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रह-रहकर उसका शरीर सिहर उठता। तभी झट से दरवाजा खोल कर उसका दोस्त रमेश भीतर दाखिल...
अध्याय 7: धमाका!इस कोयले की खान का विवरण देखते ही काओ शिंग की आँखें चमक उठीं।इतन...
“वो चिट्ठी… जिसने सब बदल दिया”रात के करीब साढ़े दस बजे थे।शहर की सड़कों पर हल्की...
त्रिजला कहती है--> आपकी आञा हो तो इसे अभी यहां से कुंभ्मन के पास लेकर चलुं ? मात...
एक दिन का बॉयफ्रेंड मुंबई की सुबह हमेशा की तरह तेज़ थी।मेट्रो स्टेशन के बाहर लोग...
काव्या पुरानी बात। लेकिन तेरा राज़..." झगड़ा चरम पर। अनन्या ने चाय फोड़ दी। आर्य...
Human Mindset (मानव मन की शक्ति)मनुष्य की सबसे बड़ी ताकत उसकी शारीरिक शक्ति नहीं...
Vedanta 2.0 : H₂O जीवन जीना ही ईश्वर है अज्ञात अज्ञानी विषय-सूची प्रारंभिक ख...
साल 1540 की एक ठंडी सुबह। अरावली की ऊँची पहाड़ियों के बीच स्थित कुंभलगढ़ किला अप...
VULTURE: बंधन, भरोसा और बगावतसीन 1 – रात का शहर, टूटी हुई खामोशीतेज़ हवा।ऊँची इम...
अमावस्या की रात थी और रात के 11 बज रहे थे । भानपुर गांव का एक तांत्रिक अपनी तात्रिकं साधना करने के लिए सुंदरवन की तरफ जा रहा था । गांव मे ये मान्यता थी के जो कोई भी तात्रिकं अमावस्...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
शीर्षक: वल्चर – अँधेरे की उड़ान विशेष एपिसोड: “रक्तपंख बनाम नरकवीर” [दृश्य 1 – महानगर का बाहरी इलाका, संध्या] लाल सूरज डूब रहा है। धुएँ से भरी हवा में सायरनों की आवाज़ गूँजती है...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
“राधा… ज़रा धीरे चल बेटी…”माँ हाँफती हुई पीछे से बोली।“तेरे कदमों में अभी जवानी की रफ्तार है… पर मैं अब 25 की नहीं रही… थोड़ा साथ चल ले।”आज माँ राधा को साथ लेकर बाज़ार आई थी।कुछ ही...
कुहासों की गलियों में से गुज़रते हुए जीवन की गठरी न जाने कितनी बार नीचे गिरी, कितनी बार खुली, कितनी बार बिखरी और समेटी गई लेकिन गठरी की गाँठ बड़ी कमज़ोर रही फिर चिंदी बनकर उड़ने से उसम...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
सन्नाटे की गूँज माया की ज़िंदगी एक खाली कमरे की तरह थी—चुपचाप, उदास और अकेली। तीस साल की हो चुकी थी वह, लेकिन शादी का ख्याल उसके मन के किसी कोने में दफन हो चुका था। वह एक छोटे से...
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