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"ठीक है प्रॉमिस नही बताउंगी किसी को भी ,आप बताएं तो बात क्या है"??वह curious सी...
सुबह की पहली किरणें अभी जंगल की ऊँची पहाड़ियों पर पड़नी शुरू ही हुई थीं। अर्जुन...
ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ -...
कुछ दिनों बाद…सब कुछ शांत हो चुका था…खतरा खत्म…डर खत्म…अब…सिर्फ एक मंज़िल थी इंड...
प्रकृति के चमत्कार(लगभग 2000 शब्दों की प्रेरणादायक हिन्दी कहानी)प्रकृति से बड़ा...
दोनों आमने-सामने बैठ गए।दुकान में रखी पुरानी लकड़ी की कुर्सियों पर दोनोंआमने-साम...
*शीर्षक: "नदी के उस पार वाली ट्रेनिंग"* ---गाँव का नाम था बिरसिया। राजस्थान और M...
सुबह जब रीतिका ने आँखे खोली तो 8 बज रहे थे और उसकी पहली क्लास 10 बजे की है। वो ज...
परम पूज्य दादा भगवान कहते हैं कि, अहिंसा का पालन करने के लिए स्वाद की इन्द्रिय,...
उस होटल में अधिकतर विदेशी लोग आते थे , क्योंकि वह समंदर से कुछ ही दूर था। होटल स...
वॉयनिच पांडुलिपि – दुनिया की सबसे रहस्यमयी और शापित किताब साल 1912। यूरोप की एक शांत और प्राचीन इमारत… जिसकी मोटी पत्थर की दीवारें सदियों का इतिहास अपने भीतर छुपाए बैठी थीं।...
वाराणसी की गलियों में शाम का धुंधलका गहरा रहा था। गंगा की लहरों पर दीयों की रोशनी कॉंप रही थी, लेकिन शहर के बाहरी इलाके में स्थित 'अनंत विंटेज पैलेस' के अंदर एक अलग ही खेल...
एक एंकर अपनी न्यूज़ रूम में चिल्ला चिल्लाकर लोगों को एक जानकारी दे रही थी।"लोगों को भी सचेत रहना चाहिए, अगर सच्चाई सामने नहीं आती तो किसी बेगुनाह को जिंदगी भर सलाखों के पीछे सड...
मुंबई की चमकती ऊँची इमारतों में से एक — “नव्या ग्लोबल कॉर्प” का हेडक्वार्टर। शीशे की दीवारों से ढका वो टॉवर शहर की ताकत और महत्वाकांक्षा का प्रतीक था। और उसकी सबसे ऊपरी मंज़िल पर...
रात के ठीक 2:13 बजे थे। शहर के पुराने सरकारी अस्पताल का पिछला हिस्सा — जहाँ शायद ही कोई जाता हो — अँधेरे में डूबा हुआ था। वहीं था… मॉर्ग। दीवारों पर जमी सीलन, टिमटिमाती हुई...
'जैकब्स हॉस्टल' के बाहर सन्नाटे को चीरती हुई बर्फीली हवाएं चल रही थीं। छुट्टियों का सीजन था, इसलिए जो हॉस्टल कभी 500 लड़कों के शोर से गूँजता था, आज वहाँ मुर्दा शांति पसरी थी...
मुंबई की उस रात में उमस नहीं, एक दम घोटने वाली खामोशी थी. उपनगर की एक तंग गली के आखिरी छोर पर स्थित उस जर्जर इमारत का कमरा नंबर सत्रह, किसी जिंदा कब्र जैसा लग रहा था. घडी की सुइयां...
" इच्छा... तुम... नहीं नहीं तुम मेरी इच्छा नहीं हो सकती... " जोरो से हॅसते हुए आवाज गूंजती है.... " सही पहचाना में तेरी इच्छा नहीं हूँ मै.. वो हूँ जो तू सोच भी नही...
कुछ यादें अचानक गायब नहीं होतीं। वे बस धीरे-धीरे पीछे खिसक जाती हैं, इस तरह कि हमें लगता है हमने ही उन्हें छोड़ दिया है। और जब वे लौटती हैं, तो शोर नहीं करतीं—बस चुपचाप अपनी जगह...
मुंबई की रातें— जो कभी हज़ारों सपनों की धड़कन हुआ करती थीं, वे अब अविन अविनाशी चौहान के लिए किसी रोमांच से नहीं, बल्कि एक खामोश मजबूरी से भरी थीं। यह नवंबर की उमस भरी रात थी; मरीन...
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