हिंदी किताबें, कहानियाँ व् उपन्यास पढ़ें व् डाऊनलोड करें PDF

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 2
by Neelam Kulshreshtha
  • (3)
  • 42

कावेरी को जयपुर अपने घर आये उन्नीस बीस दिन हो चुके हैं लेकिन ऐसा लगता है दिल व घर दोनों खंडहर बन गये हैं। । एक जानलेवा सूनेपन का ...

वसीयत
by Namita Gupta
  • (12)
  • 101

        रेखा घर के कामों में व्यस्त थी । तभी बाहर बड़ी तेजी से कोलाहल उठा । लगता आज फिर किसी के यहां कुछ झगड़ा हो ...

रिश्ता प्यार का
by Savita Mishra
  • (3)
  • 45

“घर में अकेले परेशान हो जाती हूँ | न आस न पड़ोस | न नाते रिश्तेदार |”“सुबह-शाम तो मैं रहता ही हूँ न !”“हुह ..सुबह जल्दी भागते हो और देर ...

पश्चाताप - 1
by Meena Pathak
  • (7)
  • 113

अमिता फूट फूट कर रो रही थी अब उसे अपने किये पर पश्चाताप हो रहा था शायद उसे उन बुजुर्गों की हाय लगी थी जिसे ...

उदास क्यों हो निन्नी...? - 2
by प्रियंका गुप्ता
  • (1)
  • 20

आज सोचती हूँ, उस दिन अनुज दा मुझे समझाते तो शायद एक अनजान रास्ते पर यूँ बढ़ते मेरे कदम रुक गए होते, पर अनुज दा की ज़बान पर ताला ...

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 1
by Neelam Kulshreshtha
  • (0)
  • 30

``ऑनलाइन जर्नलिस्ट अवॉर्ड गोज़ टु प्रिशा पटेल फ़ॉर हर राइट अप `यूज़ ऑफ़ सेनेटरी नेपकिन्स एन्ड हाइजीन इन वीमन ऑफ़ विलेजेज़। ``शी मीडिया के पुरस्कार समारोह में घोषणा होती ...

दूसरी का चक्कर
by r k lal
  • (28)
  • 258

“दूसरी का चक्कर” आर 0 के 0 लाल           उनके घर के सामने बड़ी भीड़ लगी  हुई थी। सभी लोग इंतजार कर रहे थे कि चंदन की बॉडी ...

आसपास से गुजरते हुए - 2
by Jayanti Ranganathan
  • (2)
  • 23

रात के बारह बजने को थे। मैंने फुर्ती से अलमारी से वोद्का की बोतल निकाली और दोनों के लिए एक-एक पैग बना लिया, ‘नए साल का पहला जाम, मेरी ...

दस दरवाज़े - 18
by Subhash Neerav
  • (4)
  • 34

ऊषा के जाने के बाद घर जैसे खाली खाली सा हो गया हो। इतना खाली तो यह पहली पत्नी जगीरो के जाने के बाद भी नहीं हुआ था। ऊषा ...

अदृश्य हमसफ़र - 30 - अंतिम भाग
by Vinay Panwar
  • (10)
  • 62

रास्ते भर भैया और ममता चुपचाप रहे। दोनो को कुछ सूझ ही नही रहा था कि बात करें भी तो क्या। बीच बीच में एक दूसरे की तरफ देखकर बस ...

उर्फ देवीजी
by Geeta Shri
  • (2)
  • 46

सिकुड़ी चमड़ी वाली लंबी-चौड़ी हथेली एक छोटे से गोल मुंह पर है। थोड़ी गंध से भरी महकती। फिर दूध-सी सफेद आंखों की आकर्षक पुतलियों की मासूमियत में थोड़ा डर ...

... कि हरदौल आते हैं
by Manish Vaidya
  • (3)
  • 21

हम विस्मय से सुनते हैं साँस थामकर। रात की ख़ामोशी को तोड़ते हुए दूर कहीं से मामी की आवाज़ गिरती है। वह काँच की तरह गिरती है और किरच-किरच ...

खुशियों की आहट - 6
by Harish Kumar Amit
  • (2)
  • 35

दोपहर बाद मोहित स्कूल से वापिस आया तो उसका मुँह उतरा हुआ था. उसका मैथ्स का टैस्ट कुछ ख़ास अच्छा नहीं हुआ था. दो-तीन प्रश्न तो वही आए थे, ...

पल जो यूँ गुज़रे - 4
by Lajpat Rai Garg
  • (4)
  • 41

इकतीस जुलाई को निर्मल ने कोचग कोर्स बीच में ही छोड़कर वापस चण्डीगढ़ जाना था, बल्कि यह कहना अध्कि उपयुक्त होगा कि निर्मल ने कोर्स के लिये इकतीस जुलाई ...

लोभिन - 3
by Meena Pathak
  • (21)
  • 205

गर्मियों के दिन थे दोनों जेठानियाँ बच्चों के साथ मायके गयीं थीं घर में बस सास-ससुर और नौकर-चाकर थे पति तो रात के ...

उदास क्यों हो निन्नी...? - 1
by प्रियंका गुप्ता
  • (3)
  • 42

आज पूरे बारह साल बाद इस कमरे के उस खुले हिस्से पर बैठी हूँ, जिसके लिए बरसों बाद भी कोई सही शब्द नहीं खोज पाई...। कुछ-कुछ छज्जे जैसा, पर ...

दस दरवाज़े - 17
by Subhash Neerav
  • (3)
  • 36

एक दिन करमजीत का फोन आता है - “कैसे भाई, लगाए जाता है?” “और अब क्या करूँ।” “कोई शिकायत तो नहीं?” “शिकायत तो कोई नहीं, पर कब तक रहेगी ये?” “जब कोई शिकायत ही ...

अदृश्य हमसफ़र - 29
by Vinay Panwar
  • (8)
  • 51

ममता के मन में शांति थी कि चलो कुछ ज्यादा हंगामा नहीं हुआ था। बड़े भैया के सामने बात हुई तो चिल्लपों कुछ ज्यादा नही मची थी। व्यापार के ...

अम्मा की पेंशन
by r k lal
  • (20)
  • 124

“ अम्मा की पेंशन” आर 0 के 0 लाल     अम्मा कई दिनों से कह रही थी जरा मिथुन को कह दो कि आते समय मेरे लिए मेहंदी ...

आसपास से गुजरते हुए - 1
by Jayanti Ranganathan
  • (3)
  • 33

मुझे पता चल गया था कि मैं प्रेग्नेंट हूं। मैं शारीरिक रूप से पूरी तरह सामान्य थी। ना शरीर में कोई हलचल हो रही थी, ना मन में। मैं ...

खुशियों की आहट - 5
by Harish Kumar Amit
  • (5)
  • 39

मोहित का अंदाज़ा ग़लत निकला. चाय-नाश्ते के बाद मोहित ने कुमुद आंटी को अपनी कविताएँ सुनाईं. फिर मम्मी कपड़े बदलकर नए सिरे से तैयार होने में लग गईं. मोहित ...

राखी
by Priya Vachhani
  • (7)
  • 56

साँझ का वक्त एक तरफ सूरज डूबने को था दूसरी तरफ चाँद अपनी चाँदनी बिखेरने को तैयार था। तारे भी टिमटिमाते हुए अपनी मौजूदगी का अहसास करा रहे थे। ...

पल जो यूँ गुज़रे - 3
by Lajpat Rai Garg
  • (5)
  • 52

रविवार आम दिनों जैसा दिन। खुला आसमान, सुबह से ही चमकती ध्ूप। फर्क सिर्फ इतना कि आज कोचग क्लास में जाने का कोई झंझट नहीं था, फिर भी जल्दी तैयार ...

दस दरवाज़े - 16
by Subhash Neerav
  • (5)
  • 53

हमारे घर में पहला बच्चा होने वाला है। अंजू हर समय भयभीत-सी रहती है। उसको वहम है कि कोई अनहोनी ही न हो जाए। छोटी-सी तकलीफ़ को बड़ी बनाकर ...

अदृश्य हमसफर - 28
by Vinay Panwar
  • (11)
  • 108

चाय खत्म होते ही देविका ने ट्रे उठाकर उठाई और बिना कुछ कहे ही कमरे से चली गयी लेकिन दो पल बाद ही वापस आयी। देविका- जिज्जी, कैसे सब ...

लोभिन - 2
by Meena Pathak
  • (23)
  • 181

उस दिन भी सुधा रो रही थी कि तभी गेट खटका उसने जा कर दरवाजा खोला तो देखा उसका जीजा मनोहर खड़ा था उसने भीतर ...

नाम में क्या रखा है...
by प्रियंका गुप्ता
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शाम के साढ़े छः बजे थे। वो बस अभी ही कमरे में घुसी थी। पूरा दिन कितना तो थकान भरा रहता है, पहले ऑफ़िस की चकपक से जूझो, फिर ...

अफेयर्स का कन्फेशन
by r k lal
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  • 151

“अफेयर्स का कन्फेशन” आर 0 के 0 लाल      शादी के बाद प्रथम मिलन की रात में पूर्णिमा चारपाई पर बैठी घूंघट के भीतर से अपने हसबैंड अनुज ...

दस दरवाज़े - 15
by Subhash Neerav
  • (4)
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उसके जन्मदिन पर मैं उसको उसके घर से लेने जाता हूँ। वह सचमुच चीनी ड्रैस पहनकर आती है। मैं उसकी तरफ देखता रह जाता हूँ। वह अपना पीले रंग ...

अदृश्य हमसफ़र - 27
by Vinay Panwar
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  • 89

दोनो ही काफी देर तक एक दूसरे के गले लगी खड़ी रही। अंततः ममता ने ही देविका को खुद से अलग कर जाकर सोने को कहा। ममता- देविका जाकर सो ...