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अध्याय-२३अमृता और हनी इन चार दिनों में मानो उस खुशी को समेटने और जीने में ही मग्...
“कुछ पूछोगे नहीं?”ऋतिक ने बिना उसकी तरफ देखे धीमे से कहा—“नहीं।”काम्या हल्का सा...
मेरे परिवार से भी मेरा रिश्ता कुछ ऐसा ही है।कभी बहन का फोन आ जाता है, कभी मम्मी...
नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आप सभी का घुमक्कड़ जिज्ञासा सीरीज़ के इस एपिसो...
ध्रुव की ताराभाग - ७ लेखिका "अनामिका" छुट्टियाँ खत्म होने के बाद स्कूल का पहला द...
एपिसोड 35— रहमान खान का सचइंस्पेक्टर के मुँह से "रहमान खान" नाम सुनते ही आयत जैस...
उधर दानव के जादू का असर हो चुका था।कुछ ही देर में सेठ के बेटे के शरीर में हलचल ह...
संस्करण := 3***********12 रुपिया किलो में बिकता प्रेमचंद...
भाग ५ — एक पुरुष का निर्णयलेखिका: अलोका पटेलरात गहरी हो चुकी थी।सावित्री के सामन...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 67: पहला द्वार — स्मृति“अनन्या...”पीछे से आ...
सूरज की गुनगुनी धूप में सामान से भरी पिकअप वैन नई सोसाइटी के गेट पर आकर रुकी। आज से सात साल की तारा की दुनिया बदलने वाली थी। "अरे विजय! वक्त पर पहुँच गया यार," तारा के पा...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
बहुत पुराने ज़माने की बात है। एक छोटा-सा गाँव था। उसी गाँव में एक बूढ़ी औरत रहती थी। उसका पति कब का मर-खप चुका था। घर में बस वही बूढ़ी औरत और उसका एक इकलौता बेटा बचा था। अब बेटा...
: Ye pustak "Sahitya Ka Circus" ek kalpanik, vyangyatmak rachna hai. Sabhi patra, sthan, ghatna kalpanik hain. Iska kisi vastavik vyakti, lekhak (Premchand/Manto/Ghalib), j...
गंगा के किनारे बसा वह छोटा-सा गाँव सूर्योदय के साथ ही जाग जाता था। सुबह के पाँच बजे थे। आसमान अभी अँधेरा था, लेकिन पूरब की दिशा में हल्की लालिमा दिखाई देने लगी थी। दूर मंदिर...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
बचपन की पहली यादें कुछ यादें ऐसी होती हैं जिन्हें हम चाहकर भी भूल नहीं पाते। वे यादें किसी तस्वीर की तरह हमारे मन में टंगी रहती हैं। वक्त गुजरता जाता है, उम्र बढ़ती जाती है,...
कोलकाता: गुनाह का काला जश्न कोलकाता की वह रात आम रातों जैसी नहीं थी। 'द वेलवेट अंडरग्राउंड' नाइट क्लब के बाहर महंगी गाड़ियों का काफिला लगा था, और अंदर—शहर की चकाचौंध अ...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
बहुत पुरानी बात नहीं है, यह उस दौर की कहानी है जब लोग आँखों से दिलों का हाल पढ़ लिया करते थे। शहर के बीचों-बीच बसा पुराना कॉलेज, जिसकी दीवारों पर इतिहास की परतें जमी थीं और गलियारो...
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