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विश्वासघात--(अन्तिम भाग)
द्वारा Saroj Verma
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इधर इन्सपेक्टर अरूण और प्रदीप कुछ देर में नटराज के फार्महाउस जा पहुँचे,उन्होंने मोटरसाइकिल दूर ही खड़ी कर दी ताकि मोटरसाइकिल की आवाज़ से किसी को श़क ना हो ...

अर्थतंत्र
द्वारा rajendra shrivastava
  • 513

कहानी--- अर्थतंत्र                                                       ...

सरहद - 6 - अंतिम भाग
द्वारा Kusum Bhatt
  • 354

6 ‘‘दीदी... तुम्हे पता है जेठा जोगी क्यों आये अचानक,’’ बैजन्ती पीछे मुड़ी-हमारी सासू जी को मिल गये थे वे हरिद्वार में...! जब वे बैसाखी को गंगा नहाने गई ...

दहेज बना अभिशाप
द्वारा Shivani M.R.Joshi
  • 468

एक बहुत पुराने समय की बात है.एक छोटे से गांव में एक छोटा सा परिवार रहता था. परिवार के मुखिया का नाम हरीश जी था और उनकी पत्नी का ...

जानेमन
द्वारा Bhupendra Singh chauhan
  • 447

उर्मि के कदमों में आज तेजी थी।हर दिन से आज 10 मिनट देर से थी वह।सुबह वह भूल ही गयी थी कि आज शुक्रवार है और स्टेशन पर कोई ...

विश्वासघात--भाग(२४)
द्वारा Saroj Verma
  • 768

साधना डाइनिंग टेबल पर नाश्ता लगा चुकी थी,नटराज तैयार होकर आया और नाश्ता करने बैठ गया,उसने आधा नाश्ता खतम ही किया था कि टेलीफोन की घंटी बज पड़ी___     ...

सरहद - 5
द्वारा Kusum Bhatt
  • 426

5 छह महिने खोजते-खोजते बीत चुके थे कभी हरिद्वार, कभी ऋषिकेश, बनारस, गया, हरिद्वार एक-एक आश्रम छान लिया था, गाँव के लोग भी जहाँ तक हो सकता था, खोज ...

विश्वासघात--भाग(२३)
द्वारा Saroj Verma
  • 783

उधर गाँव में,    माँ! बहुत दिन हो गए,मैनें बाबा को टेलीफोनकरके ख़बर नहीं पूछी और जब से लीला बुआ भी गईं हैं,तब से उनसे भी मुलाकात नही हो ...

प्रतिभा का पहलू
द्वारा Ramnarayan Sungariya
  • 486

कहानी--   प्रतिभा का पहलू                                                 ...

अतीत के चलचित्र (10) अन्तिम भाग
द्वारा Asha Saraswat
  • 444

              अतीत के चलचित्र (10)  अंतिम भाग        पूरी रात कुलदीप दर्द से कराहता रहा और मैं भी उसके पास बैठ कर ...

तलाश - 6
द्वारा डा.कुसुम जोशी
  • 579

#तलाश_6गतांक से आगे    पर मन को समझना कौन चाहता है, मन को समझते तो शमित से कोई शिकायत ही नही होती, मैं इन परिस्थिति में भी उनके साथ ...

विश्वासघात--भाग(२२)
द्वारा Saroj Verma
  • 738

दूसरे दिन साधना और मधु दोपहर के खाने पर लीला के घर पहुँचे और उसने सारा वृत्तांत साधना को कह सुनाया,ये सुनकर साधना को एक झटका सा लगा कि ...

सरहद - 4
द्वारा Kusum Bhatt
  • 462

4 संयोग से उस दोपहर ताऊ घर में ही थे, उन्हें जड़ी बूटियों की पहचान थी। गिलोय के डंठल को कूट कर उसमें मिश्री मिला कर छोटी के सूखे ...

खौलते पानी का भंवर - 14 - काँच के सपने (अंतिम भाग)
द्वारा Harish Kumar Amit
  • 312

काँच के सपने बाएं हाथ में उपहार के पैकेट को बड़े ध्यान से पकड़े हुए जब वह घर से निकला तो अंधेरा पूरी तरह छा चुका था. सधे हुए ...

विश्वासघात--भाग(२१)
द्वारा Saroj Verma
  • 864

लीला बुआ आज ही कह रहीं थीं कि अब समय आ गया है कि साधना आण्टी और मधु को सब सच..सच बता देना चाहिए,संदीप बोला।। तो क्या उन दोनों ...

उदास इंद्रधनुष - 1
द्वारा Amrita Sinha
  • 336

उदास इंद्रधनुष                                                           ************ रात के दस बजने वाले थे। कोमल सोने की तैयारी में लगी थी । सिरहाने  पानी की बोतल रख, कमरे की बत्ती ऑफ़ करने ही वाली थीकि मोबाइल बज उठा ।तेज़ गाने वाला कॉलर ट्यून कमरे की श

चैट बॉक्स.… - 6 - अंतिम भाग
द्वारा Anju Choudhary Anu
  • 564

भाग 6 शायद एक दिन मेरे काउन्टर पर किसी पेपर से उसने मेरी बर्थ-डेट देख ली थी तो वही खड़े खड़े उसने बातों में मेरा जन्म का वक़्त भी ...

खौलते पानी का भंवर - 13 - मौत
द्वारा Harish Kumar Amit
  • 306

मौत शाम को दफ़्तर से लौटकर घर आया तो ड्राइंगरूम से आ रही आवाज़ों को सुनकर ही समझ गया कि मंजु आ चुकी है. मंजु यानी मेरी पत्नी वीना ...

विश्वासघात--भाग(२०)
द्वारा Saroj Verma
  • 912

दूसरे दिन कुसुम की रिहर्सल शुरु हुई,बुआ बनने के लिए,नकली विग मँगाई गई,एक चश्मा मँगाया गया और एक सफ़ेद साड़ी भी मँगाई गई,जिसे पहनकर कुसुम तैयार हुई,अब समय था ...

सौतेला
द्वारा padma sharma
  • 510

सौतेला बगीचे में बैठा अनुराग विचारों में खोया हुआ था । पास ही बस्ता रखा हुआ था, रखा हुआ क्या था, बेतरतीबी से पड़ा था। किताबें-कॉपी बस्ते के बाहर ...

सरहद - 3
द्वारा Kusum Bhatt
  • 540

3 ‘‘माँ मैं अब पाठषाला नहीं जाऊँगी... मेरे पेट में बच्चा आ जायेगा.. तुम सब मेरी षादी उस गुन्डे से करा दोगे... मैं नहीं जाऊँगी पाठषाला...’’ टप-टप मेरे गरम ...

विश्वासघात--भाग(१९)
द्वारा Saroj Verma
  • 918

दूसरे दिन प्रदीप को कालेज मे मधु दिखी,मधु का रूपरंग पूरी तरह से बदला हुआ था,उसने आज सादी सी सूती साड़ी पहन रखी थी और लम्बे बालों की चोटी ...

Broken with you... - 7
द्वारा @njali
  • 690

अंजली चलो यहां क्यू बैठी हो अंधेरे में , चलो अभी तो तुमको बागीचे में जाने का वक्त मिला है  "" छोड़ दो तुम अब हमको नगमे दिलाने को, एक ...

चैट बॉक्स.… - 5
द्वारा Anju Choudhary Anu
  • 609

भाग 5 वंदना ने अपनी सिसकियों में बात को जारी रखते हुए कहा, , ...दीदी....मैंने अपने रेप की बात भाभी से करना चाहती थी...पर नहीं कर पाई...भाई को बताना ...

अतीत के चलचित्र (9)
द्वारा Asha Saraswat
  • 390

     अतीत के चलचित्र (9)        रीमा की दीदी रीमा से बहुत बड़ी थी क्योंकि रीमा अपने भाई-बहिनों में सबसे छोटी और दीदी सबसे बड़ी ।जब भी ...

खौलते पानी का भंवर - 12 - दलदल
द्वारा Harish Kumar Amit
  • 294

दलदल वार्षिक परीक्षा के लिए चार दिन पहले भरे अपने एग्जामिनेशन फॉर्म को वह अभी-अभी तीसरी बार अच्छी तरह जाँचकर आया है. फॉर्म देखते वक़्त वीरेन्द्र भी उसके साथ ...

चिता की आग
द्वारा Renu Hussain
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आंटी को पिछली बार अंकल के चौथे पे देखा था। जाने के समय जब मैंने हाथ जोड़कर उनसे विदा ली तो कहने लगीं,”तुम्हारे अंकल भी चले गए रेनू के ...

विश्वासघात--भाग(१८)
द्वारा Saroj Verma
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साधना और मधु की मोटर शक्तिसिंह जी के बँगलें के सामने रूकी,दोनों माँ बेटी ने ड्राइवर से कहा कि पहले दरबान से पूछकर आओ कि ये शक्तिसिंह जी का ...

खौलते पानी का भंवर - 11 - औक़ात
द्वारा Harish Kumar Amit
  • 264

औक़ात बड़ी हीनता-सी महसूस हो रही है उसे. अपना अस्तित्व उसे मखमली चादर पर लगे टाट के पैबंद जैसा लग रहा है. हँसते-मुस्कुराते चेहरे, अभिजात्य मुस्कानें, कीमती कपड़े, जेवर ...

विश्वासघात--भाग(१७)
द्वारा Saroj Verma
  • 780

जब सबने सुना कि साधना बुझी बुझी सी रहती है तो ये सुनकर किसी को अच्छा नहीं लगा,रात को जब लीला और शक्तिसिंह जी अपने कमरें थे तब उनके ...