कविता कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Poems in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultures. Th...Read More


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कुछ ना करो By Yasho Vardhan Ojha

पटनहिया पंक्तियां (बिहार की राजधानी पटना का पूर्वी हिस्सा पटना सिटी के नाम से जाना जाता है। पटना जंक्शन से १० किलोमीटर दूर पटना सिटी स्टेशन है जिसे अब तख्त श्री हरमंदिर साह...

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इन्तजार By Kishanlal Sharma

दूरबहुतचला आया हूंतुझसेलेकिनअकेला नहीं आयातेरी यादेंअपनेसाथ लाया हूूंदूरबहुतचला आया हूंतुझसेसीमा परखडा होता हूूंजबदेश का प्रहरीबनकरदूरजहां तकनजर जाती हैरेगिस्तान मेकोई नजर नही आतास...

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महाराणा प्रताप भाग-(१) - परिचय व खानवा का युद्घ । By Suman Lata Singh

प्रथम नमन माँ शारदे,करो कंठ में वास ।कृपा-दृष्टि करो दीन पर,कर दो तम का नाश ।।है विघ्न- विनाशी,गणनायक,गौरीसुत मुझ पर दृृष्टि करो ।फूले ना फसल कभी तम की,ऐसी .प्रकाश की वृष्टि करो ।...

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ज़िन्दगी गले लगा ले तू By Mukteshwar Prasad Singh

जिन्दगी गले लगा ले तूख़ामोशी के आग़ोश में समाती दुनियाँ कहीं माँ -बाप तो कहीं कराहती मुनियांराष्ट्रीय नहीं अन्तर्राष्ट्रीय भय सिसकियाँ देश देश लांघती मौत से लड़ती ज़िन्दगियाँ हर चे...

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दर्द भरा दिल.. By Parmar Geeta

नमस्कार दोस्तों मेरी रचनाओं को पढ कर अपने किमती अभिप्राय अवश्य दें। और यदि कोई शति हुई हो तो भी मेरा योग्य मार्गदर्शन करें। आपकी दोस्त - गीता परमार.. ******"मेरे दिल केे अल्फाज़...

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मासूम गंगा के सवाल - 7 - अंतिम भाग By Sheel Kaushik

मासूम गंगा के सवाल (लघुकविता-संग्रह) शील कौशिक (7) नाम की डुबकी ***** पाप और पुण्य की अवधारणाओं से दूर गंगा की दिव्य अनुभूति से अभिभूत हो लगा ली एक डुबकी उन सभी के नाम की जो आ नहीं...

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शब्द क्या है ? शब्द कौन है ? By Rohit Shabd

शब्द क्या है ? शब्द कौन है ? जीवन को जीवंत होकर देखना शुरू करें "जगत मिथ्या ब्रह्म सत्य" यह सिर्फ एक विचार नहीं है यह अनुभव से भरा हुआ सत्य है जिसे प्रमाणित करते योग पुरुष है। "मै...

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में ओर मेरे अहसास - 7 By Dr Darshita Babubhai Shah

में ओर मेरे अहसास भाग-७ घर में सब कैद है लोग मेरे शहर के lपिंज मे बंध है लोग मेरे शहर के ll साँस लेने से भी डर गया है इन्सांन lदेख के दंग है लोग मेरे शहर के ll जिंदा रहने की कोई व...

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अलफ़ाज़-ए-आवाज़ By Deepak Bundela Arymoulik

ना फ़िक्र हैं ना फ़क्र हैं... !तन्हाइयों में तिरा ज़िक्र हैं... !!----------------------------------------वो गुज़रे ज़माने भी क्या याद आते हैं... !अब लोग मुझें मुड़ मुड़ कर देख चले जाते ह...

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फौजी सी मौत By अर्चना यादव

मृत्यु सभी की आनी एक दिन पर आए ऐसी हे भगवान मैं सोया रहूँ पुष्प सेज पर रो रहा हो सारा जहान... जब से मैंने होश संभाला गरीबी देखी कंगाली देखी दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी और भंगारी...

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एक छोटी सी दुनिया ! By SARWAT FATMI

एक छोटी सी दुनिया ! वो सपना हैँ या मेरा अपना कुछ बातें करूँ या बस निहारु उसे अब कैसे बताऊँ के एक पल भी तेरे बिना गुज़रता नहीं अब बस बना लो अपनी दुल्हन हैँ ये एक कोशिश के दूर ना हो ज...

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क्या है जिंदगी - 2 By Rohit Shabd

क्या है जिंदगी? (2) 55 जिंदगी क्या है ? जिंदगी बस यु ही खत्म ना हो जाये हमेसा एक डर लगता उस डर से आगे निकल कुछ कर जाए उसमे भी दम लगता है इसका नाम भी है जिंदगी 56 खूब गलती करना और ग...

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लोक डाउन कविताएं By અમી વ્યાસ

बंद हे दुकानें, बंद हे दफ्तरेंरोज की चहल पहल ने आज हो गई है परेपंछी उड़ रहे खुले आकाश में और जिंदगियां बंद हे चार दीवारों मेंसब लगे हे मौत को हराने मेंइंसान जो भूल गया था पैसे कमान...

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शायरी - 6 By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

अब तक मेरा इश्क बहुत छोटा था अब बड़ा होने जा रहा है।पहले वो आशिक था अब बेवफ़ा होने जा रहा है।।वो आइने के पीछे से हर चेहरा पहचानता हैलोग उसे अंधा समझते हैं वो दिल के आंखों से देखता...

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मैं आधा किसान और आधा मजदूर का बेटा हूँ By अमरदीप कुमार

मैं एक आधा किसान और आधा मजदूर का बेटा हूँमेरे पिता के पास दो बीघा समतल औरतीन बीघा उबड़-खाबड़ ज़मीन हैइनमें से कुछ चौरहा तो कुछ बटइआ की शर्तों परकिसी दूसरे किसान को दे दी गयी है वर्षों...

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ओ वसंत भाग-१ By महेश रौतेला

ओ वसन्त भाग-११.ओ वसन्त ओ वसन्तमैं फूल बन जाऊँसुगन्ध के लिए,ओ आसमानमैं नक्षत्र बन जाऊँटिमटिमाने के लिए।ओ शिशिरमैं बर्फ बन जाऊँदिन-रात चमकने के लिए,ओ समुद्रमैं लहर बन जाऊँथपेड़ों में...

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चल उड़ जा रे उड़ जा पँछी ऊंचे गगन में By Dev Borana

चल उड़ जा रे उड़ जा पंछी ऊंचे गगन की ओरतुझे परिवार सवारना है तुझे घर बसाना है ,चल उड़ जा गगन की ओर दो तिनको की होड़ में तुझे परिवार सवारना है तुझे कल को बनाना है ।। खत्म हुए दिन उड़ डाल...

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सिर्फ तुम.. By Sarita Sharma

सिर्फ तुम... यकीन नहीं होता कभी हम मिले थे कुछ तुम दर्द में थे, कुछ हमें भी गिले थे.. ये अधूरा इश्क़ कब पूरा सा हुआ, कब अधूरी सी ज़िन्दगी पूरी सी हुई.. ये बेदर्द सी खुशियां, इतनी हसी...

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ग़ज़ल, शेर - 4 By Kota Rajdeep

अब मुसलसल यादों में आता ही नहींलगता है मुझसे बेवफ़ाई मोड़ ली है।___Rajdeep Kotaरोना धो ना सब सहना सीख गएहम इश्क़ करना किसिसे सीख गए। मेरे दिल ए नाकाम तुम फ़िक्र ने करियोंहम इश्क़ क...

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किताब By Dhruvin Mavani

दुनिया सिर्फ कहती नही जनाब ,वो अक्सर कहती रहती है यहाँ लकड़े कहाँ ;सिर्फ़ लड़कियाँ ही तो सहती रहती है ...हम तुमसे अनजान थे अब तो वो समा ही बेहतर लगता है ,तेरा मुझे जानकर भी अनजान बनना...

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शहर सी जिंदगी यू ही भागने में निकलती थी By Dev Borana

सपनों में सोया था एक नए सवेरे के लिएसपने भी आये थे अपने लिए सुबह उठना भी था क्योंकि नॉकरी पर जाना थायोग भी करना था क्योंकि स्वास्थ्य की चिंता थीभरे शहर में दौड़ना था क्योंकि हमको कम...

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गलती तो ये थी कि तुमसे दिल लगाया था....। By Akshay jain

सोच रहा था कि, दिल लगाकर कोई गलती तो नहीं की मैने,मगर गलती तो ये थी, कि मैंने तुमसे दिल लगाया था।।??दिल तो मैने दिल से ही लगाया था, पर तुम्हारा दिल उसे समझ नहीं पाया था।पर, तुम्हें...

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मौलिक शेर - 3 By Deepak Bundela Arymoulik

ये बिछड़ना भी किस काम का रहा ना हम काम के रहे ना तुम काम के रहे... !------------जब से वो अनजान क्या हुए हम तो बेजान से हो गये... !--------------चलो ये भी इलज़ाम मान लेते हैं वे बफा त...

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तृष्णा By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

मेरे हर वजूद को उसने बेरहमी से तोड़ा है,ताउम्र जिसको मैंने बड़े ही प्यार से जोड़ा है।******* ****** ******* ******** *******इश्क हो रहा है उनसे क्या किया जाए ???रोकें अपने आप को य...

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फिर सुनना मुझे By Dr Narendra Shukl

अमन बिक रहे हैं अमन बिक रहे हैं , चमन बिक रहे हैं । लाशों से लेकर कपन बिक रहे हैं ।। म्ंत्रियों को देखा है खुले आम बिकते दारोगा, वकील भी हो रहे नंगे मार ले डुबकी ... हर - हर गंगे ।...

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धुँधली तस्वीरें By Vinay Tiwari

1)ऐसा ज़रूरी नहीं, राह का हर व्यक्ति हँस कर मिलें, कोई गले मिलकर, थोड़ा सा रो दें, और कुछ न कहें। यहाँ पर वो ख़ुशियाँ हर वक़्त क़िस्मत में ना भी मिलें, मगर कोई साथ चलकर हिम्मत देने...

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ख़ामोश प्यार। By Nimisha

लो समय आ गया बिछड़ने काकर न सके हम कुछ अपनी बात।गई शाम आ गया प्रभात फैली अरूणिम आभा चहुं ओर। स्वर्णमय हो गया संसारऐसे सुंंदर अवसर परलो समय आ गया बिछुड़ने का।पहल कभी न की मैंनेम...

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ओस की बूंदें - मुक्तक संग्रह By Amrita shukla

फूल खिला है उस महक से जान लेते हैं।कदमों की आहट से कहाँ अन्जान रहते हैं।जबसे तेरा अक्स दिल में उतर आया है ,आंखें बंद हो तो भी तुम्हें पहचान लेते हैं। ***तुमने देखा...

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उस बुजुर्ग की दीवाली By Tarkeshwer Kumar

जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई हैं मृत्यु, पर उससे भी कटु सत्य हैं वृद्धावस्था। एक कविता के माध्यम से मैंने बुज़ुर्गों के प्रति अपने कर्तव्यों को और इस अवस्था में उनके भावों को समाज तक प...

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ख़ामोश लफ्ज़ By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

हादसों से ही हमारी पहचान बनती है,बिना दर्द के छवि कहां आसान बनती है।******* ****** ******* ****** *******उछलता है कोई घाव मुझ में लहर बनकर,पता तो करो किसने दिया है रूह बनकर।******...

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बेबस आंखें By Dr Narendra Shukl

बेबस आंखें सब कुछ , देखती हैं आंखें - प्रियतम का इंतज़ार करती प्रेमिका को मीनार शिखर पर बांग देते हये पवित्र मौलवी को भीख मांगते , मासूम बच्चों को आत्महत्या करते गरीब अन्नदाताओं क...

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संकलन By Nikita

वो चर-चर में है, है वो अचर में भीवो कण-कण में है, है वो गगन में भीवो विधाता है संपूर्ण संसार का,है वो मनुष्य मन में भी??? ।। धन्यवाद ।।परमेश्वर को धन्यवाद कर, मैं, निकिता राजपूत अप...

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मेरी अधूरी प्रेमकहानी By अर्चना यादव

आँखों से निकलते हैं आँसूजब याद आती है तेरी हर बाततू भूल गया होगा शायदमुझे नहीं भूलती वो रात।वो जिद तेरी कि गर्लफ्रेण्ड बन जाओवो इनकार मेरा कि नहीं अभी रुक जाओथोड़ा समय दो एक दूसरे...

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महाकाल मेरा By Uhugvvuv Uguh8uhu

अब तो तु ही है मनझील मेरीऔर तु ही तो है सहारा मेरा....तेरे सीवा अपनाना कोइ था,ना कोइ है,और अब तो ना ही कोइ रहेगा मेरा....मेरी हर एक मुसीबत मे सीर्फ तुने ही थामा और सीर्फ तु ही थामे...

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कुछ ना करो By Yasho Vardhan Ojha

पटनहिया पंक्तियां (बिहार की राजधानी पटना का पूर्वी हिस्सा पटना सिटी के नाम से जाना जाता है। पटना जंक्शन से १० किलोमीटर दूर पटना सिटी स्टेशन है जिसे अब तख्त श्री हरमंदिर साह...

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इन्तजार By Kishanlal Sharma

दूरबहुतचला आया हूंतुझसेलेकिनअकेला नहीं आयातेरी यादेंअपनेसाथ लाया हूूंदूरबहुतचला आया हूंतुझसेसीमा परखडा होता हूूंजबदेश का प्रहरीबनकरदूरजहां तकनजर जाती हैरेगिस्तान मेकोई नजर नही आतास...

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महाराणा प्रताप भाग-(१) - परिचय व खानवा का युद्घ । By Suman Lata Singh

प्रथम नमन माँ शारदे,करो कंठ में वास ।कृपा-दृष्टि करो दीन पर,कर दो तम का नाश ।।है विघ्न- विनाशी,गणनायक,गौरीसुत मुझ पर दृृष्टि करो ।फूले ना फसल कभी तम की,ऐसी .प्रकाश की वृष्टि करो ।...

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ज़िन्दगी गले लगा ले तू By Mukteshwar Prasad Singh

जिन्दगी गले लगा ले तूख़ामोशी के आग़ोश में समाती दुनियाँ कहीं माँ -बाप तो कहीं कराहती मुनियांराष्ट्रीय नहीं अन्तर्राष्ट्रीय भय सिसकियाँ देश देश लांघती मौत से लड़ती ज़िन्दगियाँ हर चे...

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दर्द भरा दिल.. By Parmar Geeta

नमस्कार दोस्तों मेरी रचनाओं को पढ कर अपने किमती अभिप्राय अवश्य दें। और यदि कोई शति हुई हो तो भी मेरा योग्य मार्गदर्शन करें। आपकी दोस्त - गीता परमार.. ******"मेरे दिल केे अल्फाज़...

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मासूम गंगा के सवाल - 7 - अंतिम भाग By Sheel Kaushik

मासूम गंगा के सवाल (लघुकविता-संग्रह) शील कौशिक (7) नाम की डुबकी ***** पाप और पुण्य की अवधारणाओं से दूर गंगा की दिव्य अनुभूति से अभिभूत हो लगा ली एक डुबकी उन सभी के नाम की जो आ नहीं...

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शब्द क्या है ? शब्द कौन है ? By Rohit Shabd

शब्द क्या है ? शब्द कौन है ? जीवन को जीवंत होकर देखना शुरू करें "जगत मिथ्या ब्रह्म सत्य" यह सिर्फ एक विचार नहीं है यह अनुभव से भरा हुआ सत्य है जिसे प्रमाणित करते योग पुरुष है। "मै...

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में ओर मेरे अहसास - 7 By Dr Darshita Babubhai Shah

में ओर मेरे अहसास भाग-७ घर में सब कैद है लोग मेरे शहर के lपिंज मे बंध है लोग मेरे शहर के ll साँस लेने से भी डर गया है इन्सांन lदेख के दंग है लोग मेरे शहर के ll जिंदा रहने की कोई व...

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अलफ़ाज़-ए-आवाज़ By Deepak Bundela Arymoulik

ना फ़िक्र हैं ना फ़क्र हैं... !तन्हाइयों में तिरा ज़िक्र हैं... !!----------------------------------------वो गुज़रे ज़माने भी क्या याद आते हैं... !अब लोग मुझें मुड़ मुड़ कर देख चले जाते ह...

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फौजी सी मौत By अर्चना यादव

मृत्यु सभी की आनी एक दिन पर आए ऐसी हे भगवान मैं सोया रहूँ पुष्प सेज पर रो रहा हो सारा जहान... जब से मैंने होश संभाला गरीबी देखी कंगाली देखी दो वक्त की रोटी के लिए मजदूरी और भंगारी...

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एक छोटी सी दुनिया ! By SARWAT FATMI

एक छोटी सी दुनिया ! वो सपना हैँ या मेरा अपना कुछ बातें करूँ या बस निहारु उसे अब कैसे बताऊँ के एक पल भी तेरे बिना गुज़रता नहीं अब बस बना लो अपनी दुल्हन हैँ ये एक कोशिश के दूर ना हो ज...

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क्या है जिंदगी - 2 By Rohit Shabd

क्या है जिंदगी? (2) 55 जिंदगी क्या है ? जिंदगी बस यु ही खत्म ना हो जाये हमेसा एक डर लगता उस डर से आगे निकल कुछ कर जाए उसमे भी दम लगता है इसका नाम भी है जिंदगी 56 खूब गलती करना और ग...

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शायरी - 6 By Pandit Pradeep Kumar Tripathi

अब तक मेरा इश्क बहुत छोटा था अब बड़ा होने जा रहा है।पहले वो आशिक था अब बेवफ़ा होने जा रहा है।।वो आइने के पीछे से हर चेहरा पहचानता हैलोग उसे अंधा समझते हैं वो दिल के आंखों से देखता...

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मैं आधा किसान और आधा मजदूर का बेटा हूँ By अमरदीप कुमार

मैं एक आधा किसान और आधा मजदूर का बेटा हूँमेरे पिता के पास दो बीघा समतल औरतीन बीघा उबड़-खाबड़ ज़मीन हैइनमें से कुछ चौरहा तो कुछ बटइआ की शर्तों परकिसी दूसरे किसान को दे दी गयी है वर्षों...

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ओ वसंत भाग-१ By महेश रौतेला

ओ वसन्त भाग-११.ओ वसन्त ओ वसन्तमैं फूल बन जाऊँसुगन्ध के लिए,ओ आसमानमैं नक्षत्र बन जाऊँटिमटिमाने के लिए।ओ शिशिरमैं बर्फ बन जाऊँदिन-रात चमकने के लिए,ओ समुद्रमैं लहर बन जाऊँथपेड़ों में...

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चल उड़ जा रे उड़ जा पंछी ऊंचे गगन की ओरतुझे परिवार सवारना है तुझे घर बसाना है ,चल उड़ जा गगन की ओर दो तिनको की होड़ में तुझे परिवार सवारना है तुझे कल को बनाना है ।। खत्म हुए दिन उड़ डाल...

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सिर्फ तुम.. By Sarita Sharma

सिर्फ तुम... यकीन नहीं होता कभी हम मिले थे कुछ तुम दर्द में थे, कुछ हमें भी गिले थे.. ये अधूरा इश्क़ कब पूरा सा हुआ, कब अधूरी सी ज़िन्दगी पूरी सी हुई.. ये बेदर्द सी खुशियां, इतनी हसी...

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ग़ज़ल, शेर - 4 By Kota Rajdeep

अब मुसलसल यादों में आता ही नहींलगता है मुझसे बेवफ़ाई मोड़ ली है।___Rajdeep Kotaरोना धो ना सब सहना सीख गएहम इश्क़ करना किसिसे सीख गए। मेरे दिल ए नाकाम तुम फ़िक्र ने करियोंहम इश्क़ क...

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शहर सी जिंदगी यू ही भागने में निकलती थी By Dev Borana

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मौलिक शेर - 3 By Deepak Bundela Arymoulik

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तृष्णा By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

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अमन बिक रहे हैं अमन बिक रहे हैं , चमन बिक रहे हैं । लाशों से लेकर कपन बिक रहे हैं ।। म्ंत्रियों को देखा है खुले आम बिकते दारोगा, वकील भी हो रहे नंगे मार ले डुबकी ... हर - हर गंगे ।...

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धुँधली तस्वीरें By Vinay Tiwari

1)ऐसा ज़रूरी नहीं, राह का हर व्यक्ति हँस कर मिलें, कोई गले मिलकर, थोड़ा सा रो दें, और कुछ न कहें। यहाँ पर वो ख़ुशियाँ हर वक़्त क़िस्मत में ना भी मिलें, मगर कोई साथ चलकर हिम्मत देने...

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ख़ामोश प्यार। By Nimisha

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ओस की बूंदें - मुक्तक संग्रह By Amrita shukla

फूल खिला है उस महक से जान लेते हैं।कदमों की आहट से कहाँ अन्जान रहते हैं।जबसे तेरा अक्स दिल में उतर आया है ,आंखें बंद हो तो भी तुम्हें पहचान लेते हैं। ***तुमने देखा...

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उस बुजुर्ग की दीवाली By Tarkeshwer Kumar

जिंदगी की सबसे बड़ी सच्चाई हैं मृत्यु, पर उससे भी कटु सत्य हैं वृद्धावस्था। एक कविता के माध्यम से मैंने बुज़ुर्गों के प्रति अपने कर्तव्यों को और इस अवस्था में उनके भावों को समाज तक प...

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हादसों से ही हमारी पहचान बनती है,बिना दर्द के छवि कहां आसान बनती है।******* ****** ******* ****** *******उछलता है कोई घाव मुझ में लहर बनकर,पता तो करो किसने दिया है रूह बनकर।******...

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बेबस आंखें By Dr Narendra Shukl

बेबस आंखें सब कुछ , देखती हैं आंखें - प्रियतम का इंतज़ार करती प्रेमिका को मीनार शिखर पर बांग देते हये पवित्र मौलवी को भीख मांगते , मासूम बच्चों को आत्महत्या करते गरीब अन्नदाताओं क...

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मेरी अधूरी प्रेमकहानी By अर्चना यादव

आँखों से निकलते हैं आँसूजब याद आती है तेरी हर बाततू भूल गया होगा शायदमुझे नहीं भूलती वो रात।वो जिद तेरी कि गर्लफ्रेण्ड बन जाओवो इनकार मेरा कि नहीं अभी रुक जाओथोड़ा समय दो एक दूसरे...

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महाकाल मेरा By Uhugvvuv Uguh8uhu

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