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घर के पीछेबिट्टू की वह आख़िरी फुसफुसाहट "वो आदमी हर रात आपके घर के पीछे खड़ा रहत...
प्रतीकोपासना :- संपूर्ण साधना का क्रमभाग ४ : स्वप्रतीक से चिदाकाश तकअब तक हमने प...
अक्षय धीरे- धीरे आगे बढा. फ्लैशलाइट की रोशनी उस चीज पर पडी. और दोनों के चेहरे का...
Part 4 — आर्या कौन थी?अनाया की आंखें अब भी डायरी की उस आखिरी लाइन पर टिकी थीं।“आ...
Satyanusran की प्रथम वाणीश्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र की अमर वाणी का आध्यात्मिक वि...
सुबह की पहली धुंध जब खिड़की के शीशों पर जमी, तो राघवन ने उसे एक धुंधले धुएं की त...
‘‘अबे! कहा न, घुटने को देख। घुटना कहीं का! सिर उठाया, तो मुर्गा बना दूूंगा।’’ मे...
प्राचीन समय की बात है। हिमालय की गोद में बसा एक छोटा सा गाँव था जिसका नाम शिवपुर...
तभी मृणाल ने यशी से कहा,"यशी, चलिए ना, अब यह?"यह सुनकर यशी आस-पास देखने लगीं। तभ...
Mr. & Ms. FakeEpisode 17 – A Heart Doesn't Lieरात के लगभग दस बजे...सिंह हाउस...
जिंदगी के पार जिंदगी कहते हैं जिंदगी एक रहस्य से भरा हुआ है एक पजल की तरह जिंदगी की हर मोड़ हर रास्ता है जिसे सुलझाना आसान नहीं और जिंदगी की कहानी एक पजल है...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
मियां-बीवी की खट्टी-मीठी नोकझोंक से भरपूर कहानी -(प्यार भी तुमसे और टकरार भी ) ( डॉक्टर बीवी और बेचारा मरीज पति ) ️भाग–1 रात के ठीक ग्यारह बजे...पूरा मैरिज हॉल तालियों से गूंज...
शाम के लगभग सात बज रहे थे। सूरज पहाड़ियों के पीछे छिप चुका था और गाँव के चारों ओर अँधेरा धीरे-धीरे फैल रहा था। हवा में हल्की ठंडक थी और दूर जंगल से झींगुरों की आवाजें लगातार सुनाई...
“शिफ़ा शिफ़ा....”,अनस सहन में खड़ा उसको आवाज़ कम दे रहा था और चि़ल्ला ज़्यादा रहा था।“क्या मुसीबत है, कभी तो चैन से खाना खाने दिया करो। हर वक़्त सर पर नाज़िल रहते हो”वह बड़बड़ाती ह...
सिख धर्म के प्रणेता गुरू नानक देव जी का जन्म १४६९ इन, में हुआ था। 1496 ई, मे उन्होने ना केवल हिन्दू ना कोई मुसलमान,का उपदेश दिया।उनका सारा जीवन मानवता और न्याय के लिए, अत्याचारी और...
"समाज का सुधार केवल विचार से ही संभव है, क्रांति नहीं, विचार क्रांति चाहिए।" प्रस्तावना भारत एक महान देश है, लेकिन एक बहुत बड़ी समस्या से जूझ रहा है - जाति-प्रथा। हजारों...
अनकही आवाज़ और एक नया मोड़ शहर के सबसे व्यस्त चौराहे पर स्थित उस कैफे का माहौल हमेशा शोर-शराबे से भरा रहता था। हर कोई अपनी दुनिया में खोया था—किसी को फोन पर बात करने की जल्दी थी,...
राणा जैसे ही कमरे में प्रविष्ट हुआ तो चौंक उठा राज के सिर पर पट्टी बंधी हुई थी।उसके पास बैठते हुए राणा बोला, क्या रात में दीवार के साथ सिर टकराया था ?हां।अगर यह सच है तो तुम्हें पा...
कहते हैं कि अंधी आँखें दुनिया का कोई रंग नहीं देख सकतीं। न उजाला, न कफ़न का सफेद रंग और न ही हाथों पर लगा खून का लाल धब्बा। लेकिन क्या वाकई रोशनी के चले जाने से सच भी अंधा हो जाता...
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