal verified
  • (9)
  • 123

अतृप्त रिश्तेआर 0 के0 लालअरे रुकना जरा,  पहचाना तुमने। प्रभात ने उसे रोकते हुए कहा। शोभा ने भी आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, - "व्हाट ए प्लेज़ेंट सरप्राइज, तुम्हें ...

अनुराधा - 3
by Sarat Chandra Chattopadhyay verified
  • (12)
  • 93

बाबुओं के मकान पर पूरा अधिकार करके बिजय जमकर बैठ गया। उसने दो कमरे अपने लिए रखे और बाकी कमरो में कहचरी की व्यवस्था कर दी। विनोद धोष किसी ...

माँ से ही मायका होता है
by Upasna Siag
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कब्रें विच्चों बोल नी माए दुःख सुःख धी नाल फोल नी माए आंवा तां मैं आमा माए आमा केहरे चावा नाल माँ मैं मुड़ नहीं पैके औणा पेके हुंदे माँवा नाल। सुरजीत बिंदरखिया का यह गीत हस्पताल के जनरल ...

आसपास से गुजरते हुए - 18
by Jayanti Ranganathan verified
  • (3)
  • 92

फ्लाइट डेढ़ घंटे लेट थी। मैं तीन बजे मुंबई एयरपोर्ट पहुंची और रात को दस बजे पुणे। वापसी का सफर ठीक ही था। फ्लाइट में मैंने खाना खा लिया ...

अनुराधा - 2
by Sarat Chandra Chattopadhyay verified
  • (18)
  • 113

विजय शुद्ध विलायती लिबास पहने, सिर पर हैट, मुंह में चुरुट दबाए और जेब में चेरी की घड़ी घुमाता हुआ बाबू परिवार के सदर मकान में पहुंचा। साथ में ...

पगडंडी.
by Pritpal Kaur verified
  • (8)
  • 77

हंस में प्रकाशित स्कूटर की चाबी पकड़ाते समय उसकी अंगुलिओं के बढ़े हुए सुडोल नाखून उसकी हथेली पर छू गए थे. झटका सा लगा जैसे. सारा बदन झनझना उठा. भीतर ...

ब्लाइंड डेट
by Geeta Shri
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वह मुस्कुराने की कोशिश कर रहा है। चेहरे पर स्याह रंगत वह देख समझ सकती है। क्या ईशान भी उसके चेहरे को पढ़ पा रहा है। विदा की बेला ...

आखर चौरासी - 17
by Kamal
  • (0)
  • 32

अवतार सिंह जिस रफ्तार से कार ड्राइव कर रहे थे, उसमें वे सब सुबह छः बजे तक निश्चय ही धनबाद पहुँच जाते। मगर उनकी कार अभी ‘नया मोड़’ ही ...

सैलाब - 16
by Lata Tejeswar renuka verified
  • (4)
  • 56

देखो बिंदु आज कल लड़कियों को अपनी सुरक्षा खुद करना जरूरी हो गया है। वरना हर वक्त माँ, पिताजी या किसी और का साथ रहना मुनासिब नहीं है। आप ...

पल जो यूँ गुज़रे - 20
by Lajpat Rai Garg verified
  • (8)
  • 115

रविवार को जब अनुराग वापस शिमला पहुँचा तो रात के ग्यारह बजने वाले थे। घर में श्रद्धा और जाह्नवी जाग रही थीं, क्योंकि निर्मल ने टेलिफोन पर सूचित कर ...

अनुराधा - 1
by Sarat Chandra Chattopadhyay verified
  • (9)
  • 192

लड़की के विवाह योग्य आयु होने के सम्बन्ध में जितना भी झूठ बोला जा सकता है, उतना झूठ बोलने के बाद भी उसकी सीमा का अतिक्रमण किया जा चुका ...

परिणीता - 12 - अंतिम भाग
by Sarat Chandra Chattopadhyay verified
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  • 155

माँ को लेकर शेखर वापस आ गया, परंतु अभी शादी के दस बाहर दिन शेष थे। दो-तीन दिन व्यतीत हो जाने पर, ललिता सवेरे के समय भुवनेश्वरी के पास बैठी ...

आखर चौरासी - 16
by Kamal
  • (5)
  • 50

आगे को गयी उस भीड़ का जिधर को मुँह था, उधर थोड़ी दूर पर ही वहाँ का छोटा-सा गुरुद्वारा पड़ता था। वही गुरुद्वारा जहाँ हरनाम सिंह बिना नागा रोज ...

आसपास से गुजरते हुए - 17
by Jayanti Ranganathan verified
  • (2)
  • 68

मैं भुनभुनाती हुई कमरे में आ गई। यहां रहने का अब कोई मतलब नहीं। भैया को जो क्रांति करनी हो करें, मुझे नहीं करनी। कमरे में आकर मैं सामान ...

परिणीता - 11
by Sarat Chandra Chattopadhyay verified
  • (16)
  • 161

लगभग एक वर्ष बीता। गुरुचरण बाबू के मुंगेर जाने पर भी स्वास्थय को कोर्इ लाभ न पहुंचा और वह इस संसार को छोड़कर चल दिए। गिरीन्द्र उनको बहुत मानता ...

आधा सुख-आधा चांद
by Rajesh Bhatnagar
  • (6)
  • 144

घड़ी ने रात के बाहर बजा दिये । घड़ी का अलारम टन...टन....टन... करता हुआ बारह बार बोलकर खामोष हो गया और इसी खामोषी के साथ रात का भयावह पहर ...