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धनबाद उस समय सिर्फ एक शहर नहीं था—वह कोयले, धुएँ, पसीने और बीमारी से बना एक जीवि...
रात का सन्नाटा इतना गहरा था कि बस्ती के कुत्तों की रोने की आवाज़ भी साफ़ सुनाई दे...
कॉलेज का वो साल आज भी उसे साफ याद था। सुबह की हल्की धूप, कैंपस की भागती भीड़, दो...
अगली सुबह सूरज की पहली किरण निकलते ही आर्यन ने माधव और गाँव के कुछ हिम्मत वाले य...
बारिश और एक मुहब्बत की शुरुआत :पहली बारिश के उस दिन के बाद से जैसे मौसम ही बदल ग...
आज से काफी दशक पहले यमलोक में भ्रमण करते हुए यमराज को यमलोक कि कार्यशैली में कुछ...
हम फिर से मिले मगर इस तरहऐपीसोड़ - 25रूपाली को इस तरह देखकर अरूण एक घहरे सदमे मे...
Part 1 — पहली बार उसका नाम सुना कॉलेज का पहला हफ्ता हमेशा थोड़ा अजीब होता है।नए...
ऋगुवेद सूक्ति--(१५) की व्याख्या तवेद्धि सख्यम् स्तृतम्। १/१५/५भावार्थ -प्रभो !...
- एक -मैंने उस गली का फिर से एक और चक्कर लगाया। मुझे क...
रात का समय था। एक बूढ़ा आदमी अपने पुराने से घर में अकेला बैठा था। सामने टीवी पर तेज़ आवाज़ में समाचार चल रहा था। “आज शहर के सबसे बड़े बैंक में हुई 5 करोड़ की चोरी से हड़कंप मच ग...
**एपिसोड 1: चीख, चीख और चुप्पी का खेल** **स्थान:** दिल्ली का पॉश इलाका – एक आलीशान बंगला **रात:** पार्टी से एक दिन पहले बंगले की दीवारों में बसी चुप्पी अचानक टूट गई। "त...
रविवार का दिन हैं आज का दिन हमारे लिए बहुत ज्यादा खुशी का हैं। क्योंकि मेरी बड़ी बहन संजना की आज सगाई हैं। सभी रिश्तेदार व जानने वाले आ चुके हैं। पूरा घर किसी दुल्हन की तरह सजा हुआ...
मुंबई की चकाचौंध भरी दुनिया में एक नाम ऐसा था जो खुद ही चमक का पर्याय बन चुका था— आदित्य मेहरा। आदित्य सिर्फ़ एक टीवी एक्टर नहीं, बल्कि करोड़ों दिलों की धड़कन था। उसकी गहरी आँखें,...
स्थान: गांव का चौपाल समय: शाम ढलने का वक्त बड़ा पीपल का पेड़ झूम रहा है। कुछ बुज़ुर्ग और नौजवान बैठे हैं। महिलाएं थोड़ी दूरी से सुन रही हैं। बच्चे खेलते-खेलते धीरे-धीरे पास आ रहे...
इंस्पेक्टर सुखी सुबह के 6 बजे शुख की नींद में थे, कि अचानक उनके मोबाइल की रिंग बजी..आँखें मलते हुए..हाथ में मोबाइल लेकर बोले “नाम सुखी है लेकिन दुनिया शुख से रहने नहीं देती..इस मोब...
एलारिया की शांत और सुंदर दुनिया में, जहाँ हरे-भरे मैदान और घने जंगल फैले हुए थे, एक छोटा-सा गाँव लिलीवुड अपनी सादगी और खुशियों के लिए जाना जाता था। यहाँ के लोग प्रकृति के करीब रहते...
अस्पताल में दवाओं का गंध हमेशा बना रहता था | और रक्तांश खुराना को इससे हमेशा से नफ़रत थी लेकिन इस वक्त वह उस गंध को मेहसूस नही कर पा रहा था | रक्तांश इस वक्त वीआईपी वार्ड...
"साहब, इस बिल्डिंग में बारह ही मंज़िलें हैं। तेरहवीं कभी बनी ही नहीं।" वॉचमैन की आवाज़ में न जाने कैसा कंपन था जो विशाल को बेचैन कर गया। सुबह की पहली किरण अभी ठीक से ज़...
रात के 11:42 हो चुके थे। सोसाइटी की सारी लाइटें बुझ चुकी थीं। हवा में अजीब सी सर्दी थी, जो जून की गर्मी में भी अजनबी लग रही थी। अर्जुन एक नया डिलीवरी बॉय था। आज उसे एक ऑर्डर मिल...
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