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अब आगे ,सिया और सुहानी ने सांझ को ले जाकर मंडप में बैठा दिया । पंडित जी ने शादी...
हवेली की विशाल संगमरमर की दीवार पर टंगी प्राचीन घड़ी ने जैसे ही शाम के सात बजने...
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने अनुसूचित जाति-जन...
ईशानी : हा मेरी मां पढ़ लेंगे।नैना मुस्कराने लगी ईशानी की मुलाकात नैना से कॉलेज...
बेटा समझा करो, देखो यहां कितनी भीड़ है तुम्हारी मॉम को हमें ढूंढने में परेशानी ह...
एक आम सी प्रेम कहानी भाग - १४लेखिका "अनामिका" जैसे ही मलय ने सगाई की बात रखी, कम...
"हम अपनी मर्यादा नहीं लाँघ सकते।"वहीं यशी ने अपनी आँखें कसकर बंद कर लीं। मगर कुछ...
आज का समाज, आज के रीति-रिवाजएक बदलते समाज की कहानीलेखक: अलोका पटेलअध्याय १ — बदल...
वो रात एक आम रात जैसी ही थी, हम दोनों पार्टी से वापस लौट रहे ... मैं शर्लिन को उ...
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव रामपुर में मोहन नाम का एक गरीब लड़का रहता था। मो...
मध्यमवर्गीय परिवार की 22 वर्षीय माया की हंसती-खेलती जिंदगी अचानक एक भयानक तूफान में घिर गई। उसके पिता की तबीयत अचानक बिगड़ी और अस्पताल के आईसीयू में उन्हें वेंटिलेटर पर डालना पड़ा।...
आइए मिलते है इस कहानी की मुख्य नायिका से ईशानी शर्मा, जिसकी उम्र 23 साल है गोरा रंग, मध्यम कद, बादामी मोटी - मोटी आंखे जो कभी एक जगह नहीं टिकती, थोड़े घुंघराले कमर तक लंबे बाल जो ह...
मैं... अपने ऑफिस का काम जल्द से जल्द निपटाने में व्यस्त था तभी मुझे कुछ हल्की सी चिल्लाने की आवाज सुनाई दी, पर मुझे अपने ऑफिस का काम जल्दी खत्म करना था इसलिए मैंने उस आवाज को नजर...
लेखिका की ओर से अक्सर ऐसा होता हे की हमे बचपन से हि दिखाया या अहसास कराया जाता हे के प्रेम कहानिया बस अमर या अद्भुत हि होती हे। जैसे की फिल्मो मे हीरो-हीरोइन या किताबों मे रा...
दोपहर का समय था।चारों ओर सूखी और पथरीली ज़मीन फैली हुई थी। दूर-दूर तक छोटी-छोटी पहाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं। उनके बीच से एक सँकरा कच्चा मार्ग निकल रहा था। उसी मार्ग के किनारे एक बड़...
करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ................... शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे के आखिरी दिन एक विचित्र घटना घटी। हुआ यूँ कि आखिरी दिन बाबा बटेश्वर की नज़र गेरुआ धोती में लिपटी...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
भाग १ — एक दिन, कई जिम्मेदारियाँ सुबह छह बजे अलार्म बजा। मिहिर ने आँखें खोलीं, लेकिन कुछ क्षणों तक बिस्तर पर ही पड़ा रहा। बगल में उसकी पत्नी निशा अभी सो रही थी। सामने की द...
घना अंधेरा जंगल. रात का न जाने कौन- सा पहर था. चारों ओर ऐसा सन्नाटा पसरा हुआ था कि अपनी ही साँसों की आवाज किसी अनजान खतरे की आहट लग रही थी. आसमान को काले बादलों ने निगल लिया था और...
एक कर्तव्य ऐसा भी स्वामी हरि प्रपन्नाचार्य हरिद्वार में वैष्णव सम्प्रदाय के प्रसिद्ध व तपस्वी आचार्य थे । उनके प्रसिद्ध राधा स्वामी आश्रम तीर्थयात्रियों व भक्तों के ठहरने व खा...
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