कविता कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Poems in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultures. Th...Read More


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कविताएँ By Amrita Sinha

1* माँ का बरगद होना—-++————माँ जो कभी बरगद सी थीं , हर तरफअब व्हीलचेयर पर बैठी हैं , सिमट करन बोलना, न चलना,न खाना बस देखती जाती हैं एकटक , निहारती रहती हैं अपलकजैसे पूरी देह का द...

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मेरे शब्द मेरी पहचान - 1 By Shruti Sharma

----वो दोस्ती ही क्या जिसमें तक़रार न हो----वो दोस्ती ही क्या जिसमें प्यार न हो ,वो सफलता ही क्या जिसमें इन्तजार न हो , दोस्ती तो दो आत्माओं का मिलन है ,पर वो दोस्ती ही क्या जिसमें...

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में और मेरे अहसास - 32 By Dr Darshita Babubhai Shah

गर ख्यालो पे रोक लगा दोगे lतो जुबान अपनेआप मौन रहेगी ll *********************************************** याद ने तेरी जीने का हौसला दे दिया lप्यार ने तेरे जीने का हौसला दे दिया ll रफ...

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गांव की तलाश - 6 By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

गांव की तलाश 6 काव्‍य संकलन- वेदराम प्रजापति ‘’मनमस्‍त’’ - समर्पण – अपनी मातृ-भू के, प्‍यारे-प्‍यारे गांवों को, प...

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मैं भारत बोल रहा हूं-काव्य संकलन - 18 By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

नींब के पत्‍थर-- सो रहे तुम, आज सुख से, दर्द उनको हो रहा है। शान्‍त क्रन्‍दन पर उन्‍हीं के, आसमां- भी रो रहा है।। यामिनी के मृदु प्रहर में, दर्द-सी, पीड़ा कहानी। सुन रहा है आज...

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सचमुच तुम ईश्वर हो ! 10 - अंन्त By ramgopal bhavuk

काव्य संकलन सचमुच तुम ईश्वर हो ! 10...

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तुम्हारे बाद - 6 - अंतिम भाग By DrPranava Bharti

31--- यूँ तो जीने को पूरी हो जाती हैं तमाम साँसें तुम्हारे बिन कहीं उखड़ी सी हो जाती हैं बहुत दूर जाना है दहशत अभी से है क्यों ये और समुंदर की गहराई का माप भीतर है तेरी यादों का सिल...

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वो भारत! है कहाँ मेरा? 12 By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

वो भारत! है कहाँ मेरा? 12 (काव्य संकलन) सत्यमेव जयते समर्पण मानव अवनी के, चिंतन शील मनीषियों के,...

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मेरी हिंदी कविताएं By Falguni Shah

✍️शफ़क़✍️मेरी हर शफ़क़ को इत्र सी महका जाती है मेरी रुह में बसकर बिख़र जाती है तेरी वो बेसुमार महोब्बत की कशीश जो आज भी तेरी ख़ामोशी और मेरे इंतज़ार के दरम्या भीकुछ तो राब्ता होने...

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सुरेश पाण्‍डे सरस डबरा का काव्‍य संग्रह - 6 By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

सुरेश पाण्‍डे सरस डबरा का काव्‍य संग्रह 6 सरस प्रीत सुरेश पाण्‍डे सरस डबरा स...

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મારા કાવ્ય - 6 By Nikita panchal

1. કંઇ જ નથીશું છે આ પ્રેમ, કંઈ જ નથી...હા બસ મારા દિલમાં ધરબાયેલી...એક કૂણી લાગણી છે તારા માટે...શું છે આ પ્રેમ, કંઈ જ નથી...હા બસ જાણે ઉજ્જડ રણમાં...એક અટૂલો એરંડો ઊગ્યો તારા માટ...

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Unfinished Lovosophy By M. Sohil shaikh

इज़हार ए इश्क़ किया हे अभी, खोयी मुस्कराहट याद करने दो। आग़ाज़ ए इश्क़ हुआ हे अभी, थोड़ा तो उनका ज़िक्र करने दो। तौबा करेंगे सुकून से सोहिल, अभी गुनाह तो मुक़म्मल करने दो।Ijhar e is...

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बिछड़ना By praveen singh

मै सोच रहा हूँ, कुछ गुजरी हुई बातों को जो संग में गुजरी थी, उन हसीं रातों को...

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उत्‍सुक काव्‍य कुन्‍ज - 7 By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

उत्‍सुक काव्‍य कुन्‍ज 7 कवि नरेन्‍द्र उत्‍सुक प्रधान सम्‍पादक – रामगोपाल भावुक सम्‍पादक – वेदराम प्रजापति मनमस्‍त, धीरेन्‍द्र गहलोत धीर, ओमप्रकाश सेन आजाद सम्‍पादकीय नरेन्‍...

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माँ कि ममता By praveen singh

“माँ”दर्द होता था हमें अगर, तो माँ की नींद उड़ जाती थी ठण्ड में ऐसे रहो,गर्मी में ये करो, माँ ही तो थी जो हर पल पीछे पड़ जाती थी ऐसा नहीं है की हमें प्यार नहीं था उनसे, पर लड़ना ही उन...

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कविताएँ By Amrita Sinha

1* माँ का बरगद होना—-++————माँ जो कभी बरगद सी थीं , हर तरफअब व्हीलचेयर पर बैठी हैं , सिमट करन बोलना, न चलना,न खाना बस देखती जाती हैं एकटक , निहारती रहती हैं अपलकजैसे पूरी देह का द...

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मेरे शब्द मेरी पहचान - 1 By Shruti Sharma

----वो दोस्ती ही क्या जिसमें तक़रार न हो----वो दोस्ती ही क्या जिसमें प्यार न हो ,वो सफलता ही क्या जिसमें इन्तजार न हो , दोस्ती तो दो आत्माओं का मिलन है ,पर वो दोस्ती ही क्या जिसमें...

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में और मेरे अहसास - 32 By Dr Darshita Babubhai Shah

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गांव की तलाश - 6 By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

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मैं भारत बोल रहा हूं-काव्य संकलन - 18 By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

नींब के पत्‍थर-- सो रहे तुम, आज सुख से, दर्द उनको हो रहा है। शान्‍त क्रन्‍दन पर उन्‍हीं के, आसमां- भी रो रहा है।। यामिनी के मृदु प्रहर में, दर्द-सी, पीड़ा कहानी। सुन रहा है आज...

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सचमुच तुम ईश्वर हो ! 10 - अंन्त By ramgopal bhavuk

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तुम्हारे बाद - 6 - अंतिम भाग By DrPranava Bharti

31--- यूँ तो जीने को पूरी हो जाती हैं तमाम साँसें तुम्हारे बिन कहीं उखड़ी सी हो जाती हैं बहुत दूर जाना है दहशत अभी से है क्यों ये और समुंदर की गहराई का माप भीतर है तेरी यादों का सिल...

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उत्‍सुक काव्‍य कुन्‍ज - 7 By Ramgopal Bhavuk Gwaaliyar

उत्‍सुक काव्‍य कुन्‍ज 7 कवि नरेन्‍द्र उत्‍सुक प्रधान सम्‍पादक – रामगोपाल भावुक सम्‍पादक – वेदराम प्रजापति मनमस्‍त, धीरेन्‍द्र गहलोत धीर, ओमप्रकाश सेन आजाद सम्‍पादकीय नरेन्‍...

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माँ कि ममता By praveen singh

“माँ”दर्द होता था हमें अगर, तो माँ की नींद उड़ जाती थी ठण्ड में ऐसे रहो,गर्मी में ये करो, माँ ही तो थी जो हर पल पीछे पड़ जाती थी ऐसा नहीं है की हमें प्यार नहीं था उनसे, पर लड़ना ही उन...

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