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इसका कारण ये है, कि कभी जो हम सोचते नहीं वो हो जाता है। एक चोरी पैसो कि हो जाने...
**चैप्टर 2: धोखे की सीढ़ी और शैतानगढ़ का क्रूर सच**जैसा कि हमने देखा, रिया और आश...
किस्त 10: सच का सामना (The Unmasking)एली के हाथ में मौजूद वह लेंस कैप जैक की तरफ...
रूम नं. 407भाग – 2 : बंद दरवाज़े के पीछेआरोही का पूरा शरीर डर से काँप रहा था।उसक...
स्वागत है दोस्तों एपिसोड 7 में! पिछले एपिसोड में हमने देखा कि विक्रांत आन्या के...
शाम ढल चुकी थी। घर में एक अजीब सी खामोशी पसरी थी, जैसे कोई बड़ा तूफान आने वाला हो...
ऋगुवेद सूक्ति-- (55) की व्याख्या "ऋतं च सत्यं च"ऋगुवेद--10/190/1अर्थ --नियम और स...
पूरे दिन सिद्धिदात्री का मन उलझा रहा।उसने सोचा -वह नहीं जानता कि वह क्या है। लेक...
दिल्ली से देहरादून का सफ़र मानो किसी फ़िल्म का धीमा-सा खूबसूरत गीत बन गया था।रास...
"गुनाह करना , गुनाह सहना और गुनाह होते देखना ये भी एक अपराध ही है।"अब तक दृष्टि...
कुछ यादें अचानक गायब नहीं होतीं। वे बस धीरे-धीरे पीछे खिसक जाती हैं, इस तरह कि हमें लगता है हमने ही उन्हें छोड़ दिया है। और जब वे लौटती हैं, तो शोर नहीं करतीं—बस चुपचाप अपनी जगह...
मुंबई की रातें— जो कभी हज़ारों सपनों की धड़कन हुआ करती थीं, वे अब अविन अविनाशी चौहान के लिए किसी रोमांच से नहीं, बल्कि एक खामोश मजबूरी से भरी थीं। यह नवंबर की उमस भरी रात थी; मरीन...
एक भयानक खोज दिल्ली की पुरानी लाइब्रेरी, जहां धूल से भरे शेल्फ़ और पन्नों की हल्की महक थी, रिया का पसंदीदा ठिकाना था। 22 साल की रिया, इतिहास की छात्रा थी, और उसे लगता था कि हर पुर...
रात इतनी गहरी थी कि चाँद की रौशनी भी शायद डर के छिप रही थी। बारिश की बूंदें पत्थरों पर जोर से गिर रही थीं, और हर तरफ सिर्फ अंधेरा था।यह कहानी है २२ साल के आरव की, जो कुछ ही समय पहल...
खामोश पेंटिंग की पहली साँस पुरानी गली की वह कला-दुकान हमेशा की तरह उस शाम भी आधी अँधेरे में डूबी हुई थी। बाहर बारिश की हल्की बूँदें पत्थरों से टकरा रही थीं और अंदर हवा में पुरान...
एक बार की बात है—निलेश, जय और पार्थ देर रात निलेश के घर पर पार्टी कर रहे थे। पार्टी खत्म होने के बाद जय और पार्थ अपने-अपने घर के लिए निकल पड़े। जय तो अपने घर पहुँच गया, लेकिन पार्थ...
कुछ प्रेम कहानियाँ ज़मीन पर शुरू होकर आसमान में बिखर जाती हैं। कुछ, मौत के बाद भी नहीं मिटती है । ये कहानी है एक ऐसे प्यार की, जो अधूरा रह गया… और एक ऐसी रूह की, जो अब अधूरी नही...
उस सड़क के बारे में गांव के बुजुर्ग कहते थे कि सूरज ढलने के बाद वह रास्ता किसी और ही दुनिया में चला जाता है। जो वहां गया वह लौटा जरूर है पर पहले जैसा कभी नहीं रहा। उसी सड़क पर उस र...
हिमालय की ढलानों पर रात पूरी तरह उतर चुकी थी। देवदार के घने जंगल के बीच बने छोटे-से कैम्प में एक अलाव जल रहा था, जिसकी लपटें सबके चेहरों पर नारंगी रोशनी बिखेर रही थीं। ठंडी हवा तम्...
ज़िंदगी में कभी-कभी ऐसी घटनाएँ घट जाती हैं जो हमारी अक़्ल और समझ से बाहर होती हैं। आप मानें या न मानें, लेकिन उन बातों को नकारा नहीं जा सकता। वे अपने आप को सच साबित कर ही देती हैं।...
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