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रश्मि ने भी अपने डर को छुपाते हुए कृष्ण की हाँ में हाँ मिलाया। उसने आकृति का हाथ...
तूफ़ान की पहली आहट -उस रात घर में कोई ठीक से सो भी नहीं पाया।रिया कमरे के कोने म...
------------------------------ अध्याय 2: कर्मयोग (काम का असली विज्ञान: प्रेरणा क...
प्रताप का राज्यारोहण और मेवाड़ की किलेबंदीचित्तौड़ को खोने के चार वर्ष के बाद, 1...
अभी तक आपने पढ़ा कि रितु का परिवार भावनात्मक रूप से पंकज से जुड़ गया और विदाई के...
मेरे हामी भरने के बाद वह मुझे खाने की मेज पर ले आई,तब तक दोनों अधेड़ व्यक्ति वहा...
धड़कनों की बेईमानी और वो तूफानी रातजैसे ही कबीर के जूतों की आवाज़ डाइनिंग हॉल की...
2.1. यादों का आँगन और मौसी का दुलारअजय जब मौसी के घर पहुँचा, तो दिल में एक अजीब-...
ऋगुवेद सूक्ति--(61) की व्याख्या "बलं धेहि"ऋगुवेद --4/9/6भाव--शक्ति प्रदान करो।ऋग...
[49]“दो दिन पूर्व मेरे कार्यालय में सपन और निहारिका के साथ कपिल महोदय भी आए थे।...
देवक़ेड़ा का रहस्य छत्तीसगढ़ के भिलाई शहर की चकाचौंध से लगभग 200 किलोमीटर दूर, जहाँ मोबाइल के सिग्नल साथ छोड़ देते हैं और सड़कों की जगह ऊबड़-खाबड़ पगडंडियाँ ले लेती हैं, वहाँ बसा...
जुलाई का महीना था। आसमान कई दिनों से बादलों को थामे बैठा था, जैसे किसी इकरार का इंतज़ार कर रहा हो। और फिर उस दिन… पहली बारिश शुरू हुई। कॉलेज की छुट्टी के बाद आईशा बस स्टॉप पर खड...
बाल्यकाल एवं यौवन सांगा की हत्या के उपरांत मेवाड़ में सत्ता पाने के लिए गृहयुद्ध छिड़ गया। उस काल का संक्षिप्त विवरण इसलिए आवश्यक हो जाता है, क्योंकि इस गृहयुद्ध का प्रताप के जीवन...
( ⚠️ पढ़ने से पहले ज़रूर जानें! धार्मिक नहीं, तार्किक: यह किताब किसी धर्म या संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि मानव मनोविज्ञान और व्यावहारिक जीवन जीने के विज्ञान पर आधारित है। शैली...
" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...
गर्मी के दिन थे।घास फूस लगभग खत्म हो चली थी और पशुओं को चराने के लिए ज्यादा जगह भी नहीं बची थी गर्मी बढ़ जाने की वजह से तेज धूप हो जाती थी और दोपहर के वक्त गायों को छांव में इकठ्ठा...
छोटे शहर का लड़का और वो पहली मुलाकात लखनऊ से करीब दो घंटे की दूरी पर बसा एक छोटा, शांत और हरा-भरा कस्बा—'मलिहाबाद'। जहाँ सुबह-सुबह पक्षियों की चहचहाहट और मिट्टी की सोंधी...
अध्याय 1: कलाई पर ठहरती कशमकश 1.1 धुंध और धड़कनें सुबह के ठीक पाँच बजे थे। उत्तर भारत की सड़कों पर तैरती सर्द सुबह की वो ठंडी, नम हवा ट्रेन की लोहे की खिड़की से छनकर सीधे अजय...
आठ वर्ष पूर्व :- दूसरे दिन प्रात: ब्राह्म मुहूर्त से ही सेलेना की योग साधना प्रारंभ होनेवाली थी। सेलेना को रात्री भर निद्रा नहीं आई। कारण यह नहीं था कि पहाड़ पर सभी सुख सुविधा का...
“शिफ़ा शिफ़ा....”,अनस सहन में खड़ा उसको आवाज़ कम दे रहा था और चि़ल्ला ज़्यादा रहा था।“क्या मुसीबत है, कभी तो चैन से खाना खाने दिया करो। हर वक़्त सर पर नाज़िल रहते हो”वह बड़बड़ाती ह...
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