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छह महीने बाद हरिद्वार सेंट्रल जेल की दीवारें सफेद हैं, लेकिन मुझे हमेशा लगता है...
शीर्षक: 2025 में भी अधूरी आज़ादीसाल 2025 की सर्द सुबह थी। शहर के बाहर बने फ्लाईओ...
लेकिन ठंडी हवेली, मंडप सजाया गया है, गुलाबी और सुनहरी डेकोर के बीच शहनाई की हल्...
अनकही देहलीज़भाग 1: अदृश्य रेखाएं"साहब, चाय टेबल पर रख दी है।"आदित्य ने अपनी फाइल...
शून्य की यात्रा — न सत्य, न असत्य जीवन में न कुछ अंतिम सत्य है,न कुछ अंतिम असत्...
Hi दोस्तों,आज Hug Day है… तो एक किस्सा share करना चाहता हूं...College के 2 साल ह...
एक साल बाद,(जिन्दल इंड्रस्टीज़)"महाराज! आज वो दिन है जिस दिन उस कन्या की मृत्यु...
भाग एक: वो पहली बारिश मीरा को बारिश से नफ़रत थी। शायद इसलिए कि उसकी ज़िंदगी में...
आलोचना : एक जासूसी लेखक की मुकम्मल जिंदगी की दास्तान : आत्मकथा: पानी केरा...
फिल्म आलोचना :_तेरे इश्क में लड़की की बेवफाई से बर्बाद होते युवक ---------------...
रोमित और जूली दोनों दिल्ली के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में बी.टेक के अंतिम वर्ष में थे . दोनों ही उच्च मध्यम वर्ग के परिवार की संतानें थीं . रोमित का परिवार दिल्ली में ही रहता थ...
महाभारत की कहानी - भाग- १ शिखंडी की कहानी और भीष्म की इच्छामृत्यु प्रस्तावना संपूर्ण महाभारत पढ़ने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। अधिकांश लोगों ने महाभारत की कुछ कहानी पढ़ी, सु...
1.स्याही का दामन। मेरे लफ्जो ने स्याही का दामन थाम लिया है। अब लिखूँगी मैं अपनी किश्मत अपने ही हाथो से। लिखूँगी अपना हर ख्वाब कायम,कोई अधूरी ख्वाहिश ना छूटने दूंगी।भर दूंगी रंग आशम...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
Heroine: शानवी सिंह Hero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान) शानवी सिंह को अकेलापन काटने दौड़ता था। बड़े शहर में छोटी सी नौकरी, छोटा सा कमरा और दिन भर का शोर… लेकिन रात...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
"रात 3:12 बजे की दस्तक" — इस सीरीज के हर एपिसोड में आपको मिलेगी एक बिल्कुल नई और रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी। एपिसोड 1: रात 3:12 बजे की दस्तक रात का सन्नाटा इतना गह...
बाहर मुंबई की कभी न थमने वाली रफ़्तार थी और केबिन के अंदर एक गला घोंटने वाली खामोशी। पुराने एयर कंडीशनर की घरघराहट ऐसी लग रही थी जैसे कोई वेंटिलेटर पर आखिरी सांसें ले रहा हो। आरंभी...
यह शब्द सुना तो बहुत था, बचपन में इस पर निबंध भी बहुत लिखे थे पर मेरे लिए यह शब्द तब तक अस्तित्व में नहीं था जब तक की मुझे मेरी सहेली ने इसका असल अर्थ समझाया नहीं था। मेरे पिताज...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
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