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पुण्‍य
द्वारा Ramnarayan Sungariya

कहानी--   पुण्‍य                                                     ...

आज़ाद परिंदा - मिस्ड कॉल
द्वारा Mens HUB
  • 60

नरेश एक सरकारी संस्थान में उच्च पद पर कार्यरत है और उसे इस पद पर काम करते हुए तकरीबन 9 वर्ष हो चुके है | उसका अभी तक का ...

सीमारेखा
द्वारा Dr. Vandana Gupta
  • 108

हर व्यक्ति की ज़िंदगी में एक मकसद होता है. बिना मकसद के ज़िन्दगी बेमानी है. ज़िन्दगी को जीना और उसे काटना दोनों अलग बातें हैं. ज़िन्दगी जब बोझ लगने ...

बर्फीली रातों के गुलदस्ते
द्वारा Jayanti Ranganathan
  • 567

शीला शाम को जब लंबी सैर से वापस आई, सामने ही उसे राबर्ट नजर आ गया अपने कुत्ते जीरो के साथ। राबर्ट उसे देख ठिठक गया। शीला ने उसे ...

तीसरे लोग - 8
द्वारा Geetanjali Chatterjee
  • 180

8. न्यूयॉर्क स्मारक के लिए अजनबी शहर नहीं था। उसने स्वयं को एड्स की रोकथाम के अनुसंधान में डुबो दिया | उनकी रिसर्च टीम रोज सोलह-सत्रा घंटे काम कर ...

सुलझे...अनसुलझे - 18
द्वारा Pragati Gupta
  • 150

सुलझे...अनसुलझे भावनात्मक स्पर्श ------------------ आज मेरी मुलाक़ात एक अरसे बाद अपनी बचपन की मित्र लेखा से हुई। सुना था कि उसकी शादी एक बहुत ही धनाढ्य परिवार में हुई ...

लहराता चाँद - 29
द्वारा Lata Tejeswar renuka
  • 126

लहराता चाँद लता तेजेश्वर 'रेणुका' 29 महुआ की स्टेटमेंट से गैंग के कई बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गिरोहे के कुछ बदमाश लोग भाग निकले। महुआ को ...

अपने-अपने कारागृह - 12
द्वारा Sudha Adesh
  • 102

अपने-अपने कारागृह-11  हम सामान लेकर अभी बाहर निकले ही थे कि शैलेश और नंदिता 'वेलकम दीदी एवं जीजा जी 'का फ्लैग लेकर खड़े नजर आए । उन्हें देखते ही शैलेश ...

एक दुनिया अजनबी - 12
द्वारा Pranava Bharti
  • 66

एक दुनिया अजनबी 12 - मृदुला को विभा तबसे जानती है जब से प्रखर का जन्म हुआ था | उन दिनों शर्मा-परिवार किराए पर रहता था | प्रखर के जन्म पर वह उससे ...

मिशन सिफर - 15
द्वारा Ramakant Sharma
  • 78

15. राशिद पूरी तरह तंदुरुस्त हो चुका था। अब उसे कमजोरी भी महसूस नहीं हो रही थी। लेकिन, वह इसे जाहिर नहीं कर रहा था ताकि वह घर में ...

बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब - 12
द्वारा Pradeep Shrivastava
  • 258

भाग - १२ ' जीवन, दुनिया की खूबसूरती देखने का आपका नजरिया क्या है?' 'अब नजरिया का क्या कहूं, मैं जल्द से जल्द सब कुछ बदलना, देखना, चाहती थी। ...

कच्ची डगर....
द्वारा Dr Vinita Rahurikar
  • 201

आज खाना बनाते हुए सीमा के मन में विचारों की तरंगे उठ रही थी रह-रहकर। पिछले कई दिनों से वह देख रही थी उसकी किशोर वय बेटी श्वेता उसके ...

बिटवा आ गवा... लॉकडाउन
द्वारा Sunita Bishnolia
  • 177

    पूनम की रात में जवान होने को आतुर चाँद को एकटक देखती रजनी के देखते ही देखते चाँद आसमान में अपनी आभा बिखरे चुका था। लंबे समय ...

चिराग़-गुल
द्वारा Deepak sharma
  • 231

चिराग़-गुल बहन की मृत्यु का समाचार मुझे टेलीफोन पर मिला. पत्नी और मैं उस समय एक विशेष पार्टी के लिए निकल रहे थे. पत्नी शीशे के सामने अपना अन्तिम ...

काला धन
द्वारा राज कुमार कांदु
  • 177

मैं घर से दूकान की तरफ जा रहा था । सुबह का खुशनुमा मौसम था । सडकों पर शोर शराबा लगभग नहीं होता है । अपनी धुन में चलते ...

कालचक्र
द्वारा श्रुत कीर्ति अग्रवाल
  • 180

कालचक्र उस दिन अचानक आशीष का फोन आया। न जाने कितने समय बाद उसकी आवाज़ कान में पड़ी थी। ये मेरे इकलौते बेटे की आवाज़ थी... उस बेटे की, जिसे ...

इमली की चटनी में गुड़ की मिठास - 7
द्वारा Shivani Sharma
  • 381

भाग-7 चन्द्रेश ने लौटते समय उसकी कार में चलने का आग्रह किया।पहले तो शालिनी झिझकी पर फिर उसे लगा चन्द्रेश के साथ थोड़ा सा और वक्त बिताने को मिल ...

बेनज़ीर - दरिया किनारे का ख्वाब - 11
द्वारा Pradeep Shrivastava
  • 282

भाग - ११ मैं घूमना चाहती थी। खूब देर तक घूमना चाहती थी। रास्ते भर कई बार मैंने बहुत लोगों की तरफ देखा कि, लोग मुझे देख तो नहीं ...

तीसरे लोग - 7
द्वारा Geetanjali Chatterjee
  • 147

7. ट्रैन शायद किसी बड़े जंक्शन पर रुकी थी। किसना की अंतड़ियां मारे भूख और प्यास के सिकुड़ गई थी। जेब में पैसे तो थे, पर उतरने की हिम्मत ...

जगत बा
द्वारा Neelam Kulshreshtha
  • 321

जगत बा [ नीलम कुलश्रेष्ठ ] कुछ बरस पहले मैंने अपने सरकारी घर के पीछे के कम्पाउंड में खुलने वाला दरवाज़ा खोला था, देखा वे हैं -बा, दो कपडों ...

सुलझे...अनसुलझे - 17
द्वारा Pragati Gupta
  • 159

सुलझे...अनसुलझे बेशकीमती रिश्ते -------------------- ‘छोटे बच्चों को मनाना कितना आसान होता है न मैडम| ज्यों-ज्यों ये बच्चे बड़े होते जाते है, उतना ही इनको मनाना मुश्किल का सबब बनता ...

लता सांध्य-गृह - 8
द्वारा Rama Sharma Manavi
  • 123

      पूर्व कथा जानने के लिए पिछले अध्याय अवश्य पढ़ें।   आठवां अध्याय-----------------  गतांक से आगे….  ---------------   शोभिता की कक्ष साथी थीं विमलेश जी,पैंसठ वर्षीया, रिटायर्ड प्रधानाध्यापिका।   स्नातक ...

लहराता चाँद - 28
द्वारा Lata Tejeswar renuka
  • 180

लहराता चाँद लता तेजेश्वर 'रेणुका' 28 कुछ महीने बीत गए। अनन्या अपनी जिंदगी में व्यस्त हो गई। अवन्तिका के कॉलेज में आखिरी साल भी खत्म हो चुका था। महुआ ...

मिशन सिफर - 14
द्वारा Ramakant Sharma
  • 105

14. पता नहीं वह कितनी देर तक सोता रहा था। खिचड़ी लेकर आई नुसरत ने ही उसे उठाया था और पूछा था – “अब कैसा लग रहा है?” “बुखार ...

एक दुनिया अजनबी - 11
द्वारा Pranava Bharti
  • 102

एक दुनिया अजनबी 11- एक झौंका जीवन की दिशा पलट देता है, पता ही नहीं चलता इंसान किस बहाव में बह रहा है| आज जिस पीने-पिलाने को एक फ़ैशन समझा जाता ...

पत्थर की मूरत
द्वारा राज कुमार कांदु
  • 264

छमाही इम्तिहान के नतीजे घोषित हो चुके थे । कमल को सत्तर प्रतिशत अंक मिले थे । अपने इस प्रदर्शन से वह स्वयं ही काफी निराश था । लेकिन ...

आ अब लौट चलें
द्वारा Abdul Gaffar
  • 861

आ अब लौट चलें। (कहानी)लेखक - अब्दुल ग़फ़्फ़ार उस समय मैं दिल्ली में पढ़ाई कर रहा था जब धर्मा के मरने की ख़बर मिली। उसे गेहुअन सांप ने डंस लिया था। ...

अपने-अपने कारागृह - 11
द्वारा Sudha Adesh
  • 183

अपने-अपने कारागृह-10  थोड़ी ही देर में ही अपनी जगह पर आकर विमान रुक गया ,.। विमान का गेट खुलते ही यात्री एक-एक करके उतरने लगे । गेट पर परिचारिका हाथ ...

मिरगी
द्वारा Deepak sharma
  • 246

मिरगी उस निजी अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग का चार्ज लेने के कुछ ही दिनों बाद कुन्ती का केस मेरे पास आया था| “यह पर्ची यहीं के एक वार्ड बॉय ...

नई दिशा
द्वारा Sudha Adesh
  • 138

नई दिशा     ‘ मेरी मृत्यु के पश्चात् मेरा शरीर दान कर दिया जाये ।’ अमित शंकर की इस कथन को सुनकर जहाँ सचिन तथा चेतना अवाक् रह गये वहीं ...