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कमरे में हल्की-सी रोशनी थी। श्रेया बिस्तर पर अकेली पड़ी थी। उसने नज़र उठाकर सामन...
शिमला की खूबसूरत वादियों में बसा 'सिल्वर ओक्स' कॉटेज सालों से वीरान पड़ा...
विजय शर्मा एरी अजनाला, अमृतसर स्कूल का पहला दिन सुबह की पह...
Sixty-Four Squares:बारिश का मौसम बीत चुका था।लेकिन उसके कमरे की खामोशी वैसी ही थ...
रणजय सर के ट्यूशन से बाहर निकलते ही कड़कड़ाती बिजली के साथ झमाझम बारिश शुरू हो ग...
विरासतअध्याय 1 : एक अजीब वसीयतसावन अपने पूरे यौवन पर था। रात भर हुई वर्षा ने देव...
जैसी करनी वैसी भरनी सुन कर बड़ा दुःख हुआ था कि मेरा एक पुराना सहयोगी राकेश सोलं...
एपिसोड 14– पहली ड्यूटी, पहला साथ और पहली साज़िशसिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के...
आजादी - एक अधूरे खत की पूरी कहानीसन 1930 की बात है। बंगाल के एक छोटे से गाँव सोन...
गाँव की मिट्टी में जब पहली बारिश की बूँदें गिरतीं, तो सबसे पहले जो आवाज़ सुनाई द...
समर्पित उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं। प्रस्तावना यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक...
प्रिया पाठको,, यह एक सामाजिक कहानी है । जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है । अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ?? ....... .......
The Kingdom That Put a Fiction on Trial एक डार्क फैंटेसी महाकाव्य है, जहाँ राजनीति तलवारों से नहीं, विचारों से लड़ी जाती है; जहाँ दर्शन अपराध बन जाता है; और जहाँ एक अकेली लेखिका की...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी। खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था। आज कुछ अलग सा लग रहा था। दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...
संदेश रात के साढ़े दस बज रहे थे। शहर की ऊँची इमारतों की खिड़कियों में एक-एक करके रोशनियाँ बुझ रही थीं। सड़क पर वाहनों का शोर अब थककर धीमा पड़ चुका था। हवा में हल्की नमी थी और बालकन...
चाय की एक मशहूर दुकान के सामने, शहर की व्यस्त सड़क पर गाड़ियों का शोर अपने चरम पर था। वहाँ खड़ी एक सफेद सेडान कार के बोनट से पीठ टिकाए कबीर खड़ा था। उसकी सादी सूती शर्ट की आस्तीनें कोह...
कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है। यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्क...
डिस्क्रिप्शन मनोज एक छोटे शहर का लड़का है। उसके घर में पैसों की बहुत तंगी है। उसके पिता की किराने की दुकान है पर उस पर बहुत कर्ज चढ़ गया है। मनोज सरकारी कॉलेज में पढ़ता है। वो दिख...
नवंबर की हल्की ठंड... और मीठी-सी धूप में... आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही थी। तभी अंदर से फोन की आवाज़ आई... ? "ट्रिन ट्रिन... ट्रिन ट...
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