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पुनर्वा अपनें पिता सुखवासी राम की इकलौती बेटी थी, सुखवासी राम की आर्थिक स्थिति स...
“हम रोज़ चिल्लाते हैं कि दुनिया बहुत बुरी है, लेकिन क्या कभी सोचा है कि इसे बुरा...
समीक्षा -**पुस्तक -* जनपद बिजनौर (अशोक मधुप के लेखों का संग्रह)*प्रकाशक -* अमर उ...
यह सुनते ही पूरे गाँव में सन्नाटा पसर गया। बुजुर्गों ने अपने सिर पकड़ लिए। यह मह...
होटल मालिक के इस तरह से कहने पर एकांश को गुस्सा आ जाता है एकांश गुस्से से होटल म...
किताब खोलते ही नींद आ जाती है? 5 मिनट पढ़ो, फिर फोन चेक करने का मन करता है? दी,...
यह कहानी है मासूम – सी मान्या की.. जो अभी केवल 23 साल की है । जो फिलहाल में एक स...
महाराणा सांगा : मेवाड शिखर पर व खानवा की महान विजय(1508-1528 ईसवी)महाराणा कुंभा...
अंधेरा अब सिर्फ बाहर नहीं था वो हर साँस के साथ भीतर उतर रहा था।हवा भारी थी, जमीन...
आहार और मानसिक स्वास्थ्य आहार और मानसिक स्वास्थ्य का गहरा संबंध हैं। सही खान-पान...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
अस्पताल के उस वीरान कमरे में चारों ओर सफेद दीवारों का सन्नाटा पसरा हुआ था। केवल मशीनों की 'बीप-बीप' की आवाज़ उस सन्नाटे को चीर रही थी। रिया ने बहुत धीरे से अपनी पलकें झपकाई...
(साउंड इफेक्ट: एक पुरानी घड़ी की 'टिक-टिक' की आवाज जो धीरे-धीरे दिल की धड़कन जैसी तेज होती है। बाहर मूसलाधार बारिश और बादलों के गरजने की गूँज।) नैरेटर: समय का पहिया अक्सर...
बात उन दिनों की है जब मेरी नई नई शादी हुई थी। मेरे पिता जी अपनी ड्यूटी के चक्कर में पड़े हुए थे, अतः उनका हमारे परिवार की ओर ध्यान लगभग कम ही था अतः हमारा सयुंक्त परिबार दादीअम्मा...
कृषांत ठाकुर (Hero) — 25 वर्ष का, सख्त मिज़ाज, कम बोलने वाला, लेकिन अंदर से बहुत सी बातें छिपाए हुए। श्रव्या सिंह (Heroine) — 23 वर्ष की, नई-नई जॉइन करने वाली, मासूम, डरपोक और ब...
वेदांश राठौर एक ऐसी शख्सियत जो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी एशिया में अपना सिक्का जमाए हुए है। बिज़नेस वर्ल्ड में एक नाम गूंजता है .. वेदांश राठौर। इनकी दूसरी ओर सबसे खतरनाक पर्सनेल...
गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
इस तरह एक सदियां बीत गए।। लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी। और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...
शहर की सबसे पॉश कॉलोनी 'गोल्डन हाइट्स' के आखिरी छोर पर खड़ा वह महलनुमा बंगला आज किसी कब्रिस्तान की तरह खामोश था। बाहर से देखने पर वह आलीशान घर खुशहाली की मिसाल लगता था, लेकि...
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