सर्वश्रेष्ठ सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़ें और PDF में डाउनलोड करें

'कूक' की ज़रूरत
द्वारा Mohit Trendster

नीलिमा पीलीभीत में एक निजी स्कूल की शिक्षिका थी। खाली समय में वह अपने परिवार और सहकर्मियों के साथ “कूक” नाम की एक एनजीओ भी चलाती थी। इस स्वयंसेवी ...

गिनी पिग्स - 1
द्वारा Neelam Kulshreshtha

गिनी पिग्स नीलम कुलश्रेष्ठ (1) [ आजकल सारा विश्व कोरोना वायरस के भय से आक्रांत है। सारे विश्व के वैज्ञानिक प्रयोगशाला में इसे ठीक करने की दवाई व वैक्सीनेशन ...

दो अजनबी और वो आवाज़ - 13
द्वारा Pallavi Saxena

दो अजनबी और वो आवाज़ भाग-13 कुछ देर बाद वहाँ बह रही हवा अपने साथ कुछ पकवानों की महक ले आयी। पोहे जलेबी और गरमा-गरम समोसों की खुशबू ने ...

आओ थेरियों - 1
द्वारा Pradeep Shrivastava
  • 170

आओ थेरियों प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 मनू मैं अक्सर खुद से पूछती हूं कि सारे तूफ़ान वाया पश्चिम से ही हमारे यहां क्यों आते हैं, कोई तूफ़ान यहीं से ...

दास्ताँ ए दर्द ! - 1
द्वारा Pranava Bharti
  • 54

दास्ताँ ए दर्द ! 1    रिश्तों के बंधन, कुछ चाहे, कुछ अनचाहे ! कुछ गठरी में बंधे स्मृतियों के बोझ से तो कुछ खुलकर बिखर जाने से महकी सुगंध से ! ...

ढीठ मुस्कुराहटें... - 2 - अंतिम भाग
द्वारा Zakia Zubairi
  • 74

ढीठ मुस्कुराहटें... ज़किया ज़ुबैरी (2) “अरे भाभी जी, आप!.. नमस्ते।” रानी को बैठक की ओर आते हुए देख कर इन्सपेक्टर खड़ा हो गया। “अच्छा सर जी मैं चला; रिपोर्ट ...

जनाब सलीम लँगड़े और श्रीमती शीला देवी की जवानी - 1
द्वारा PANKAJ SUBEER
  • 40

जनाब सलीम लँगड़े और श्रीमती शीला देवी की जवानी (कहानी पंकज सुबीर) (1) यह कहानी सुने जाने से पहले कुछ जानकारियों से अवगत होने की माँग करती है। उन ...

साँझ का साथी
द्वारा Chaya Agarwal
  • 82

कहानी -   साँझ का साथी-पापा, यह क्या किया आपने ? इतना बड़ा धोखा, वह भी अपने बच्चों के साथ क्यों किया आपने ऐसा? आख़िर क्या कमी थी हमारे प्यार ...

कुबेर - 7
द्वारा Hansa Deep
  • 62

कुबेर डॉ. हंसा दीप 7 दिन निकलते रहे। किशोर था वह। उसे अपनी सही उम्र पता नहीं थी, न ही अपना जन्म दिन पता था। पता भी कैसे होता ...

दरमियाना - 9
द्वारा Subhash Akhil
  • 46

दरमियाना भाग - ९ पापा भी इसी वजह से चले गये । उन्हें भी सबसे रोज कुछ न कुछ सुनना पड़ता था । घर आकर वो भी रोते थे, ...

राय साहब की चौथी बेटी - 19 - अंतिम भाग
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 276

राय साहब की चौथी बेटी प्रबोध कुमार गोविल 19 चाहे अम्मा अब किसी को पहचानें या नहीं पहचानें लेकिन कुछ दिन दोनों बेटियों के साथ रहने पर उनके चेहरे ...

वी आर ईडियट्स
द्वारा Rochika Sharma
  • 70

वी आर ईडियट्स “पापा आप मुझे बस स्टॉप पर छोड़ दीजिये न प्लीज़” रोहन ने अपने शू लेस बांधे और लिफ्ट के बाहर खड़ा हो गया । “अरे ! ...

कौन दिलों की जाने! - 37
द्वारा Lajpat Rai Garg
  • 126

कौन दिलों की जाने! सेंतीस रानी को फ्लैट में रहते हुए लगभग पाँच महीने हो गये थे। यहाँ रहने की समयावधि पूरी होने की अथवा कह लीजिये कि यहाँ ...

आदमखोर - 2 - अंतिम भाग
द्वारा Roop Singh Chandel
  • 68

आदमखोर (2) "लम्बरदार, आप----?" साश्चर्य उसने पूछा. "कौ---कौ----कौन---?" "मैं हूं सरजू, लम्बरदर!" "स----स----स---र---- जू----ग----ग----- जब-----ठण्ड ----है----. लगता है----प्राण निकल----जायेंगे." किसी प्रकार रमेसर सिंह कह पाये. सरजुआ चुप रहा. रमेसर ...

निगरानी
द्वारा Santosh Srivastav
  • 232

निगरानी ट्रेन रवाना होने तक रमाकांत चिंतित थे । पूरी बोगी लगभग खाली, महिला यात्री तो एक भी नहीं। लेकिन उन्होंने बेटी सोनल के सामने अपनी चिंता प्रकट नहीं ...

राय साहब की चौथी बेटी - 18
द्वारा Prabodh Kumar Govil
  • 420

राय साहब की चौथी बेटी प्रबोध कुमार गोविल 18 बस, ये और बाकी था। अब अम्मा को कभी - कभी ये भी ध्यान नहीं रहता था कि वो बहुत ...

ढीठ मुस्कुराहटें... - 1
द्वारा Zakia Zubairi
  • 132

ढीठ मुस्कुराहटें... ज़किया ज़ुबैरी (1) “अरे भई रानी मेरी एड़ी को गुदगुदा क्यों रही हो... क्या करती हो भई... ये क्या हो रहा है... यह गीला गीला क्या है... ...

योगिनी - 17
द्वारा Mahesh Dewedy
  • 130

योगिनी 17 हेमंत और शरत को नींद तो पहले भी नहीं आ रही थी और चाय पीने से जब शीत लगना भी कम हो गया, तो हेमंत ने कथा ...

आदमखोर - 1
द्वारा Roop Singh Chandel
  • 282

आदमखोर (1) भूरे - काले बादलों का समूह अचानक पश्चिमी क्षितिज में उभरने लगा. सरजुआ के हाथ रुक गये. हंसिया नीचे रखकर वह ऊपर की ओर देखने लगा. हवा ...

कौन दिलों की जाने! - 36
द्वारा Lajpat Rai Garg
  • 182

कौन दिलों की जाने! छत्तीस 28 नवम्बर रानी अभी नींद में ही थी कि उसके मोबाइल की घंटी बजी। रानी ने फोन ऑन किया। उधर से आवाज़़ आई — ...

ख़ुशबू का रंग
द्वारा Nasira Sharma
  • 126

ख़ुशबू का रंग परिन्दों के लौटने का मौसम आ गया है। बफ़र् पिघल-पिघल कर पहाड़ों के दामन पर जमा हो गई है और जज्मीन नन्ही-नन्ही हरी कोंपलों से भर ...

दो अजनबी और वो आवाज़ - 12
द्वारा Pallavi Saxena
  • 190

दो अजनबी और वो आवाज़ भाग-12 इस सब से तो अच्छा है, मैं चाहे इस बच्चे के साथ जीऊँ या अकेले, पर शादी कर के बंधनों में बंधने और ...

कुबेर - 6
द्वारा Hansa Deep
  • 104

कुबेर डॉ. हंसा दीप 6 गुप्ता जी के ढाबे पर एक बेरंग चिट्ठी की तरह लौट आया वह। सेठजी को बताया माँ-बाबू के बारे में तो वे भी उदास ...

दरमियाना - 8
द्वारा Subhash Akhil
  • 150

दरमियाना भाग - ८ मैंने हाथ पकड़ कर उसे उठाया और अपने पास सोफे पर बैठा लिया । धीरे-से उसके सिर पर हाथ फेरा और फिर कंधे को थपथपा ...

जीजीविषा - 2
द्वारा KAMAL KANT LAL
  • 106

उसकी जेब में केवल चालिस रुपये बचे थे और बचा था ट्रेन पकड़ने से पहले का बहुत सारा समय. रात होने तक टिकट के लिए क्या जुगत भिड़ाई जाए ...

कतरा भर रूमानियत
द्वारा Dr Vinita Rahurikar
  • 120

कतरा भर रूमानियत घर के सभी कामों से फुरसत पाकर चित्रा ने अपना मोबाईल उठाया और फेसबुक खोलकर बैठ गयी. पहले दोपहर भर समय काटने का साधन उपन्यास, कहानियाँ ...

जीत में हार
द्वारा Annada patni
  • 184

जीत में हार अन्नदा पाटनी अस्पताल में आज मरीज़ कम थे । कॉफ़ी रूम में सब डाक्टर्स कॉफ़ी पीने आ बैठे । कॉफ़ी और बिस्कुट के साथ बात-चीत का ...

ये इश्क न था
द्वारा Prahlad Verma
  • 108

ये इश्क न था एक सामाजिक मुद्दे पर लिखी कहानी है जो एक ऐसी लड़की छाया की है कहानी जों एक लड़के कुलदीप से प्यार करती है लेकिन ...

कच्चा गोश्त - 2 - अंतिम भाग
द्वारा Zakia Zubairi
  • 196

कच्चा गोश्त ज़किया ज़ुबैरी (2) यही सब सोचती मीना घर की ओर चली जा रही थी कि सामने से सब्बो मटकने की कोशिश कर रही थी। मीना के भीतर ...

योगिनी - 16
द्वारा Mahesh Dewedy
  • 152

योगिनी 16 मानिला में तीन दिन से बर्फ़ गिर रही थी- सर्वत्र रजत-श्वेत का साम्राज्य था। अल्मोड़ा जनपद का यह ग्राम पर्यटक स्थलों के सामान्य मार्ग से अलग स्थित ...