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Featured Books

अधूरापन By Falguni Dost

समर्पित

उन सभी स्त्रियों को जो किसी न किसी बंधन में जकड़ी हुई हैं।

प्रस्तावना

यह कहानी मेरा पहला सह-लेखन प्रयास है। मेरे और पृथ्वी गोहेल के विचारों को प्रस्तुत करने की एक...

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खलनायिका के रूप में पुनर्जन्म By Shanaya khan

Reincarnated as Villainess: The Man Who Hated Her Became Her Obsession
वह एक ऐसी कहानी पढ़ रही थी जिसमें एक क्रूर विलेनैस अपनी निर्दयता के लिए बदनाम थी। एक ऐसी लड़की, जिसने अपनी श...

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प्यार का जाल By Ritu kumari

अनजानी मुलाकात
लखनऊ की बारिश में भीगती वह शाम कुछ ख़ास थी। गोमती नगर के एक छोटे और शांत कैफे में मंद-मंद संगीत बज रहा था और बाहर की बूंदों की आहट कांच की खिड़कियों पर साफ़ सुनाई द...

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राज़ के सात फेरे. By jaisy singh

मुंबई...
सपनों की नगरी...
एक ऐसा शहर जो कभी सोता नहीं।
जहाँ रातें भी रोशनी से जगमगाती हैं और हर सुबह अपने साथ हजारों नए ख्वाब लेकर आती है।
इस शहर में हर आँख में एक सपना पलता है...

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सजा.....बिना कसूर की By Soni shakya

प्रिया पाठको,,

यह एक सामाजिक कहानी है ।

जिसे मैंने अपने शब्दों के मोती में पिरोकर माला बनाने की कोशिश की है ।

अपना स्नेह और आशीर्वाद बनाए रखिएगा ??

....... .......

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Shakti ke Shiv By sheetal

रात के लगभग दस बज रहे थे। लोधी रोड स्थित CBI Special Crime Division के office से बाहर निकलते हुए शक्ति ने अपनी SUV स्टार्ट की। पिछले छह घंटों से चल रहे operation ने उसे थका दिया था...

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मंजिले By Neeraj Sharma

बात उन दिनों की है, एक मकान बना कर रहना, एक मिसाल और योग्यता थी। मकान अगर मंजिले हो, तो कया बात, बहुत अमीर समझे जाने वाला शक्श....." हाहाहा, "हसता हुँ, आपने पर.... ये दोगल...

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PLATFORM By Sagar Joshi

आख़िरी लोकलरात के 11:52।ट्रेन छूटने ही वाली थी।अंगद दौड़ते हुए प्लेटफ़ॉर्म पर पहुँचा।फोन कंधे और कान के बीच दबा हुआ—“बस 2 मिनट… मैं train में हूँ… भेज दूँगा।”दरवाज़े बंद होने लगे।व...

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ऐसे बरसे सावन By Devaki Singh

स्वरा..... स्वरा....उठो स्वरा ....कब तक यूं ही सोती रहोगी ??

क्या माँ....सोने भी दो ना.... बिल्कुल भी नहीं.....
चलो जल्दी उठो

जाओ देखो तुम्हारी बरडी तुम्हारा कब से इंतजार कर...

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હું રમતી હતી ઓટલે. By yogina patel

ઓટલો ગામની એ સવાર આજે પણ મારી આંખો સામે એવી જ ઊભી થાય છે સૂરજ હજી પૂરો ઉગ્યો ન હતો આકાશમાં હળવો લાલ રંગ પથરાયો હતો ઘરના આંગણામાં પડેલી ઠંડી માટી પર મારા નાના પગલા પડતા અને હું દોડત...

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....... .......

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