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अलसुबह का समय था। वातावरण में कोहरा छाया हुआ था और कोहरे के कारण आसपास एकदम ठंडक...
उधर हॉल में बैठे बैठे स्वास्तिक बार बार घड़ी को निहारने में लगा रहता है तभी कॉल...
होटल का conference hall – दोपहरConference hall में कई clients और board members ब...
'The Mystery of Death' — अध्याय 3तो दोस्तों, पिछले चैप्टर में हमने देखा...
** हीरो...!** **भाग 2 : पहली मुस्कान, पहली मदद**घंटी बजने के बाद कॉलेज की इमारत...
अध्याय - ११अमृता की समझदारी और चतुराई भरे निर्णय के कारण मानसकुमार और गायत्री के...
-------------स्टाफ रूम का माहोल अजीब सा हो गया था। चारू हैरत मु आर्दश को देख रहे...
फोन की स्क्रीन पर चमकते हुए रिया के नाम को देखकर आरव की उंगलियाँ एक पल के लिए जम...
एक आम सी प्रेम कहानी भाग - ११लेखिका "अनामिका" दृश्य : मलय का घर (खुशी और उत्साह...
अध्याय 7: दस साल की नींदट्रेन चल रही थी।लेकिन अंगद के लिए समय रुक चुका था।वह अपन...
यह कहानी पूरी तरह से मेरी अपनी कल्पना पर आधारित है। कई बार ऐसी घटनाएं हमारे समाज में घटती रहती हैं, यह उसका एक अक्स मात्र हो सकता है। मेरी दो हिट उपन्यासों 'द मिस्ट्री ऑफ स्केल...
स्वरा..... स्वरा....उठो स्वरा ....कब तक यूं ही सोती रहोगी ?? क्या माँ....सोने भी दो ना.... बिल्कुल भी नहीं..... चलो जल्दी उठो जाओ देखो तुम्हारी बरडी तुम्हारा कब से इंतजार कर...
विराट का आलीशान घर – सुबह रसोईघर में संपूर्णा (चाय बनाते हुए, मुस्कान के साथ) बोली - अच्छा, आज विराट जी को जल्दी जाना है, तो चाय गर्म और नाश्ता तैयार। विवान, अपना खिलौना इध...
आंध्र प्रदेश का एक दूर-दराज और अलग-थलग गाँव था—पेरीकुलम (Perikulam)। यह गाँव भौगोलिक रूप से एक ऐसी जगह पर फंसा था जहाँ चारों तरफ से संकट घिरा हुआ था। गाँव के दो तरफ ऊंचे-ऊंचे पहाड़...
पहली मुलाक़ात** सुबह के ठीक 7:15 बजे शहर के एक शांत मोहल्ले में एक छोटी-सी आवाज़ गूँज उठी। “दीदी… उठ जाइए ना… कॉलेज नहीं जाना क्या?” दरवाज़े पर हल्के-हल्के लेकिन लगातार ठक...
समर्पित उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं। प्रस्तावना यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक...
बहुत लंबे और थकान भरे दिन के बाद अगर जिंदगी में कहीं सुकून है तो वो है सिर्फ़ ये मसाला चाय! मैं अपने घर की बालकनी में एक खाट पर बैठी थी। पास में एक हुक्का रखा हुआ था जिसे मैं घूरे...
अनजानी मुलाकात लखनऊ की बारिश में भीगती वह शाम कुछ ख़ास थी। गोमती नगर के एक छोटे और शांत कैफे में मंद-मंद संगीत बज रहा था और बाहर की बूंदों की आहट कांच की खिड़कियों पर साफ़ सुनाई द...
लेखिका की ओर से अक्सर ऐसा होता हे की हमे बचपन से हि दिखाया या अहसास कराया जाता हे के प्रेम कहानिया बस अमर या अद्भुत हि होती हे। जैसे की फिल्मो मे हीरो-हीरोइन या किताबों मे रा...
आख़िरी लोकलरात के 11:52।ट्रेन छूटने ही वाली थी।अंगद दौड़ते हुए प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँचा।फोन कंधे और कान के बीच दबा हुआ—“बस 2 मिनट… मैं train में हूँ… भेज दूँगा।”दरवाज़े बंद होने लगे।व...
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