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[ 12. और अधिक भूल और उनसे संबंधित पहलू ](बी1) नेहरू ने उपहार-स्वरूप दी काबो घाटी...
तीसरे वर्ष ऐसा हुआ कि मैंने जुलाई में ही बीए भाग एक का प्रवेश सम्पन्न कर 25 जला...
Car के अंदर, रात का समय, हल्की हल्की हवा चल रही है।Kabir ड्राइव कर रहा है। Karan...
यह कहानी “मैं दादा-दादी की लाड़ली” का चौथा भाग है।बचपन की मासूमियत और अधूरे प्या...
छह साल बाद : मुम्बई एक ऑफिस में : “अरे यार !जल्दी चल।” एकथोड़ी गोलू-मोलू सी लड़क...
मौत की खाई और मन की आँखें"सिया और रोबोटिक सूट पहने उसके अंकल उस अंतहीन खाई में ग...
तभी जेठानी अंदर आई।हाथ में चाय।चेहरे पर माँ जैसी चिंता की एक्टिंग।“अरे… थक गई हो...
धीरे-धीरे दिन को जाने लगे और अब निशा की मेहनत रंग लाने लगी,,,,विजय की हालत में अ...
भावुक टूटन और एकजुटजेल में कालिया से मुलाकात। पृथ्वी गया। "खत्म करो ये चक्र।" का...
माया ने नीरा को ऊपर उठाया। "ये साये मुक्त हो जाओ!" लहर ने सायों को आजाद किया। ले...
गुरु जी डॉ0 सूर्यपाल सिंह से मैं दो वर्ष से सम्पर्क में हूँ। प्रारम्भ में गुरु जी के बोले शब्दों को लिखने के लिए ही आया था। धीरे-धीरे उनके साहित्य को भी पढ़ने में रुचि जगी। उनके बहु...
Karan Thakur उम्र (26) – शांत, समझदार, काबिल AI इंजीनियर। Kabir Thakur उम्र (25) – चुलबुला, मासूम, तेज दिमाग वाला AI डेवलपर। Shreya Sharma उम्र (23) – सरल, भोली, सुंदर AI इंज...
मैं अपने बचपन में दादा-दादी की लाड़ली थी।उनकी आँखों का नूर, उनके आँगन की सबसे प्यारी हँसी।घर में अगर कोई सबसे पहले मेरी ओर देखता था,तो वे दादा-दादी ही होते थे।उनके लिए मैं केवल उनक...
रात का समय था , मुम्बई के हॉस्पिटल के एक वार्ड में एक खून से सनी हुई एक औरत को लाया गया जो कि दिखने में करीब बाईस - तेईस साल की लग रही थी । उसने एक लाल शादी का जोड़ा पहना हुआ था ।...
प्रतिज्ञा और पुराना घर भविष्य की चकाचौंध और अत्याधुनिक तकनीक से लैस शहर की ऊँची इमारतों के बीच, सिया का मन अशांत था। वह एक माहिर गेमर था, लेकिन आज उसके सामने ज़िंदगी का सबसे कठि...
रात गहरा चुकी थी। चाँदनी खिड़की से भीतर गिर रही थी, लेकिन कमरे के माहौल में एक अनकही बेचैनी थी। चित्रा की नींद गहरी थी, चेहरे पर मासूमियत… पर दिव्यम पूरी रात सो नहीं पाया। वह...
आसमान में काले बादल छाए हुए थे ऐसा लग रहा था जैसे आज इंदर देव रूष्ट हो और अपना सारा कोप निकालना चाहते हो,बरसात आने की आशंका में सभी लोग अपना काम जल्दी-जल्दी समेट कर अपने घर पहुंचन...
एक ही शहर, दो दुश्मन और वो पुरानी चोट दरभंगा की तपती दुपहरी में राजवीर राठौर और भानु प्रताप ठाकुर की दोस्ती की मिसाल दी जाती थी। दोनों का रसूख ऐसा कि परिंदा भी पर न मारे। राजवीर स...
सन्नाटे की गूँज माया की ज़िंदगी एक खाली कमरे की तरह थी—चुपचाप, उदास और अकेली। तीस साल की हो चुकी थी वह, लेकिन शादी का ख्याल उसके मन के किसी कोने में दफन हो चुका था। वह एक छोटे से...
1. प्रारंभिक स्वरूप परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है, मंत्रोच्चार औ...
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