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काली car धीरे-धीरे चौहान हवेली की गली के पास आकर रुकी। संयोगिता कुछ सेकंड तक बाह...
शहद की गुड़िया - प्रकरण 83 " संजना के स...
### एपिसोड 2: लहूलुहान जमीन और खौफनाक भिड़ंतक्रिमसन वैली की उस पथरीली और वीरान ज...
85 वर्षीय मनोहर आज अजीब पशोपेश में थे। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि उनका नाम...
डेमोक्रेसी बंधकॉपीराइट © एस.एन. (सौम्या नारायणन बालकृष्णन)। सर्वाधिकार सुरक्षित।...
मध्यमवर्गीय परिवार की 22 वर्षीय माया की हंसती-खेलती जिंदगी अचानक एक भयानक तूफान...
# एपिसोड 2: अंधेरे का पहला कदमफाजिल्का कॉलेज की लाइब्रेरी के पीछे की वो मुलाकात...
0 — कर्ता का अंत, होना शेष0 केवल शांति नहीं है।0 केवल विचारों का रुक जाना नहीं...
मैं लगातार लियो के पीछे-पीछे चलती रही।"रुको!""कम-से-कम मेरे सवालों का जवाब तो दो...
इस हिस्से को मैं आपकी कहानी के मूल भाव को रखते हुए थोड़ा अधिक उपन्यासात्मक, सहज...
छोटे शहर का लड़का और वो पहली मुलाकात लखनऊ से करीब दो घंटे की दूरी पर बसा एक छोटा, शांत और हरा-भरा कस्बा—'मलिहाबाद'। जहाँ सुबह-सुबह पक्षियों की चहचहाहट और मिट्टी की सोंधी...
ये कहानी पूरी तरह से मेरी कल्पना पर आधारित है ये कहानी पूरी तरह से मेरी कल्पना पर आधारित है अगर इस कहानी या इसके किसी भी पात्र से आपको भावनात्मक रूप से ठेस पहुंचाती हैं तो मैं क्षम...
दूर कही एक सुनसान घना जंगल था। जहां चारों तरफ एक खामोशी छाई हुई थी उस जंगल में कोई भी जानवर आने से डरता था उसी जंगल के बीच से होकर उदयपुर तक जाने का एक रास्ता था दिन को तो लोग उस र...
शहर की भीड़भाड़ से दूर, एक संकरी गली के कोने में बना वह छोटा सा कैफे, 'द ओल्ड ओक', आज कुछ ज्यादा ही खामोश लग रहा था। शायद उस खामोशी की वजह दोपहर का वक्त था, या शायद कुदरत ख...
बेटे की परीक्षा समाप्त हो गई थी। श्रीश भी जिद करने लगा मम्मी कहीं बाहर घुमाकर लाओ। मेरी भाभी जम्मू रहती हैं पिछले पाँच साल से। लेकिन कभी जम्मू जाना नहीं हुआ। एक तो दिल्ली से बहु...
"घर में अजनबी" - 7000 Words* सुबह के 5:47 बज रहे थे। दिल्ली में दिसंबर की सर्दी। बाहर कोहरा। मल्होत्रा हाउस के अंदर हीटर चल रहा था, पर अनाया के कमरे में जैसे बर्फ जम...
कलावती हॉस्पिटल के लेबर रूम में प्रसव पीड़ा को चुपचाप सहन कर रही थी रेशमा… ना कोई चीख, ना चित्कार… बस चेहरे पर एक अजीब सी शांति थी। पीला पड़ा चेहरा और सफेद होती आँखें किसी और ही...
क्या आपके अपने माता-पिता को कुछ अपशब्द कहने के बाद पछतावा हुआ ?हम अक्सर कई बार अपने माता-पिता को कहते हैं कि उन्हें कुछ पता नहीं है।उन्हें कुछ आता नहीं है।आप नहीं समझ पाओगे।आपगे जम...
रात, जिसने शहर की नींद छीन ली रात के दो बजकर सत्रह मिनट। अर्जुनपुर शहर सो रहा था। सड़कें लगभग खाली थीं। कहीं-कहीं स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी बारिश से भीगी सड़क पर पड़ रही...
यह कहानी एक काल्पनिक सुपरहीरो से प्रेरित है, लेकिन इसके किरदार और जज़्बात पूरी तरह से मौलिक हैं।" लेखक _समीर खान क़िस्त 1: शिकागो की ठंडी धूप शिकागो की शाम और ऊपर से गिर...
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