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Mr. & Ms. FakeEpisode 6 – The Ex is Back!रविवार...सान्वी के जाने के बाद भी पूरे...
बंद कमरे का रहस्यभाग 1: रहस्यमयी मकानगाँव के किनारे एक पुराना मकान था।पिछले बीस...
अधूरी किताब – सीजन एपिसोड 29: मौन कक्ष का द्वारअरोही ने जैसे ही मौन कक्ष की ओर प...
इतिहास के...
हम अक्सर सोचते हैं कि पवित्रता केवल सुबह नहा-धोकर मंदिर जाने, ग्रंथों को छूने या...
कानपुर जहां गंगा की हल्की हवा के संग आधुनिक शहर की हलचल मिलती है। यहां के कॉलेजो...
रात का सन्नाटा एक भयानक गर्जना से टूट गया। जंगल के चारों ओर से दर्जनों राक्षस नि...
आज के जमाने में सब अपने में ही बीजी (busy) रहते हैं। कोई भी किसी पे ध्यान नहीं द...
बर्बाद इश्कएपिसोड 16 — जब असली तूफ़ान आयामुंबई में कहते हैं कि जब एक मुसीबत जाती...
बचपन की मौलिकता और मौलिक प्रश्नों की मृत्यु (वेदांत 2.0 का एक दृष्टिकोण) म...
इंट्रोडक्शनशैतान गढ़ यह एक ऐसा शहर है जहां सारे छोटे बड़े भूत प्रेत और शैतान राक्षस रहते है और वो वहां से निकलना चाहते है पर निकल नहीं पा रहे तो वो अपनी पूरी कोशिश करते है कि वो बा...
"जिस दिन इंसान नहीं, किस्मत रोई थी..." रात के ठीक बारह बजे... आसमान जैसे अपना सारा दर्द धरती पर उँडेल रहा था। बिजली की हर कड़क के साथ पूरा शहर काँप उठता, और उसी बारिश में श...
सुबह का समय था…हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी…मंदिर की घंटियों की मधुर आवाज़ पूरे माहौल को पवित्र बना रही थी…राधा-कृष्ण के मंदिर में आज कुछ खास शांति थी…उसी मंदिर के दरवाज़े पर एक...
Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे। अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।...
राणा जैसे ही कमरे में प्रविष्ट हुआ तो चौंक उठा राज के सिर पर पट्टी बंधी हुई थी।उसके पास बैठते हुए राणा बोला, क्या रात में दीवार के साथ सिर टकराया था ?हां।अगर यह सच है तो तुम्हें पा...
पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था। उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था। उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...
क्षितिज के उस पार तक फैला आकाश आज नीले रंग का नहीं, बल्कि ताजे बहते रक्त के समान गहरा लाल था। हवा भारी और बोझिल हो चुकी थी, जिसमें लोहे जैसी तीखी खून की महक और जलते हुए मांस की दुर...
" काजल की जब नींद टूटी उसने खुद को एक अनजान कमरे में पाया। फर्श पर उसके कपड़े पड़े हुए थे। उसका सिर दर्द से फटा जा रहा था ।" "दर्द से कराहते हुए वह किसी तरह बेड पर उ...
क्या कोई इंसान जानबूझकर अपने हंसते-खेलते जीवन को आग लगा सकता है? शायद नहीं। लेकिन जब वक्त का पहिया उल्टा घूमता है, तो इंसान खुद अपने हाथों से अपनी तबाही का रास्ता चुन लेता है। मेरे...
स्वरा..... स्वरा....उठो स्वरा ....कब तक यूं ही सोती रहोगी ?? क्या माँ....सोने भी दो ना.... बिल्कुल भी नहीं..... चलो जल्दी उठो जाओ देखो तुम्हारी बरडी तुम्हारा कब से इंतजार कर...
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