सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • दादी की सीख

    प्रियांशी मधु नगर में अपनी दादी कमला के साथ रहती थी। उसके परिवार में कमला के अला...

  • मेहनत का फल

    सुमन एक छोटे से गाँव (रामपुरा) में अपने माता पिता और  चार साल के भाई अरुण के साथ...

  • कैन्टीन की यादें

    कैन्टीन की यादेंलेखक: विजय शर्मा एर्रीस्कूल की घंटी बजते ही पूरा मैदान बच्चों से...

बांसुरी की धुन - भाग 4 By prem chand hembram

रामलाल की पहली वाणी"जयगुरु..."रामलाल के मुँह से निकला यह एक शब्द पूरे प्रांगण में जैसे ठहर गया।उसने सामने बैठे लोगों की ओर देखा। सैकड़ों आँखें उसी पर टिकी थीं।उसके हाथ काँप रहे थे।...

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वास्तविक चाबी By Vijay Erry

वास्तविक चाबीरामपुर की पुरानी हवेली में समय जैसे ठहर गया था। मोटी दीवारें, लकड़ी की नक्काशीदार छतें, आँगन में बरगद का पेड़ और ऊपरी मंजिल पर रखा लोहे का विशाल संदूक—ये सब पिछले पचास...

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दादी की सीख By Krishna singh

प्रियांशी मधु नगर में अपनी दादी कमला के साथ रहती थी। उसके परिवार में कमला के अलावा कोई नहीं था। कमला लकड़ी के खिलौने बना कर बेचती थी जिससे उन दोनों का खर्च चल रहा था।प्रियांशी अपनी...

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मेहनत का फल By Krishna singh

सुमन एक छोटे से गाँव (रामपुरा) में अपने माता पिता और  चार साल के भाई अरुण के साथ रहती थी। सुमन दसवीं कक्षा की विद्यार्थी थी अरुण दूसरी कक्षा में पढ़ता था और दोनों बहन भाई  पढ़ने मे...

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राहें - 18 By shiromani mathur

दीदीशीला ससूराल में बैठी पुत्र रघु को दूध पिला रही थी। उसेअपनी छोटी बहन की शादी की याद हो आयी कल उसकी भी शादीहै। उसकी खुद की शादी के बाद मायके में पहली शादी छोटी बहनप्रज्ञा की शादी...

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बच्चों ने मुझे जीना सिखाया By Chandni choudhary

बच्चों ने मुझे जीना सिखाया“दीदी-दीदी! हम सब आ गए। देखो दीदी, आज हम सब जल्दी आ गए, क्योंकि हमें आपके पास रहना अच्छा लगता है। आप हमसे कितना स्नेह करती हैं।”मैंने मुस्कुराकर कहा, “बिल...

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कैन्टीन की यादें By Vijay Erry

कैन्टीन की यादेंलेखक: विजय शर्मा एर्रीस्कूल की घंटी बजते ही पूरा मैदान बच्चों से भर जाता था। एक तरफ कक्षाओं की कतारें लग जाती थीं, दूसरी तरफ वो छोटा-सा कमरा जहाँ से हमेशा कोई न कोई...

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आलसी रामू By prem chand hembram

आलसी रामूएक छोटे-से गाँव में रामू नाम का एक आदमी रहता था। शरीर से वह हट्टा-कट्टा और मजबूत था, मगर आलस्य ने उसकी सारी शक्ति पर जैसे ताला लगा दिया था।काम से उसे ऐसी चिढ़ थी मानो मेहन...

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मौन: आत्मा की सबसे गहरी आवाज़ By Chandni choudhary

मौन : आत्मा की सबसे गहरी आवाज़जीवन का एक ऐसा समय भी आया, जब परिस्थितियों ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया। चारों ओर लोगों की भीड़ थी, पर मेरे भीतर गहरा सन्नाटा था। धीरे-धीरे मैंने बोलना...

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बचपन की यादें By Vijay Erry

बचपन की यादेंलेखक: विजय शर्मा एरीगाँव की संकरी कच्ची गलियाँ, मिट्टी की मीठी खुशबू, तालाब किनारे की ठंडी हवा और आम के पेड़ों से झरती धूप—यही मेरी दुनिया थी। जब आँखें बंद करता हूँ तो...

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खोटा सिक्का - 5 By prem chand hembram

खोटा सिक्काशिबू धीरे-धीरे अपने आसन से उठा। उसने एक बार चारों ओर बैठे लोगों पर दृष्टि डाली। सामने चौधरी चाचा, सतीश ओझा, कमरुद्दीन मियाँ, सपन मिश्रा, सुनील झा और गाँव के अन्य बुज़ुर्...

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सौतन की सौतन By archana

"कहते हैं... दुनिया में सबसे मज़बूत रिश्ता दो बहनों का होता है। एक बहन दूसरी बहन के लिए अपनी जान तक देने को तैयार रहती है। लेकिन अगर वही बहन... आपकी सौतन बन जाए... तो सोचिए उस दर्द...

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भाविका-भावेश By Yogesh Kanava

अचानक लग झटके साथ भावेश की तन्द्रा टूटी । वो लैण्ड कर चुके थे अहमदाबाद में । यहाँ से उसे जयपुर के लिए दूसरी लिंक फ्लाइट पकड़नी थी । अभी उसे तीन घण्टे तो अहमदाबाद एयरपोर्ट पर गुज़ारने...

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ठूँठ हो चुकी संवेदनाएं By Yogesh Kanava

बात सन् 1977 की है देश में आपातकाल ख़त्म हो चुका था और जनता पार्टी भारी बहुमत से जीतकर सरकार बना चुकी थी । कांग्रेस की बहुत ही बुरी तरह से हार हुई थी । तत्कालीन प्रधानमंत्री सहित कई...

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रोटी, कपड़ा, मकान... और धरती की आख़िरी पुकार By Skp divine

# **रोटी, कपड़ा, मकान... और धरती की आख़िरी पुकार**## *एक भावनात्मक कहानी*सुबह की पहली किरण अभी-अभी गाँव की पगडंडी पर उतरी थी। ओस की बूँदें घास पर मोतियों की तरह चमक रही थीं। आम के...

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अपनी ज़िंदगी की तुलना करना छोड़ दीजिए. By Madhavi Tripathi

अपनी ज़िंदगी की तुलना करना छोड़ दीजिएजिस दिन आप तुलना करना छोड़ देते हैं, उसी दिन सचमुच जीना शुरू कर देते हैं।आज की शुरुआत किसी बड़ी घटना से नहीं हुई।बस यूँ ही सोशल मीडिया देख रहा...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त - 22 By ALLA NOOR KHAN

अध्याय 22 पांच दिलों का जागरणइस समय राघव जोशी जमीन पर घुटनों के बल बैठ चुका था। उसका सिर झुका हुआ था, और उसके कंधे समय-समय पर कांप रहे थे। बेशक विराज ने उसकी पिटाई नहीं लगाई थी, फि...

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एक घरवाली, चार बाहरवाली By sukhvinder Singh Rai

### **धोखेबाज़ राहुल: एक घरवाली, कई बाहरवाली** ️शाम के ढलते सूरज की नारंगी रोशनी दिल्ली के उस शांत पार्क के बेंच पर बैठे राहुल और सिमरन के चेहरों पर पड़ रही थी। हवा में हल्की सी ठं...

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एक जोड़ी चप्पल By prachi Gurjar

       एक जोड़ी चप्पल🩴            लेखिका            प्राची गुर्जरलेखिका की ओर सेकुछ कहानियाँ लिखी नहीं जातीं, वे चुपचाप हमारे भीतर जन्म लेती हैं।इस कहानी का बीज भी मुझे किसी पुस्तक...

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पवित्र बहु - 17 By archana

एपिसोड – पहली बार स्कूटीसुबह का समय था।दिव्यम ने बाहर से आवाज़ लगाई,"चित्रा... जल्दी तैयार हो जाओ।"चित्रा बाहर आई तो देखा, दिव्यम स्कूटी के पास खड़ा मुस्कुरा रहा था।"कहाँ जाना है?"...

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धर्मराज की सभा - 2 By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभा (आगे)चित्रगुप्त की वाणी समाप्त होते ही समूची देवसभा मौन हो गई। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं काल भी अगले क्षण की प्रतीक्षा कर...

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एक दीपक जो कभी बुझा नहीं By Skp divine

---### अध्याय 1 : छोटा सा सपनाओडिशा के एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक लड़का रहता था। मिट्टी की दीवारों और खपरैल की छत वाले घर में उसका परिवार बड़ी मुश्किल से अपना जीवन गुजारता थ...

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समय के पंख और पिता की सीख By Anant Dhish Aman

बचपन की स्मृतियाँ अक्सर जीवन के किसी मोड़ पर अचानक लौट आती हैं और फिर मन को उन गलियों में ले जाती हैं जहाँ से हमारे व्यक्तित्व की यात्रा शुरू हुई थी।आज जब मैं अपने जीवन के अनेक उता...

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मैं पेड़ बनना चाहती हूँ By prachi Gurjar

शहर की सबसे ऊँची इमारत की 12वीं मंज़िल पर मेरा कमरा था। खिड़की से सिर्फ़ कंक्रीट, शोर और भागती हुई गाड़ियाँ दिखती थीं।  नाम है मीरा। उम्र 26। नौकरी, डेडलाइन, बॉस की डाँट  सब था। बस...

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यादगार रायबरेली यात्रा By Sudhir Srivastava

संस्मरण यादगार रायबरेली यात्रा (पुस्तक विमोचन, कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह)      रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच का प्रथम भव्य राष्ट्रीय आयोजन दिनांक 5 मई को 'कलश उत्सव लान&#39...

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बांसुरी की धुन - भाग 4 By prem chand hembram

रामलाल की पहली वाणी"जयगुरु..."रामलाल के मुँह से निकला यह एक शब्द पूरे प्रांगण में जैसे ठहर गया।उसने सामने बैठे लोगों की ओर देखा। सैकड़ों आँखें उसी पर टिकी थीं।उसके हाथ काँप रहे थे।...

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वास्तविक चाबी By Vijay Erry

वास्तविक चाबीरामपुर की पुरानी हवेली में समय जैसे ठहर गया था। मोटी दीवारें, लकड़ी की नक्काशीदार छतें, आँगन में बरगद का पेड़ और ऊपरी मंजिल पर रखा लोहे का विशाल संदूक—ये सब पिछले पचास...

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दादी की सीख By Krishna singh

प्रियांशी मधु नगर में अपनी दादी कमला के साथ रहती थी। उसके परिवार में कमला के अलावा कोई नहीं था। कमला लकड़ी के खिलौने बना कर बेचती थी जिससे उन दोनों का खर्च चल रहा था।प्रियांशी अपनी...

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मेहनत का फल By Krishna singh

सुमन एक छोटे से गाँव (रामपुरा) में अपने माता पिता और  चार साल के भाई अरुण के साथ रहती थी। सुमन दसवीं कक्षा की विद्यार्थी थी अरुण दूसरी कक्षा में पढ़ता था और दोनों बहन भाई  पढ़ने मे...

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राहें - 18 By shiromani mathur

दीदीशीला ससूराल में बैठी पुत्र रघु को दूध पिला रही थी। उसेअपनी छोटी बहन की शादी की याद हो आयी कल उसकी भी शादीहै। उसकी खुद की शादी के बाद मायके में पहली शादी छोटी बहनप्रज्ञा की शादी...

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बच्चों ने मुझे जीना सिखाया By Chandni choudhary

बच्चों ने मुझे जीना सिखाया“दीदी-दीदी! हम सब आ गए। देखो दीदी, आज हम सब जल्दी आ गए, क्योंकि हमें आपके पास रहना अच्छा लगता है। आप हमसे कितना स्नेह करती हैं।”मैंने मुस्कुराकर कहा, “बिल...

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आलसी रामू By prem chand hembram

आलसी रामूएक छोटे-से गाँव में रामू नाम का एक आदमी रहता था। शरीर से वह हट्टा-कट्टा और मजबूत था, मगर आलस्य ने उसकी सारी शक्ति पर जैसे ताला लगा दिया था।काम से उसे ऐसी चिढ़ थी मानो मेहन...

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मौन: आत्मा की सबसे गहरी आवाज़ By Chandni choudhary

मौन : आत्मा की सबसे गहरी आवाज़जीवन का एक ऐसा समय भी आया, जब परिस्थितियों ने मुझे भीतर तक झकझोर दिया। चारों ओर लोगों की भीड़ थी, पर मेरे भीतर गहरा सन्नाटा था। धीरे-धीरे मैंने बोलना...

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बचपन की यादें By Vijay Erry

बचपन की यादेंलेखक: विजय शर्मा एरीगाँव की संकरी कच्ची गलियाँ, मिट्टी की मीठी खुशबू, तालाब किनारे की ठंडी हवा और आम के पेड़ों से झरती धूप—यही मेरी दुनिया थी। जब आँखें बंद करता हूँ तो...

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खोटा सिक्का - 5 By prem chand hembram

खोटा सिक्काशिबू धीरे-धीरे अपने आसन से उठा। उसने एक बार चारों ओर बैठे लोगों पर दृष्टि डाली। सामने चौधरी चाचा, सतीश ओझा, कमरुद्दीन मियाँ, सपन मिश्रा, सुनील झा और गाँव के अन्य बुज़ुर्...

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सौतन की सौतन By archana

"कहते हैं... दुनिया में सबसे मज़बूत रिश्ता दो बहनों का होता है। एक बहन दूसरी बहन के लिए अपनी जान तक देने को तैयार रहती है। लेकिन अगर वही बहन... आपकी सौतन बन जाए... तो सोचिए उस दर्द...

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ठूँठ हो चुकी संवेदनाएं By Yogesh Kanava

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रोटी, कपड़ा, मकान... और धरती की आख़िरी पुकार By Skp divine

# **रोटी, कपड़ा, मकान... और धरती की आख़िरी पुकार**## *एक भावनात्मक कहानी*सुबह की पहली किरण अभी-अभी गाँव की पगडंडी पर उतरी थी। ओस की बूँदें घास पर मोतियों की तरह चमक रही थीं। आम के...

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सूर्यकुल का सूर्यास्त - 22 By ALLA NOOR KHAN

अध्याय 22 पांच दिलों का जागरणइस समय राघव जोशी जमीन पर घुटनों के बल बैठ चुका था। उसका सिर झुका हुआ था, और उसके कंधे समय-समय पर कांप रहे थे। बेशक विराज ने उसकी पिटाई नहीं लगाई थी, फि...

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एक घरवाली, चार बाहरवाली By sukhvinder Singh Rai

### **धोखेबाज़ राहुल: एक घरवाली, कई बाहरवाली** ️शाम के ढलते सूरज की नारंगी रोशनी दिल्ली के उस शांत पार्क के बेंच पर बैठे राहुल और सिमरन के चेहरों पर पड़ रही थी। हवा में हल्की सी ठं...

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एक जोड़ी चप्पल By prachi Gurjar

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एपिसोड – पहली बार स्कूटीसुबह का समय था।दिव्यम ने बाहर से आवाज़ लगाई,"चित्रा... जल्दी तैयार हो जाओ।"चित्रा बाहर आई तो देखा, दिव्यम स्कूटी के पास खड़ा मुस्कुरा रहा था।"कहाँ जाना है?"...

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धर्मराज की सभा - 2 By prem chand hembram

धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभा (आगे)चित्रगुप्त की वाणी समाप्त होते ही समूची देवसभा मौन हो गई। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं काल भी अगले क्षण की प्रतीक्षा कर...

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---### अध्याय 1 : छोटा सा सपनाओडिशा के एक छोटे से गाँव में आरव नाम का एक लड़का रहता था। मिट्टी की दीवारों और खपरैल की छत वाले घर में उसका परिवार बड़ी मुश्किल से अपना जीवन गुजारता थ...

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समय के पंख और पिता की सीख By Anant Dhish Aman

बचपन की स्मृतियाँ अक्सर जीवन के किसी मोड़ पर अचानक लौट आती हैं और फिर मन को उन गलियों में ले जाती हैं जहाँ से हमारे व्यक्तित्व की यात्रा शुरू हुई थी।आज जब मैं अपने जीवन के अनेक उता...

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मैं पेड़ बनना चाहती हूँ By prachi Gurjar

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यादगार रायबरेली यात्रा By Sudhir Srivastava

संस्मरण यादगार रायबरेली यात्रा (पुस्तक विमोचन, कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह)      रायबरेली काव्य रस साहित्य मंच का प्रथम भव्य राष्ट्रीय आयोजन दिनांक 5 मई को 'कलश उत्सव लान&#39...

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